Bose Open-Ear लाइनअप लॉन्च: मिलेगा शानदार डिजाइन, 9 घंटे की बैटरी और Cinema Mode; कीमत ₹19 हजार से शुरू
Bose Open Earbuds Launch: ऑडियो ब्रांड Bose ने अपने ओपन-ईयर ईयरबड्स लाइनअप को अपडेट करते हुए Bose Sport Open Earbuds और Bose Ultra Open Earbuds (2nd Gen) लॉन्च किए हैं। कंपनी के मुताबिक, नए Sport Open Earbuds को खास तौर पर रनिंग, वर्कआउट और आउटडोर एक्टिविटीज को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
वहीं, दूसरी पीढ़ी के Ultra Open Earbuds में पिछले मॉडल के खास कफ-शेप डिजाइन को बरकरार रखते हुए बेहतर ऑडियो, क्लियर कॉलिंग, लंबी बैटरी लाइफ और नया Cinema Mode दिया गया है।
Bose Sport Open Earbuds और Ultra Open Earbuds की कीमत
Bose Sport Open Earbuds की कीमत $199 (करीब ₹19,000) रखी गई है। वहीं, Bose Ultra Open Earbuds (2nd Gen) की कीमत $299 (करीब ₹28,600) है। दोनों ईयरबड्स की अमेरिका में बिक्री 1 अक्टूबर से शुरू होगी। इनकी प्री-ऑर्डर बुकिंग 19 सितंबर से Bose की वेबसाइट और चुनिंदा रिटेलर्स के जरिए शुरू होगी। फिलहाल कंपनी ने भारत में दोनों मॉडल की कीमत और उपलब्धता को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
अलग-अलग कलर ऑप्शन में आए ईयरबड्स
Bose Sport Open Earbuds को Black, White Smoke और लिमिटेड एडिशन Eucalyptus Green कलर में पेश किया गया है। वहीं, Bose Ultra Open Earbuds (2nd Gen) Black, White Smoke, Cherry Chocolate, Olive Green और Sky Pink कलर ऑप्शन में उपलब्ध होंगे।
Open-Ear डिजाइन से क्या है खास?
दोनों मॉडल Bose के OpenAudio डिजाइन पर आधारित हैं। इनमें ईयरबड्स कान के अंदर जाने के बजाय कान के बाहरी हिस्से के आसपास फिट होते हैं। इससे ईयर कैनाल खुला रहता है और यूजर आसपास की आवाजें भी सुन सकता है। Sport Open Earbuds में सॉफ्ट सिलिकॉन C-arm cuff दिया गया है, जिसे रनिंग, वर्कआउट और आउटडोर एक्टिविटीज के दौरान ईयरबड्स को अपनी जगह पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है।
Ultra Open Earbuds (2nd Gen) में भी पिछले मॉडल जैसा कफ-शेप डिजाइन मिलता है।
Bluetooth 5.4 और Multipoint कनेक्टिविटी
दोनों नए मॉडल में Bluetooth 5.4 सपोर्ट दिया गया है। इनमें एक साथ दो डिवाइस से कनेक्ट होने के लिए Multipoint Connectivity भी मिलती है। इसके अलावा दोनों ईयरबड्स SBC और AAC codecs को सपोर्ट करते हैं और इनमें Google Fast Pair की सुविधा भी दी गई है।
Sport Open Earbuds के फीचर्स
Sport Open Earbuds में कंपनी ने कस्टम-डिजाइन किए गए डायनेमिक ड्राइवर्स के साथ Bose OpenAudio तकनीक का इस्तेमाल किया है। इनमें Auto Volume फीचर दिया गया है, जो आसपास के शोर के स्तर के अनुसार प्लेबैक वॉल्यूम को एडजस्ट करता है। ईयरबड्स पर टेक्सचर्ड फिजिकल बटन दिए गए हैं, जिनकी मदद से म्यूजिक, कॉल और वॉल्यूम को कंट्रोल किया जा सकता है।
ये भी पढ़े-ः Apple Store की लाइन छोड़ो! सिर्फ 10 मिनट में घर पहुंचेगा iPhone 18 Pro, ₹7,000 तक की छूट; जानें कैसे
कॉलिंग के लिए SpeechClarity फीचर भी मिलता है। कंपनी के अनुसार, दोनों ईयरबड्स में अलग माइक्रोफोन और वॉयस पिकअप यूनिट दी गई है, जो बैकग्राउंड नॉइस के बीच यूजर की आवाज को अलग करने में मदद करती है। Sport Open Earbuds को IP54 रेटिंग मिली है, जिससे ये पसीने, पानी के छींटों और धूल से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
