झारखंड के FJCCI ने UPI लेनदेन पर MDR शुल्क वापस लेने की वित्त मंत्री से की मांग
झारखंड के एक व्यापार संगठन ने केंद्र सरकार से ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) के जरिये 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) शुल्क लगाए जाने का फैसला वापस लेने का आग्रह किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि ‘फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज’ (एफजेसीसीआई) के अध्यक्ष तुलसी पटेल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा और इस व्यवस्था के लागू होने से व्यापार एवं उद्योग जगत को होने वाली परेशानियों से उन्हें अवगत कराया।
एफजेसीसीआई की ओर से बृहस्पतिवार रात जारी एक बयान के अनुसार, पटेल ने पत्र में कहा, ‘‘यूपीआई के जरिये 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाए जाने से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की परिचालन लागत बढ़ सकती है।’’ एमडीआर वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी द्वारा यूपीआई भुगतान प्रणाली में शामिल भागीदारों को दिया जाता है। एनपीसीआई ने इस नयी व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत ेएमडीआर लगाने का फैसला किया है। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये होगा।
हालांकि, 2,000 रुपये तक के व्यापारी लेनदेन और दो व्यक्तियों के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पर शुल्क नहीं लगेगा। पटेल ने कहा कि व्यापारियों के लिए एमडीआर शून्य रखने की व्यवस्था ने देशभर में यूपीआई को व्यापक रूप से अपनाए जाने और इसकी स्वीकार्यता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी कारण छोटे दुकानदारों, व्यापारियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), खुदरा विक्रेताओं और सेवा क्षेत्र के प्रतिष्ठानों ने डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाया है।’’ पटेल ने कहा कि किसी एक लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर भले ही कम लगे लेकिन बड़ी संख्या में डिजिटल लेनदेन करने वाले कारोबारों पर इसका कुल प्रभाव काफी अधिक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि खुदरा विक्रेता, थोक व्यापारी, वितरक और सेवा क्षेत्र से जुड़े कई व्यवसाय बेहद प्रतिस्पर्धी माहौल में और सीमित मुनाफे पर काम करते हैं। पटेल ने कहा, ‘‘कर्मचारियों, परिवहन, बिजली, किराये, नियमों के अनुपालन और अन्य परिचालन से जुड़ी लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से जुड़ी यह अतिरिक्त नियमित लागत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर और वित्तीय बोझ डाल सकती है।’’ एफजेसीसीआई अध्यक्ष ने पत्र में केंद्रीय मंत्री से यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने का फैसला वापस लेने और व्यापारियों के लिए मौजूदा शून्य एमडीआर व्यवस्था जारी रखने का आग्रह किया।
TMC सिंबल विवाद पर Rahul Gandhi का आरोप, BJP और चुनाव आयोग मिलकर छीन रहे दलों के चिह्न
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने का मुद्दा सिर्फ पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह हर उस राजनीतिक दल और मतदाता की है जो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उन्होंने यह दावा भी किया, ‘‘वोट चोरी। सरकार चोरी।
अब पार्टी चोरी, ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।’’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और निर्वाचन आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ने तथा उनके चुनाव चिह्न छीनने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।’’ उन्होंने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘आयोग की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं।’’ निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनाव के दौरान पार्टी के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। आयोग ने दोनों गुटों से शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न सौंपने के लिए भी कहा है।
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