TMC के चुनाव चिह्न पर रोक में देरी पर Bengal Congress ने Election Commission की नीयत पर उठाए सवाल
कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी गुटों को पार्टी का नाम और उसके ‘पुष्प एवं तृण’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोकने के फैसले की शुक्रवार को आलोचना की और आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने आगामी उपचुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तक इस मामले में जानबूझकर फैसला टाला है। सरकार ने एक बयान में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न को लेकर विवाद नया नहीं है और निर्वाचन आयोग को इस मामले का जल्द समाधान करना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमें यह देखकर हैरानी हुई कि निर्वाचन आयोग ने इस मामले में जानबूझकर देरी की और रेजीनगर एवं नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया समाप्त होने के दिन ही अपना फैसला सुनाते हुए चुनाव चिह्न पर रोक लगा दी।
इससे फैसले के पीछे के उद्देश्य को लेकर गंभीर संदेह पैदा होता है।’’ सरकार ने कहा कि संविधान में बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र की परिकल्पना की गई है जो ‘‘लोकतंत्र की खूबसूरती’’ है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था देश में बहुलतावाद की मूल भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने हमेशा इस बहुलवाद में विश्वास किया है।’’ सरकार ने महाराष्ट्र में शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न संबंधी विवाद में भी इसी तरह की भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक प्रतिस्पर्धा एवं वैचारिक लड़ाई होती रहेगी और संसदीय लोकतंत्र में यही वांछनीय है। अगर किसी को हराना है तो हम संसदीय लोकतंत्र के जरिये हराएंगे। अगर किसी को राजनीतिक रूप से खत्म करना है तो पश्चिम बंगाल की जनता अपने जनादेश के जरिये ऐसा करेगी।’’ सरकार ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘‘भाजपा के अग्रिम संगठन की तरह काम कर रहा है’’ और उसने ‘‘एक राजनीतिक दल को खत्म करने’’ की कोशिश शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह संसदीय लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।’’ सरकार ने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं की हत्या, पार्टी कार्यालयों पर कब्जे और ‘‘घोर कुशासन’’ के लिए तृणमूल कांग्रेस जिम्मेदार रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि निर्वाचन आयोग भाजपा के इशारे पर किसी राजनीतिक दल को खत्म करने की इस प्रकार की कवायद शुरू कर दे। आयोग का इस तरह का पक्षपातपूर्ण रवैया लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर कर रहा है।’’ सरकार ने कहा, ‘‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस फैसले का कड़ा विरोध करती है।’’ इस बीच, निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट को उपचुनाव के लिए ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया। आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया।
निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के दौरान पार्टी के नाम और ‘पुष्प एवं तृण’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया था।
TMC विवाद पर Election Commission का फैसला, दोनों गुटों को मिले नए नाम और चुनाव चिह्न
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिह्न दिया गया है, ताकि उसे पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा राज्यों में एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का दर्जा मिल सके। अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफ़ाफ़ा' का चुनाव चिह्न दिया गया है। TMC पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग के फ़ैसले पर पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता (LoP) रिताब्रता बनर्जी ने कहा कि हम मिलकर फ़ैसले लेते हैं... हमने कल रात ही लोगों से संपर्क करना शुरू किया और आज सुबह एक वर्चुअल मीटिंग हुई।
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उन्होंने कहा कि हमने तीन नाम सुझाए थे: पहला, 'नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस'; दूसरा, 'वेस्ट बंगाल तृणमूल कांग्रेस'; और तीसरा, 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस'। चुनाव आयोग ने बताया कि पहले दो नाम क्यों नहीं दिए जा सकते और इसके बजाय तीसरा नाम दिया; हालाँकि, चुनाव चिह्न के मामले में हमें अपनी पहली पसंद मिल गई। चुनाव आयोग के फ़ैसले की समझदारी पर टिप्पणी करना मेरा काम नहीं है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को मिले नाम पर उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी पार्टी की प्रकृति को दिखाता है जो किसी एक व्यक्ति के प्रभाव (कल्ट) से चलती है। राजनीति में 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों' या 'वंशवादी उत्तराधिकारियों' जैसी बातों का कोई मतलब नहीं होता; राजनीतिक व्यवस्था में मालिकाना हक़ जैसी कोई चीज़ नहीं होती।
यह फ़ैसला चुनाव आयोग (EC) ने तब लिया जब गुरुवार को इस विवाद के सिलसिले में पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी की अगुवाई वाले पांच सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाक़ात की। चुनाव आयोग ने रिताब्रता को एक पत्र लिखकर बताया कि बैठक नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में होगी। ECI ने कहा, "आयोग ने आपके पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ 17.09.2026 (गुरुवार) को निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली-110001 में सुनवाई करने का फ़ैसला किया है।"
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इससे पहले दिन में, ECI ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर दावे से जुड़ी कार्यवाही के तहत रिताब्रता बनर्जी की अगुवाई वाले पांच सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में रिताब्रता बनर्जी, अखरुज़्ज़मान, अरूप रॉय, चंद्रिमा भट्टाचार्य और रिजु दत्ता शामिल हैं। रिताब्रता उन लगभग 60 नवनिर्वाचित TMC विधायकों के समूह का नेतृत्व करते हैं, जिन्होंने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में BJP से पार्टी की हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से दूरी बना ली थी। दोनों गुटों ने "असली" तृणमूल कांग्रेस होने का दावा किया है और पार्टी के वैध नेतृत्व के तौर पर मान्यता पाने के लिए चुनाव आयोग से संपर्क किया है।
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