जियांगमी टियाओ से अंडे-टमाटर तक, खाने में क्या पसंद करते हैं शी जिनपिंग? जानें कैसी है उनकी फूड हैबिट?
Xi Jinping Food Habits: शी जिनपिंग के खाने से जुड़े सार्वजनिक किस्सों में स्टीम्ड बन, नूडल्स, चिकन, मटन, सब्जियां और पारंपरिक चीनी स्नैक्स दिखाई देते हैं. बीजिंग के आम रेस्टोरेंट से लेकर शान्शी के घरेलू भोजन तक उनकी कई चर्चित फूड चॉइस साधारण स्थानीय स्वादों से जुड़ी रही हैं.
बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री पहुंचे चुरारन धाम, प्राचीन हनुमान मंदिर में नंगे पैर किए दर्शन, यहीं से शुरू हुई थी आध्यात्मिक यात्रा
छतरपुर जिले के छोटे से गांव चुरारन में उस समय भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला, जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अचानक वहां स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर पहुंचे।
हमेशा की तरह इस बार भी वे पूरी सादगी के साथ नंगे पैर मंदिर की दहलीज पर आए। उन्होंने संकटमोचन बजरंगबली के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और महाआरती में शामिल होकर देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
इसी मंदिर से शुरू हुआ था भागवत कथा का सफर
चुरारन का यह प्राचीन हनुमान मंदिर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के जीवन में बेहद खास मायने रखता है। स्थानीय मान्यताओं और जानकारियों के मुताबिक, करीब डेढ़ दशक पहले महाराज जी ने अपने जीवन की पहली श्रीमद्भागवत कथा का वाचन इसी मंदिर से शुरू किया था। यही वजह है कि उनकी साधना और आध्यात्मिक यात्रा में इस पवित्र स्थान का एक अनूठा और गहरा जुड़ाव है।
हर साल नंगे पैर दर्शन करने पहुंचते हैं महाराज
पहली कथा का साक्षी होने के कारण पंडित धीरेंद्र शास्त्री इस मंदिर को अपने दिल के बेहद करीब मानते हैं। अपनी इसी आस्था और परंपरा को निभाते हुए वे हर साल चुरारन धाम पहुंचते हैं। यहां आकर वे न केवल बजरंगबली के दरबार में शीश नवाते हैं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के साथ समय बिताकर पूजन व सत्संग में भी हिस्सा लेते हैं।
महाराज की एक झलक पाने उमड़ी भक्तों की भीड़
जैसे ही ग्रामीणों को बागेश्वर महाराज के चुरारन आने की भनक लगी, मंदिर परिसर में देखते ही देखते श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा लग गया। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। पूजा और आरती के दौरान पूरा वातावरण ‘जय श्री राम’, ‘जय हनुमान’ और बागेश्वर धाम के नारों से गुंजायमान हो उठा।
गांव में रहा दीवाली जैसा माहौल
पंडित धीरेंद्र शास्त्री के इस तरह सादगी से अपने पुराने दिनों से जुड़े मंदिर में पहुंचने से ग्रामीणों में भारी उत्साह देखने को मिला। आस्था, श्रद्धा और गुरु-भक्ति का यह अनूठा दृश्य पूरे गांव के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं था। दर्शन-पूजन के बाद महाराज जी ने सभी को अपना आशीर्वाद दिया और फिर वहां से रवाना हो गए।
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