Explainer: फिल्मों की रिलीज डेट कौन करता है तय? त्योहारों पर ही क्यों आती हैं बड़ी मूवीज? जानिए पूरा खेल
Who Decides Films Release Date: फिल्म की रिलीज डेट सिर्फ कैलेंडर में एक डेट को ऐसे ही सेलेक्ट करके नहीं होती है. किसी बड़ी फिल्म के लिए सही दिन चुनना करोड़ों रुपये के बिजनेस से जुड़ा डिजिजन होता है. यही वजह है कि बड़े स्टार्स की फिल्में अक्सर ईद, दिवाली, क्रिसमस, पोंगल या दूसरे बड़े फेस्टिवल के मौकों पर रिलीज होती है. इन दिनों छुट्टियां होती हैं, फैमिली के साथ बाहर जाने का मौका मिलता है और लोगों का एंटरनेटन पर खर्च करने का मूड भी रहता है. इसके पीछे प्रोड्यूसर, डिस्ट्रीब्यूटर, थिएटर और कई बार ओटीटी प्लेटफॉर्म की बडी प्लानिंग होती है. तो आखिर इस तारीख का फैसला कैसे होता है और फेस्टिवल को लेकर इतनी दिलचस्पी क्यों रहती है? इसी वजह से डेट चुनने के पीछे कई लोगों की प्लानिंग होती है.
रिलीज डेट का फैसला कौन करता है?
फिल्म की रिलीज डेट तय करने में सबसे पहले प्रोड्यूसर की अहम रोल होता है क्योंकि फिल्म में पैसा लगाने और उसकी लागत निकालने की जिम्मेदारी उसी के फैसले पर होती है. वह फिल्म का बजट, शूटिंग की लोकेशन, पोस्ट प्रोडक्शन का काम और मार्केटिंग की तैयारी देखकर रिललीज तारीखों पर आइडिया देता है.
इसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर का रोल आता है. डिस्ट्रीब्यूटर अलग-अलग शहरों और मार्केट की सिचुएशन को समझता है और देखता है कि किस टाइम फिल्म को कितनी स्क्रीन मिल सकती हैं. अगर उसी डेट पर कोई और बड़ी फिल्म आ रही है तो स्क्रीन और शो दोनों बंट सकते हैं. थिएटर मालिक भी अवेलेबल स्क्रीन और चल रही फिल्मों की कमाई देखकर शो तय करते हैं.
त्योहारों पर बड़ी फिल्मों की डिमांड क्यों बढ़ जाती है?
त्योहारों के समय सबसे बड़ा फायदा हॉलीडे का होता है. दर्शख के पास शनिवार और रविवार होते हैं, लेकिन दिवाली, ईद, क्रिसमस या दूसरे बड़े मौकों पर हॉलीडे की वजह से थिएटर जाने के लिए ज्यादा टाइम मिल जाता है. फैमिली और दोस्त साथ फिल्म देखने का प्लान बना सकते हैं. इसी वजह से त्योहार के आसपास रिलीज हुई फिल्म को काफी अच्छी ओपनिंग मिलती है. दूसरा बड़ा कारण है, इस मौके पर लोग खर्च करने का मूड भी होते है. त्योहारों के समय खरीदारी, घूमने और फैमिली के साथ बाहर खाने-पीने पर खर्च बढ़ता है. इसी माहौल में फिल्म देखना भी लोगों की आउटिंग का हिस्सा बन जाता है. त्योहार के दौरान फिल्म देखने का प्लान आसानी से बन सकता है. यही कारण है कि बड़ी फिल्मों के लिए त्योहार की तारीख पर पहले से नजर रहती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि फेस्टिवल पर रिलीज होते ही फिल्म हिट हो जाती है, अगर कोई फिल्म लगातार हाउसफुल चलती है तो तभी वो हिट होती है.
स्टार्स की फेस्टिवल रिलीज का कनेक्शन
बॉलीवुड में कुछ स्टार्स ने खास फेस्विल पर अपनी फिल्मों को रिलीज करते हैं. सलमान खान की अक्सर फिल्में ईद के मौके पर रिलीज होती है और समय के साथ ईद रिलीज उनके नाम से जुड़ी पहचान बन गई. शाहरुख खान की कई फिल्मों को दिवाली या क्रिसमस के मौके पर आती है. इसी तरह आमिर खान की कई चर्चित फिल्मों ने क्रिसमस के आसपास सिनेमाघरों में दस्तक दी. जब किसी स्टार की फिल्म किसी खास फेस्टिवल पर आने की आती है, तो फैंस पहले से उसकी रिलीज के एक्साइटेड हो जाते है, जिससे उसकी हाइप अपने आप बढ़ जाती है. साउथ सिनेमा में भी अब यही पैटर्न दिखाई देता है. पोंगल, संक्रांति और ओणम जैसे फेस्टिल पर साउथ की हर साल कई बड़ी फिल्में रिलीज होती हैं.
