पैरामाउंट ने वार्नर ब्रदर्स पर मुकदमा किया:नेटफ्लिक्स के साथ हुई डील की जानकारी मांगी; दोनों कंपनियों में वार्नर ब्रदर्स को खरीदने की लड़ाई
पैरामाउंट स्काईडांस ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी पर मुकदमा दायर किया है। पैरामाउंट वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की नेटफ्लिक्स के साथ हुई 82.7 बिलियन डॉलर (7.46 लाख करोड़ रुपए) की राइवल डील की ज्यादा जानकारी मांग रही है। पैरामाउंट ने वार्नर के बोर्ड में डायरेक्टर्स नामित करने का ऐलान भी किया है। कंपनी का कहना है कि उसकी $30 प्रति शेयर कैश बिड नेटफ्लिक्स की $27.75 प्रति शेयर कैश-एंड-स्टॉक ऑफर से बेहतर है। क्यों हो रहा है विवाद? पैरामाउंट स्काईडांस और नेटफ्लिक्स की यह लड़ाई 'हैरी पॉटर' और 'डीसी कॉमिक्स' जैसे ब्लॉकबस्टर कंटेंट वाले वॉर्नर ब्रदर्स पर कंट्रोल करने की है। पैरामाउंट ने वॉर्नर ब्रदर्स को खरीदने के लिए $108.4 बिलियन का 'होस्टाइल बिड' दिया है। यह पूरा पैसा कैश में देने का वादा है। लेकिन वॉर्नर ब्रदर्स ने इसे ठुकरा दिया। इसके बाद नेटफ्लिक्स ने वॉर्नर ब्रदर्स के स्टूडियो और स्ट्रीमिंग बिजनेस को करीब $82.7 बिलियन में खरीदने का ऐलान किया। पैरामाउंट का कहना है कि उसका कैश ऑफर नेटफ्लिक्स के शेयर वाले ऑफर से ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है। पैरामाउंट ने नेटफ्लिक्स डील की फाइनेंशियल जानकारी मांगी पैरामाउंट स्काईडांस ने सोमवार को वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के खिलाफ मुकदमा किया। कंपनी का कहना है कि वार्नर ने नेटफ्लिक्स डील की पूरी जानकारी नहीं दी। इसमें स्टूडियोज और कंटेंट लाइब्रेरी शामिल है, जैसे हैरी पॉटर और DC कॉमिक्स। पैरामाउंट का तर्क है कि उसकी ऑल-कैश ऑफर ज्यादा सर्टेन है और रेगुलेटरी हर्डल्स आसानी से पार करेगी। कंपनी ने वार्नर के बाइलॉज में बदलाव का प्रपोजल भी दिया है। इसमें केबल टीवी बिजनेस को अलग करने के लिए शेयरधारकों की अप्रूवल जरूरी होगी, जो नेटफ्लिक्स डील का हिस्सा है। पैरामाउंट ने पिछले हफ्ते $108.4 बिलियन की रिवाइज्ड बिड दी थी, लेकिन वार्नर बोर्ड ने रिजेक्ट कर दिया। वार्नर ब्रोस विवाद की टाइमलाइन
भारत में बनेगी रॉल्स-रॉयस! ‘मेक इन इंडिया’ से करोड़ों की कार हो सकती है इतनी सस्ती
ब्रिटिश कंपनी रॉल्स-रॉयस भारत को अपना तीसरा सबसे बड़ा घरेलू बाजार बनाने की योजना पर काम कर रही है. इससे भारत-ब्रिटेन के बीच इंजीनियरिंग और इनोवेशन सहयोग और मजबूत होगा. रॉल्स-रॉयस जेट इंजन, नौसेना प्रोपल्शन सिस्टम और अन्य क्षेत्रों में नए मौके की तलाश रही है. भारत में कंपनी का 90 साल पुराना इतिहास है और यहां पहले से इंजीनियरिंग सेंटर, सप्लाई चेन पार्टनरशिप और एयरोस्पेस-डिफेंस संस्थानों के साथ काम चल रहा है. इससे रॉल्स-रॉयस की करोड़ों की कार का दाम भारत में कम हो सकता है.
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