रोटी-चावल रखने से लेकर घर सजाने तक, फिर चर्चा में आए 90 के दशक के बर्तन
delhi Expo Sikki Grass Craft: 90 के दशक में घरों में रोटी, चावल और दूसरी खाने की चीजें रखने से लेकर सजावट तक के लिए घास से बने बर्तनों और सामान का खूब इस्तेमाल होता था. समय के साथ शहरों में सिक्की घास से बने ये पारंपरिक बर्तन और शिल्प धीरे-धीरे नजरों से ओझल हो गए, लेकिन बिहार के गांवों में आज भी महिलाएं इस प्राचीन कला को जीवित रखे हुए हैं. सीतामढ़ी की ज्योत्सना इसी कला को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित MSME इंटरनेशनल एक्सपो तक लेकर पहुंचीं, जहां उनके हाथों से बने सिक्की और मूंज घास के बर्तनों, टोकरियों और सजावटी सामान को लोगों ने खूब पसंद किया. खास बात यह है कि इन उत्पादों को बिना केमिकल और कृत्रिम रंगों के हाथ से तैयार किया जाता है, जिससे पारंपरिक शिल्प के साथ महिलाओं के लिए रोजगार का रास्ता भी बन रहा है.
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