रिलीज डेट के पीछे चलता है बॉक्स ऑफिस का गणित
मेकर्स रिलीज डेट चुनते समय सिर्फ फेस्टिल नहीं देखते. वे इस बात पर भी नजर रखते हैं कि उस समय कोई बड़ी फिल्म, क्रिकेट टूर्नामेंट या दूसरा बड़ा मनोरंजन इवेंट तो नहीं है. भारत में क्रिकेट बहुत देखा जाता है.इसलिए आईपीएल जैसे टूर्नामेंट के दौरान फिल्मों की रिलीज एक चुनौती होती है. एग्जाम के टाइम समय भी कई फिल्मों के लिए चुनौती का समय होता है तो क्योंकि बच्चें अपनी परिक्षाओं की तैयारी में लग जाते हैं और उन्हें फिल्में देखने का टाइम नहीं मिलता. इसलिए कुछ बड़ी फिल्मों के लिए फरवरी से अप्रैल के बीच की रिलीज डेट चुनते समय ऑडियंस पैटर्न पर खास नजर रखी जाती है. सबसे बड़ा सवाल क्लैश का होता है. अगर दो बड़ी फिल्में एक ही दिन रिलीज हो रही हैं तो उन्हें स्क्रीन, शो और दर्शकों के लिए मुकाबला करना पड़ सकता है. इसका असर ओपनिंग पर दिखाई देता है. इसलिए प्रोड्यूसर और डिस्ट्रीब्यूटर ज्यादा स्क्रीन और शो मिलने वाली डेट तलाशते हैं.
ओटीटी ने भी बदल दिया रिलीज डेट का खेल
जब कोई फिल्म अपना थिएटर रन पूरा कर लेती है तो उसके बाद वह ओटीटी पर रिलीज होती है. फिल्म की थिएटर रिलीज और ओटीटी रिलीज के बीच कितना समय रहेगा, यह फिल्म की डील और उस समय लागू इंडस्ट्री रूल्स पर निर्भर कर सकता है. आठ हफ्ते की थिएट्रिकल विंडो भी कई रिलीज प्लान में ध्यान में रखी जाती है. अगर किसी फिल्म के लिए थिएटर रिलीज सही ऑप्शन नहीं बन रही, तो मेकर्स डायरेक्ट-टू-ओटीटी रिलीज पर भी कर सकते हैं. नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो और जियोस्टार जैसे प्लेटफॉर्म फिल्मों और शोज के लिए अलग तरह की रिलीजस्ट्रेटेजी अपनाते हैं. ओटीटी पर भी वीकेंड अहम होता है, क्योंकि छुट्टी में लोग ज्यादा कंटेंट देख सकते हैं.
कभी-कभी फेस्टिवल भी नहीं आता काम
त्योहार फिल्म को बड़ी शुरुआत जरूर दे सकती है. लेकिन अच्छी स्टोरी की जगह नहीं ले सकता. इसका साफ उदाहरण ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में देखा गया. फिल्म से आमिर खान और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े नाम जुड़ने के बाद भी उसे कोई फायदा नहीं मिला और ना ही इसे दिवाली का फायदा मिला था. हालांकि, इसकी ओपनिंग तो मजबूत रही लेकिन धीरे-धीरे इसकी कमाई घटती गई और लोगों को इसकी कहानी पसंद नहीं आई. ये बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई.ऐसे में समझा जा सकता है तो जब तक कहानी अच्छी नहीं होगी तो दर्शक उससे नहीं जुड़ता है.
रिलीज कैलेंडर पहले से क्यों तैयार होता है?
मेकर्स कई बार बड़ी फिल्मों की रिलीज डेट महीनों पहले भी तय कर लेते हैं. इसकी वजह यह है कि बड़े स्टार्स की वजह से कमाई की उम्मीद होती है. रिलीज डेट चुनने के बाद प्रोड्यूसर प्रमोशन, पोस्टर, ट्रेलर, गाने और एडवांस बुकिंग की टाइमलाइन तैयार कर सकता है. अगर उसी दौरान दूसरी बड़ी फिल्म की अनाउंसमेंट हो जाए तो दोनों टीमों के बीच क्लैश भी हो जाता है. हालांकि, ऐसे मामलों में कभी-कभी एक फिल्म अपनी डेट आगे या पीछे कर लेती है. तो कभी दोनों फिल्में साथ रिलीज होकर दर्शकों और स्क्रीन के लिए मुकाबला करती नजर आती हैं.
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सीसीटीएनएस प्रगति में उत्तराखंड की राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार, 13वें से 9वें स्थान पर पहुंचा राज्य
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) परियोजना के तहत राज्य शीर्ष समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक में सीसीटीएनएस/आईसीजेएस 2.0 की प्रगति, तकनीकी अवसंरचना, नेटवर्क कनेक्टिविटी, डेटा रिकवरी सेंटर, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता तथा सिस्टम इंटीग्रेटर से संबंधित विभिन्न बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक में गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड में उत्तराखंड ने जुलाई 2026 तक राष्ट्रीय स्तर पर 9वीं रैंक हासिल की है. पूर्व समीक्षा में राज्य 13वें स्थान पर था. इस प्रकार राज्य ने अपनी राष्ट्रीय रैंकिंग में चार स्थान का सुधार किया है. वहीं आईसीजेएस 2.0 डैशबोर्ड में उत्तराखंड देश में तीसरे स्थान पर है.
विभिन्न डिजिटल व्यवस्थाएं शामिल
आईसीजेएस 2.0 के अंतर्गत राज्य में विभिन्न डिजिटल अनुप्रयोगों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है. इनमें ई-साक्ष्य, न्यायश्रुति, ई-समन, ई-साइन तथा मेडलीप्र सहित विभिन्न डिजिटल व्यवस्थाएं शामिल हैं. इनके माध्यम से पुलिस, अभियोजन, कारागार तथा न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कार्यों में डिजिटल समन्वय और दक्षता को बढ़ावा दिया जा रहा है.
बैठक में एनसीएलआई डैशबोर्ड की प्रगति की भी समीक्षा की गई. अधिकारियों ने बताया कि 17 सितंबर 2026 तक उत्तराखंड ने एनसीएलआई डैशबोर्ड में 18वीं रैंक हासिल की है, जबकि पिछली समीक्षा में राज्य 24वें स्थान पर था. इस प्रकार राज्य की रैंकिंग में छह स्थान का सुधार हुआ है. परिचालन दक्षता एवं आईसीटी एप्लीकेशन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है.
166 पुलिस स्टेशनों में से 31 को अपग्रेड किया
बैठक में आईसीजेएस 2.0 के अंतर्गत नेटवर्क कनेक्टिविटी की स्थिति की भी समीक्षा की गई. राज्य योजना के तहत पुलिस, अभियोजन, कारागार और एफएसएल से संबंधित कुल 242 साइटें शामिल हैं. इनमें 166 पुलिस स्टेशन, 64 अभियोजन स्थल, 10 कारागार और 2 एफएसएल साइटें शामिल हैं. कनेक्टिविटी के लिए एसडब्ल्यूएएन, बीएसएनएल और लोकल वीपीएन के माध्यम से व्यवस्थाएं की गई हैं. प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि 166 पुलिस स्टेशनों में से 31 को अपग्रेड किया जा चुका है.
मुख्य सचिव ने कनेक्टिविटी एवं अपग्रेडेशन कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि डिजिटल पुलिसिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए तकनीकी आधारभूत संरचना विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण होना आवश्यक है. सीसीटीएनएस के लिए डेटा रिकवरी इकोसिस्टम तैयार करने के मुख्य सचिव के निर्देश बैठक में सीसीटीएनएस के लिए डेटा रिकवरी सेंटर की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा हुई. मुख्य सचिव ने आईटीडीए को सीसीटीएनएस के लिए अलग डेटा रिकवरी इकोसिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि डेटा रिकवरी सेंटर के माध्यम से महत्वपूर्ण सेवाओं की निरंतरता, डेटा सुरक्षा, डेटा रिकवरी क्षमता तथा भौगोलिक रूप से पृथक सुरक्षित रिकवरी व्यवस्था को मजबूत किया जाए. उन्होंने निर्देश दिए कि सीसीटीएनएस के अंतर्गत सभी संबंधित सॉफ्टवेयर के लिए आईटीडीए तत्काल डेटा रिकवरी सेंटर तैयार करने की कार्यवाही सुनिश्चित करे.
एफआईआर से ही सही एवं पूर्ण विवरण दर्ज करने पर जोर
मुख्य सचिव ने गृह विभाग एवं आईटीडीए को मिलकर ऐसा प्रभावी मैकेनिज्म विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे एफआईआर दर्ज करते समय ही संबंधित व्यक्तियों का नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल सहित अन्य आवश्यक विवरण स्पष्ट एवं सही रूप से दर्ज हो. उन्होंने कहा कि इससे ई-समन तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई संबंधित पक्ष तक सही, स्पष्ट और शीघ्रता से पहुंचाने में मदद मिलेगी तथा डिजिटल सिस्टम की उपयोगिता और परिचालन दक्षता में भी सुधार होगा.
मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले दो माह में विभिन्न निर्धारित पैरामीटर में सुधार किया जाए, लक्ष्यों को बढ़ाया जाए तथा ऑपरेशनल प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जाए. बैठक में आईसीजेएस 2.0 के लिए आवश्यक हार्डवेयर की खरीद एवं बजट की भी समीक्षा की गई. आगामी सीसीटीएनएस 2.0 के तकनीकी सहयोग एवं क्रियान्वयन के लिए नए सिस्टम इंटीग्रेटर के चयन हेतु आरएफपी जारी करने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक में सचिव गृह शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान, एनआईसी से राकेश शर्मा, अपर सचिव नवनीत पांडे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे.
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