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UP में 2027 का महासंग्राम शुरू! अखिलेश का हाईटेक रथ तो जयंत ने भी खेला बड़ा दांव
उत्तर प्रदेश का 2027 विधानसभा चुनाव अभी डेढ़ साल दूर है, लेकिन राज्य की सभी बड़ी पार्टियों ने अभी से मैदान संभालना शुरू कर दिया है. बीते कुछ दिनों से प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज है. यहां समाजवादी पार्टी से लेकर भाजपा, बसपा और रालोद तक हर दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ जमीन पर उतर चुका है.
अखिलेश यादव का 'पीडीए रथ' क्या है?
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अगले महीने के आखिरी हफ्ते से राज्यव्यापी 'पीडीए रथ यात्रा' शुरू करने वाले हैं. इसके लिए लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर एक खास तौर पर तैयार की गई कैंपेन बस पहुंच चुकी है. यह यात्रा पार्टी के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए वोटों को एकजुट करने के फॉर्मूले पर आधारित है.
लखनऊ की सड़कों से लेकर प्रदेश के हर गांव-गली तक, परिवर्तन की लहर दौड़ चुकी है।
— Adv. Shivakant Yadav ( #PDA_परिवार) (@IShivakantYadav) September 16, 2026
PDA रथ केवल प्रचार की गाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों शोषितों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संघर्ष का प्रतीक है। 2027 में जनता अपना हक छीन कर रहेगी! #PDA_सामाजिक_न्याय #UP2027 #जय_समाजवाद pic.twitter.com/bgyhXdaHOB
सपा की इस बस में ऐसा क्या खास है जो चर्चा में है?
15 मीटर लंबी इस मल्टी-एक्सल बस में बुलेटप्रूफ शीशे और छत पर भीड़ को संबोधित करने के लिए हाइड्रोलिक लिफ्ट लगाई गई है. इसमें 6 लोगों के बैठने की व्यवस्था, सोफा-कम-बेड वाला लिविंग एरिया, किचन, पेंट्री, वॉशरूम, सीसीटीवी, बाहरी एलईडी स्क्रीन, वाई-फाई और एसी जैसी सुविधाएं दी गई हैं. इस वाहन को अपग्रेड करने में करीब 2 से 5 करोड़ रुपये की लागत आई है. दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश इसी बस का इस्तेमाल 2016-17 और 2021 में भी कर चुके हैं.
2024 में पीडीए फॉर्मूले का कितना असर दिखा था?
इसी फॉर्मूले की बदौलत सपा ने 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 में से 37 सीटें जीतकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा 62 से घटकर 33 सीटों पर सिमट गई थी और केंद्र में बहुमत से नीचे खिसक गई. सपा की सहयोगी कांग्रेस भी 1 से बढ़कर 6 सीटों तक पहुंच गई थी.
भाजपा की डबल इंजन सरकार में गांवों से शहरों तक सुगम होती राहें, विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत तस्वीर पेश कर रही हैं। #BJP4UP #BJP4ViksitBharat #नवनिर्माण_के_नौ_वर्ष pic.twitter.com/qhxoAdVyyZ
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) September 18, 2026
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में भाजपा इस बार क्या रणनीति अपना रही है?
भाजपा भी चुप नहीं बैठी है. पार्टी हर विधानसभा सीट पर विपक्षी दलों की मजबूती और कमजोरी का बारीकी से आकलन कर रही है ताकि चुनाव से पहले हर मोर्चे पर सटीक जवाब दिया जा सके. इसके साथ ही राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में बूथ स्तरीय सम्मेलन आयोजित कर संगठन को मजबूत किया जा रहा है. भाजपा का दावा है कि सपा की पीडीए परिभाषा हर बार बदल जाती है.
— BSP (@Bsp4u) September 17, 2026
बसपा ने मिशन 2027 के लिए क्या कदम उठाया है?
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती अब सोशल मीडिया पर पहले से ज्यादा एक्टिव हो गईं हैं. पार्टी के कार्यकर्ता नेशनल और स्थानीय स्तर पर लगातार बैठकें कर रहे हैं. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि 2007 के बाद से लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही बसपा को संगठन में नई ऊर्जा भरने की जरूरत है, जिसके लिए उसकी कोर टीम पूरी तरह चुनावी मैदान में उतर चुकी है.
यूपी में रालोद और भाजपा के गठबंधन का क्या असर?
सूत्रों के अनुसार एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल ने 2027 के चुनाव के लिए भाजपा के सामने 33 से अधिक सीटों की दावेदारी पेश की है. पार्टी का तर्क है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसका जनाधार और संगठन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है, इसलिए उसे सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए. हालांकि सीट बंटवारे पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और भाजपा नेतृत्व सभी सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाकर चलने की कोशिश में जुटा है.
जयंत चौधरी की रणनीति क्या है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रालोद प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी पश्चिमी यूपी में अपने पारंपरिक जाट-किसान वोट बैंक के साथ-साथ अब ब्राह्मण समुदाय और पूर्वांचल में भी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हाल ही में सहारनपुर में हुई 'स्वाभिमान रैली' में जयंत ने सपा की पीडीए राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि 2027 का चुनावी विमर्श जातिगत राजनीति के बजाय युवाओं, किसानों, व्यापारियों और शिक्षकों के मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए.
तो क्या 2027 का मुकाबला सीधा होगा?
अखिलेश यादव पहले ही 2027 के चुनाव को सीधे तौर पर भाजपा बनाम पीडीए की लड़ाई बता चुके हैं। वहीं भाजपा, बसपा और रालोद अपने-अपने तरीकों से मैदान में उतर चुके हैं। ऐसे में यह तय है कि आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की सियासत और गरमाने वाली है और बीजेपी, कांग्रेस, सपा, बसपा या रालोद समेत किसी पार्टी के लिए ये चुनाव आसान नहीं होने वाले हैं.
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