केन्द्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia की पहल से बदली जर्जर स्कूल की तस्वीर, भ्रमण कर लिया जायजा
गुना। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री एवं गुना सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज अपने गुना प्रवास के दौरान बमोरी विकासखंड के ग्राम सांगई स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय, मारकी महू का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और विद्यार्थियों के साथ आत्मीय संवाद कर उनके साथ समय बिताया। केन्द्रीय मंत्री ने विद्यालय परिसर में उपलब्ध शैक्षणिक एवं मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी पढ़ाई, सुविधाओं तथा विद्यालय के वातावरण के बारे में जानकारी ली।
जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर थे बच्चे
आपको बता दें कि सांगई स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। भवन की छत से प्लास्टर झड़ने और बारिश के दौरान पानी भरने के कारण विद्यार्थियों की कक्षाएं सुरक्षित भवन के बजाय तिरपाल से बने अस्थायी टपरे में संचालित करनी पड़ रही थीं। इससे बच्चों को असुविधाजनक एवं असुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करनी पड़ती थी।
केन्द्रीय मंत्री ने लिया संज्ञान
विद्यालय की इस स्थिति की जानकारी मिलने के बाद पिछले वर्ष जुलाई 2025 को केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और अपने बेंगलुरु प्रवास के दौरान ही उन्होंने गुना कलेक्टर से फोन पर चर्चा कर विद्यालय भवन का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
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प्रयास का मिला परिणाम
केन्द्रीय मंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक कार्रवाई करते हुए विद्यालय भवन के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसका परिणाम यह रहा कि अप्रैल 2026 में नए विद्यालय भवन का निर्माण पूर्ण हो गया। आज विद्यालय में 34 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और उनके अध्यापन के लिए दो शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए दो अध्यापन कक्ष उपलब्ध हैं, जिससे अब बच्चों को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में शिक्षा प्राप्त हो रही है।
बच्चों को मिली बेहतर शैक्षणिक सुविधा
इन सभी सुविधाओं के अलावा विद्यालय परिसर में बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया गया है और सभी विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर उपलब्ध है। विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकों का वितरण भी किया जाता है। गतिविधि-आधारित और आनंददायक शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘जादुई पिटारा’ जैसी शैक्षणिक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। विद्यालय में पर्याप्त एवं सुचारु पेयजल व्यवस्था भी उपलब्ध है। इस प्रकार जहां पहले बच्चों को जर्जर भवन और अस्थायी टपरे में पढ़ाई करनी पड़ती थी, वहीं अब उन्हें स्थायी भवन, अध्यापन कक्ष, शिक्षकीय व्यवस्था, फर्नीचर, बाउंड्रीवॉल, शैक्षणिक संसाधन और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं।
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अपने गुना प्रवास के दौरान केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विद्यालय भ्रमण के दौरान व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही विद्यार्थियों के साथ आत्मीय समय बिताया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
विहिप नेता Surendra Jain बोले, संसद मार्च और जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारी देश के असली Gen-Z नहीं
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने शुक्रवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व वाले छात्र प्रदर्शनकारियों को जेन-जी के प्रतिनिधि के तौर पर पेश किए जाने को खारिज कर दिया। विहिप ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले, सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने वाले और अशोभनीय व्यवहार में शामिल लोग देश की युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाबलों से झड़प हुई थी।
संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस छोड़ी थी। छात्रों के नेतृत्व में हुए ये प्रदर्शन कई शहरों तक फैल गए थे और इनकी मुख्य मांग तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। जंतर-मंतर से 20 जून को शुरू हुआ यह आंदोलन 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा कॉजपा की अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद समाप्त हुआ।
‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में विहिप के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि हालिया प्रदर्शनों के आधार पर भारत के युवाओं को परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश की युवा पीढ़ी अब भी धर्म, देश की सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्र सेवा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘वे असली जेन-जी नहीं हैं।
वे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते।’’ जैन ने कहा, ‘‘ऐसे विकृत मानसिकता वाले कितने लोग हैं, जो सड़क पर भारत माता की तस्वीर के साथ अशोभनीय इशारे करते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां के खिलाफ अपशब्द बोलते हैं या वहां मौजूद जवानों पर हमला करते हैं? हमारा मानना है कि ऐसे लोगों के साथ भी संवाद बनाए रखना चाहिए, लेकिन वे असली जेन-जी नहीं हैं। वे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते।’’ जैन ने कहा कि उन्होंने कॉलेजों में पढ़ाया है और युवाओं के बीच समय बिताया है, लेकिन प्रदर्शनों में दिखे इस तरह के व्यवहार का सामना कभी नहीं किया।
जैन ने कहा, ‘‘जेन-जी एक आयु वर्ग है और यह आयु वर्ग धर्म से जुड़ा हुआ है। यह तब दिखाई देता है जब भारत के युवा नए साल की पूर्व संध्या पर पिकनिक स्थलों पर जाने के बजाय मथुरा, वृंदावन, काशी, अयोध्या और वैष्णो देवी जाते हैं और खुद को धन्य महसूस करते हैं।” उन्होंने कहा कि आम तौर पर जेन-जी के रूप में पहचाना जाने वाला आयु वर्ग उन लोगों से कहीं बड़ा है, जिन्होंने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। उन्होंने सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती को इसका उदाहरण बताया।
जैन ने कहा, ‘‘सेना में शामिल होने वाले लोग भी जेन-जी हैं। सेना में शामिल होने वाला युवा 20 से 25 वर्ष की आयु का होता है। हर साल सशस्त्र बलों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों की संख्या से कहीं अधिक होती है।’’ उन्होंने धार्मिक आयोजनों में युवाओं की भागीदारी का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत के युवा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘25 साल से कम उम्र के 25 करोड़ से अधिक युवा, जिन्हें आप जेन-जी कहते हैं, कुंभ में पहुंचे थे। किसी भी थिएटर में जाकर ‘हनुमान अंश’ फिल्म देखिए, आधे से अधिक दर्शक उसी आयु वर्ग के होंगे, जिसे जेन-जी कहा जाता है।’’ जैन ने कहा कि विहिप अलग विचार रखने वालों के साथ संवाद बनाए रखने में विश्वास रखता है, लेकिन एक छोटे समूह को देश की पूरी युवा आबादी की पहचान तय करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर जैन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्य 2029 से पहले इसे अपने-अपने यहां लागू करेंगे।
जैन ने इसे संवैधानिक आवश्यकता बताया।
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