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मासूम बच्चे की क्या हालत कर दी! गंभीर की एक जिद की वजह से बैंच पर बैठे रहे वैभव सूर्यवंशी, वायरल वीडियो में नहीं छिपा पाए मायूसी

Vaibhav Sooryavanshi : वैभव सूर्यवंशी की मायूसी और उदासी छिप नहीं पाई, भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली गई तीन मैचों की टी20 सीरीज के अंतिम यानी तीसरे मुकाबले में कैमरों ने 15 साल के मासूम बच्चे की उस हालत को कैप्चर किया, जिसे वैभव सूर्यवंशी का कोई भी फैन देखना नहीं चाहेगा. क्रिकेट की पिच पर छक्के-चौकों के जरिए हवाओं से बात करने वाले मासूम बच्चे की इस हालत के कई सारे वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. इन सभी वीडियो में वो हंसता हुआ और प्यारा सा चेहरा गायब है, जो इस छोटे इंडियन क्रिकेटर का अक्सर रहता है. 

भारत ने अफगानिस्तान से 3 टी20 मैच दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेले. वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ अपनी पिछली सीरीज में प्लेयर ऑफ द सीरीज का अवार्ड अपने नाम किया. इसके बाद अफगानिस्तान के खिलाफ उन्हें पहले और दूसरे टी20 मैच की प्लेइंग-11 से बाहर रखा, जो इंडियन क्रिकेट फैंस के साथ-साथ वैभव के चाहने वालों के भी निराशाजनक था. 

तीनों मैचों में बैंच पर बैठे रहे वैभव सूर्यवंशी

हालांकि वैभव सूर्यवंशी की तीसरे टी20 मैच में खेलने की उम्मीद तब जग गई , जब भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने तीसरे टी20 मैच में जीत के बाद सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बनाने के बाद कहा था कि, वो तीसरे टी20 में उन खिलाड़ियों को मौका दे सकते हैं जो अब तक दो मैचों में नहीं खेले और बैंच पर बैठे रहे. लेकिन ऐसा हुआ जरूर पर वैभव सूर्यवंशी के साथ नहीं हुआ. 

वैभव को तीसरे टी20 मैच से भी बाहर रखा गया. वो अंतिम मुकाबले में भी बैंच पर बैठे रहे और अपने साथी खिलाड़ियों को पानी पिलाते रहे. वहीं यश ठाकुर को हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर ने मौका दिया.  इसके बाद से वैभव सूर्यवंशी के कई वीडियो सामने आए, जिनमें वो काफी ज्यादा उदास और मायूस दिखाई दिए.  

वैभव सूर्यवंशी का ये वीडियो देख फैंस का टूटा दिल

भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए तीसरे टी20 मैच के बाद जब चैपियन की ट्रॉफी के साथ टीम इंडिया के खिलाड़ी खड़े होने वाले थे. उससे पहले का वैभव सूर्यवंशी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से देखते ही देखते वायरल हो रहा है. इस में वैभव सूर्यवंशी जमीन पर बैठकर चैपियन होर्डिंग के पास है, वो हाथ से बोर्ड को पिट रहे हैं, उनके चेहरे पर और आंखों में साफ तौप पर मायूसी देखी जा सकती है. उनके इस वीडियो से उनके फैंस भी निराश और मायूस नजर आ रहे हैं.

क्या गौतम गंभीर की इस जिद से नहीं मिला वैभव को खेलने का मौका

भारत ने अफगानिस्तान को तीसरे टी20 मैच में 127 रनों से हराया. इसके बाद हेड कोच गौतम गंभीर प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए आए. उनसे पोस्ट मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैभव को नहीं खिलाने के बारे में सवाल पूछा गया. तो गौतम गंभीर ने जवाब में कहा कि, 'उन्हें अपने मौके का इंतजार करना होगा. हम जानते हैं कि उनमें कितना टैलेंट है और वो क्या कर सकते हैं, लेकिन जो खिलाड़ी पिछले दो-तीन साल से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, वो हमेशा उस खिलाड़ी से आगे रहेगा जो अभी-अभी टीम में आया है. जब भी उन्हें मौका मिलेगा, तो उन्हें लंबे समय तक खेलने का मौका भी मिलेगा. इंडियन क्रिकेट का यही तो तरीका है, हम ड्रेसिंग रूम में कॉम्पिटिशन और टैलेंट चाहते हैं, लेकिन क्रिकेट ऐसे ही चलता है. चाहे आप 15 साल के हों या 30 साल के आपको अपने मौके का इंतजार करना ही पड़ता है'.