7 घंटे तक की बैटरी लाइफ
Bose के मुताबिक, Sport Open Earbuds एक बार चार्ज करने पर 7 घंटे तक का प्लेबैक दे सकते हैं। वहीं, इसका वायरलेस चार्जिंग केस अतिरिक्त 22 घंटे तक की बैटरी उपलब्ध कराता है।
Ultra Open Earbuds (2nd Gen) में Cinema Mode
Ultra Open Earbuds (2nd Gen) में अपडेटेड ड्राइवर दिया गया है। Bose का दावा है कि इससे ज्यादा डीप बास औरबेहतर वॉल्यूम मिलता है। मॉडल में SpeechClarity और Auto Volume के साथ नया Cinema Mode भी दिया गया है। यह फीचर Bose की TrueSpatial Technology पर काम करता है और वीडियो व पॉडकास्ट के दौरान ज्यादा वाइड साउंडस्टेज देने के लिए डिजाइन किया गया है। साथ ही, डायलॉग को स्पष्ट और सेंटर में रखने की कोशिश करता है।ईयरबड्स में पहले के मुकाबले रिफाइंड मेटलिक कैप और बिवेल्ड फिनिश भी दी गई है।
Ultra Open Earbuds 2nd Gen की 9 घंटे तक बैटरी
Ultra Open Earbuds (2nd Gen) में 9 घंटे तक का प्लेबैक मिलने का दावा किया गया है। वहीं, वायरलेस चार्जिंग केस अतिरिक्त 19.5 घंटे की बैटरी देता है। यह मॉडल कम्पैटिबल Android डिवाइसेज पर Snapdragon Sound और aptX Adaptive को भी सपोर्ट करता है।
फिलहाल Bose ने भारत में इन दोनों नए ओपन-ईयर ईयरबड्स की लॉन्च डेट, कीमत और उपलब्धता की जानकारी साझा नहीं की है। कंपनी की ओर से भारत से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद इसकी कीमत और बिक्री की स्थिति स्पष्ट होगी।
मूवी रिव्यू-'वाइब':कुणाल खेमू की फिल्म पहले हंसाती है, लेकिन इंटरवल के बाद समझना मुश्किल हो जाता है- क्या हो रहा है?
रेटिंग: 2/5 अवधि: 2 घंटे 25 मिनट शैली: कॉमेडी निर्देशक: कुणाल खेमू मुख्य कलाकार: कुणाल खेमू, स्पर्श श्रीवास्तव, प्रीति जिंटा, वंशिका धीर, यशपाल शर्मा, दिनेश लाल यादव रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026 कुणाल खेमू की फिल्म ‘वाइब’ शुरू होते ही पुरानी याद ताजा करती है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’ में तीन दोस्तों की जिंदगी में बवाल था, यहां दो दोस्त हैं और बवाल सीधा देश की सुरक्षा तक पहुंच गया है। हार्दिक और बग्स की जोड़ी शुरू में कमाल लगती है। दोनों की केमिस्ट्री, कुणाल का टाइमिंग वाला ह्यूमर और कुछ मजेदार संवाद फिल्म को अच्छी रफ्तार देते हैं। पहला हाफ देखकर लगता हैचलो भाई, कुणाल फिर फॉर्म में हैं। फिर इंटरवल होता है और फिल्म अपना ट्रैक बदल देती है। फिल्म की कहानी कैसी है हार्दिक यानी कुणाल खेमू नशे की लत से बाहर निकलकर जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। उसका दोस्त बग्स यानी स्पर्श श्रीवास्तव उसे अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी दिला देता है। लेकिन हार्दिक का ध्यान नौकरी से ज्यादा नई इंटर्न करीना यानी वंशिका धीर पर है। दोनों के बीच बात आगे बढ़ती है और फिर एक ऐसा मामला सामने आता है, जिसकी वजह से हार्दिक और बग्स की एंट्री हो जाती है मैडम एच यानी प्रीति जिंटा की दुनिया में। अब ये दोनों पहुंच जाते हैं एक ऐसे मिशन में, जिसके लिए शायद इनसे ज्यादा गलत लोगों को चुनना मुश्किल था। यहीं तक फिल्म काफी मजेदार है। इसके बाद कहानी में गैंगस्टर, आतंकवाद, एआई, सॉफ्टवेयर अटैक, बड़ी साजिश और सुपर-स्ट्रेंथ वाला सीरम तक आ जाता है। मतलब दो दोस्तों की कॉमेडी से शुरू हुई फिल्म अचानक बोलती है,भाई, अब देश बचाना है। फिल्म में एक्टिंग कैसी है