गौतम गंभीर के इस बयान से साफ है कि, पहले टीम में जो आएगा वहीं खेलगा फिर चाहें उनकी उम्र कुछ ही हो. ऐसे में उन्होंने वैभव और उनके फैंस को साफ संकेत दे दिया है कि, वैभव को अब खेलने के लंबा इंतजार करना होगा. क्योंकि अब तक संजू सैमसन ने भी 2 अर्धशतक लगाकर अच्छा प्रदर्शन कर दिया है. वैभव ने भारत के लिए अब तक 6 टी20 मैचों में 2 अर्धशतकों के साथ 193 रन बनाए हैं.

ये भी पढ़ें : 'क्रिकेट ऐसे ही चलता है...', वैभव सूर्यवंशी को मौका न देने पर ये क्या बोल गए गौतम गंभीर, कहा- 'हमें पता है उनमें कितना टैलेंट'

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गैर-संचारी रोगों से निपटने के लिए मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरीः एनएचएम

नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि मरीजों की सुरक्षा सिर्फ किसी एक प्रोग्राम या विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती बल्कि इसे पूरे हेल्थ सिस्टम में शामिल किया जाना चाहिए। गैर-संचारी रोगों (एनडीसी) की रोकथाम, पहचान, इलाज और लंबे समय तक देखभाल के मामले में मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करना बहुत जरूरी है।

मंत्रालय ने गैर-संचारी रोगों (एनसीडीएस) के लिए सुरक्षित देखभाल थीम के साथ ‘विश्व मरीज सुरक्षा दिवस 2026’ मनाया।

सभा को संबोधित करते हुए पटनायक ने कहा कि भारत में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 63 प्रतिशत मौतें एनसीडीएस के कारण होती हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और मिशन डायरेक्टर (एनएचएम) आराधना पटनायक ने देशभर में मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने, देखभाल की गुणवत्ता बेहतर बनाने और सुरक्षित स्वास्थ्य प्रणालियां बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

पब्लिक हेल्थकेयर में हाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एनएफएचएस-6 के अनुसार, 96 प्रतिशत टीकाकरण और 90.6 प्रतिशत संस्थागत प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए किए जा रहे हैं।

आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में क्वालिटी और सुरक्षा के तरीकों को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। खासकर मरीजों को रेफर करने और इलाज की निरंतरता के मामले में, ताकि सही सेवाओं तक समय पर पहुंच और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

पटनायक ने मार्च 2027 तक आयुष्मान आरोग्य मंदिर–सब हेल्थ सेंटर्स (एएएम-एसएचसीएस) के लिए 100 प्रतिशत एनक्यूएस सर्टिफिकेशन हासिल करने और उसके बाद आयुष्मान आरोग्य मंदिर–प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स के सर्टिफिकेशन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और एक्शन प्लान की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देखभाल के सभी स्तरों पर मरीजों की सुरक्षा की संस्कृति को संस्थागत बनाने के लिए क्वालिटी एश्योरेंस (गुणवत्ता आश्वासन) के प्रति एक व्यवस्थित और समय-सीमा वाली अप्रोच बहुत जरूरी होगी।

भारत, नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (एनक्यूएएस) और नेशनल पेशेंट सेफ्टी इम्प्लीमेंटेशन फ्रेमवर्क जैसी पहलों के जरिए क्वालिटी और मरीज़ों की सुरक्षा के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत कर रहा है।

वर्ल्ड पेशेंट सेफ्टी डे 2026 मनाने से सभी संबंधित लोगों को एक साथ लाने, अनुभव और बेहतरीन तौर-तरीके साझा करने और हेल्थकेयर सर्विस देने के सभी स्तरों पर मरीजों की सुरक्षा के कल्चर को मजबूत करने के लिए एक अहम मंच मिला।

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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