कुणाल खेमू हार्दिक के रोल में शानदार काम किया है। वह बेवकूफ दिखते हुए भी प्यारे लगते हैं और उनकी बॉडी लैंग्वेज कई बार खुद ही हंसा देती है। हालांकि परेशानी यह है कि उनका यह अंदाज अब थोड़ा जाना-पहचाना लगता है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’, ‘लूटकेस’ और ‘गो गोवा गॉन’ के बाद इस बार वही मजाकिया कुणाल कुछ नया कम देते हैं। स्पर्श श्रीवास्तव सबसे बड़ा सरप्राइज हैं। बग्स के रोल में उनकी घबराहट और चेहरे के एक्सप्रेशन कई बार कुणाल से भी ज्यादा हंसा देते हैं। प्रीति जिंटा की मैडम एच स्टाइलिश है और उनका एक्शन सीन फिल्म के मजेदार हिस्सों में आता है। वंशिका धीर खूबसूरत दिखती हैं, लेकिन उनके रोल में करने को ज्यादा कुछ नहीं है। यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव ठीक हैं, जबकि शर्मिला टैगोर का छोटा-सा कैमियो अच्छा लगता है। फिल्म का निर्देशन कैसा है कुणाल खेमू को कॉमेडी की समझ है। दिक्कत यह है कि उन्हें अपनी फिल्म पर थोड़ा और भरोसा करना चाहिए था। पहले हाफ में हार्दिक और बग्स ही काफी हैं। उनकी छोटी-छोटी बेवकूफियां ही फिल्म चला रही हैं। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म परत-दर-परत चीजें जोड़ती जाती है। एक गैंगस्टर चाहिए। डाल दो। एआई चाहिए। डाल दो। सॉफ्टवेयर अटैक चाहिए। डाल दो। सीरम चाहिए। वो भी डाल दो। नतीजा कहानी आगे कम बढ़ती है, सामान ज्यादा बढ़ता जाता है। फिल्म का सबसे बड़ा मजा वहीं था जहां वह खुद को ज्यादा गंभीर नहीं ले रही थी। काश, कुणाल ने उसी रास्ते पर फिल्म को आखिर तक चलाया होता। फिल्म का तकनीकी पक्ष कैसा है फिल्म दिखने में अच्छी है। लोकेशन अच्छी हैं, कैमरा वर्क बढ़िया है और एक्शन सीक्वेंस में पैसा साफ दिखाई देता है। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म की रफ्तार गिर जाती है। कुछ सीन्स जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और कहानी कई जगह खिंचती हुई महसूस होती है। फिल्म में कमियां क्या हैं सबसे बड़ी कमी है ओवरडोज। फिल्म में कॉमेडी चाहिए थी, लेकिन बाद में एक्शन भी चाहिए, थ्रिल भी चाहिए, बड़ा विलेन भी चाहिए और देश बचाने वाला ड्रामा भी चाहिए। सब कुछ चाहिए और जब फिल्म सब कुछ देने लगती है, तो जो सबसे अच्छा था हार्दिक और बग्स की कॉमेडी वही पीछे छूट जाती है। रोमांस भी थोड़ा लंबा है और क्लाइमेक्स तक आते-आते फिल्म जरूरत से ज्यादा ओवर-द-टॉप हो जाती है और कुणाल का शर्ट उतारकर मसल्स दिखाने वाला सीन। भाई, ये कॉमेडी फिल्म है या अचानक फिटनेस विज्ञापन? फिल्म का म्यूजिक कैसा है म्यूजिक ठीक है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं जो फिल्म खत्म होने के बाद साथ बाहर आए। कुछ गाने अच्छे लगते हैं, लेकिन कुछ जगह ये कहानी की रफ्तार को और धीमा करते हैं। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘वाइब’ का पहला हाफ बताता है कि कुणाल खेमू एक और शानदार कॉमेडी दे सकते थे। दूसरा हाफ बताता है कि उन्होंने खुद ही फिल्म को ज्यादा बड़ा बनाने के चक्कर में मामला बिगाड़ दिया। कुणाल और स्पर्श की जोड़ी फिल्म की जान है। कुछ संवाद और सीन्स सच में मजेदार हैं। बस दिक्कत यही है कि फिल्म को जितना कम दिखाना चाहिए था, उससे ज्यादा दिखा दिया गया। शुरुआत में वाइब सेट होती है, इंटरवल के बाद फिल्म खुद ही उसे बिगाड़ देती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi











