Lord Ganesha-Kuber Story: कुबेर के महल में पहुंचते ही बाल गणेश ने खा लिया सारा भोजन, जानें क्या था रहस्य
Bal Ganesha Story: हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में देवी-देवताओं से जुड़े कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं, जिनमें जीवन के लिए महत्वपूर्ण संदेश छिपे होते हैं। भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा भी ऐसी ही है। इस कथा में धन-संपत्ति से अधिक विनम्रता, श्रद्धा और अहंकार से दूर रहने का संदेश दिया गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार कुबेर देव को अपने धन और ऐश्वर्य पर काफी गर्व हो गया। अपने वैभव का प्रदर्शन करने के लिए उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती को अपने महल में भव्य भोज के लिए आमंत्रित किया।
कुबेर ने भगवान शिव को क्यों दिया भोज?
कथा के अनुसार, कुबेर चाहते थे कि भगवान शिव और माता पार्वती उनके महल की भव्यता और अपार संपत्ति को देखें। भगवान शिव कुबेर के मन में पैदा हुए इस अहंकार को समझ गए।
उन्होंने स्वयं कुबेर के भोज में जाने के बजाय बाल गणेश को वहां भेज दिया। कथा के एक प्रचलित रूप में शिवजी ने कुबेर से बाल गणेश की भूख शांत करने के लिए कहा। इसके बाद बाल गणेश कुबेर के महल पहुंच गए।
बाल गणेश ने खा लिया सारा भोजन
कुबेर ने बाल गणेश के स्वागत के लिए तरह-तरह के पकवान तैयार करवाए। उनके सामने स्वादिष्ट व्यंजनों से भरी कई थालियां परोसी गईं। कथा के अनुसार, बाल गणेश ने देखते ही देखते सारा भोजन खा लिया, लेकिन उनकी भूख शांत नहीं हुई। कुबेर लगातार उनके सामने भोजन परोसते रहे, लेकिन गणेश जी की भूख कम होने के बजाय बढ़ती ही गई।
कुछ ही समय में महल का तैयार भोजन खत्म हो गया। इसके बाद बाल गणेश ने रसोई में रखा कच्चा सामान और दूसरी वस्तुएं भी खाना शुरू कर दिया। कथा के कुछ प्रचलित रूपों में महल के बर्तनों को खाने का भी वर्णन मिलता है।
घबरा गए कुबेर, महादेव के पास पहुंचे
बाल गणेश की लगातार बढ़ती भूख देखकर कुबेर परेशान हो गए। उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर गणेश जी की भूख कैसे शांत की जाए। जब स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर होती नजर आई तो कुबेर भगवान शिव के पास कैलाश पहुंचे। उन्होंने महादेव से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और गणेश जी की भूख शांत करने का उपाय पूछा।
महादेव ने बताया अहंकार दूर करने का उपाय
भगवान शिव ने कुबेर को समझाया कि धन और ऐश्वर्य पर अहंकार करना उचित नहीं है। कथा के अलग-अलग प्रचलित रूपों में गणेश जी की भूख शांत करने के लिए अलग-अलग प्रसाद का उल्लेख मिलता है।
एक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने कुबेर को दूर्वा दी और उसे श्रद्धा के साथ गणेश जी को अर्पित करने के लिए कहा। कुबेर ने ऐसा ही किया और इसके बाद गणेश जी की भूख शांत हो गई। वहीं, कथा के कुछ अन्य रूपों में माता पार्वती द्वारा बनाए गए चावल या लड्डू को प्रेम और श्रद्धा से गणेश जी को अर्पित करने का उल्लेख मिलता है।
बाल गणेश ने कुबेर को क्या सिखाया?
कथा के अनुसार, इस प्रसंग के बाद कुबेर को समझ आया कि धन-संपत्ति और वैभव से ज्यादा महत्वपूर्ण विनम्रता और सच्ची श्रद्धा है। इस पौराणिक कथा का मूल संदेश यही माना जाता है कि इंसान के पास चाहे कितना भी धन और ऐश्वर्य क्यों न हो, उसे उसका अहंकार नहीं करना चाहिए। संपत्ति का सही उपयोग और दूसरों के प्रति विनम्र व्यवहार ही उसे सार्थक बनाता है।
नोट: यह लेख धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित कथा का वर्णन है। इसके अलग-अलग प्रचलित संस्करणों में कुछ घटनाओं और प्रसाद से जुड़े विवरण अलग मिल सकते हैं।
Passport New Rules: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के पासपोर्ट पर नया नियम, अब 5 साल तक रहेगा वैध; जानें क्या-क्या हुए बदलाव
Passport New Rules 2026: भारतीय पासपोर्ट से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। विदेश मंत्रालय ने Passport (Amendment) Rules, 2026 को अधिसूचित किया है। इसके तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों को जारी किए जाने वाले साधारण पासपोर्ट की वैधता को लेकर नया प्रावधान जोड़ा गया है।
नए नियम के मुताबिक, 15 साल से कम उम्र के बच्चे को जारी 36 पन्नों वाला साधारण पासपोर्ट जारी होने की तारीख से 5 साल तक या बच्चे के 18 साल की उम्र पूरी होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा।
बच्चों के पासपोर्ट को लेकर क्या बदला?
संशोधित नियम 12(1A) के तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के पासपोर्ट की वैधता तय की गई है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी बच्चे को 14 साल की उम्र में पासपोर्ट जारी होता है, तो वह पासपोर्ट 5 साल पूरे होने तक नहीं बल्कि बच्चे के 18 साल का होने तक ही वैध रहेगा। यानी इस स्थिति में पासपोर्ट की वैधता बच्चे के 18वें जन्मदिन पर समाप्त हो जाएगी। वहीं, कम उम्र में जारी पासपोर्ट की वैधता 5 साल तक हो सकती है, लेकिन यह भी बच्चे के 18 साल की उम्र पूरी होने से आगे नहीं जाएगी।
नए नियम कब से लागू हुए?
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संशोधित नियम भारत के राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो गए हैं। नए नियमों के जरिए Passport Rules, 1980 में बदलाव किया गया है।
15 सितंबर की अधिसूचना में पासपोर्ट आवेदन शुल्क से जुड़े नियम 8 में भी संशोधन किया गया है। इसमें कहा गया है कि अलग-अलग श्रेणी के आवेदन के लिए देय शुल्क पासपोर्ट नियमों की Schedule IV में निर्धारित राशि के अनुसार होगा।
पासपोर्ट बनवाना भी हुआ महंगा
बच्चों के पासपोर्ट की वैधता में बदलाव के साथ पासपोर्ट सेवाओं के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई से पासपोर्ट सेवाओं की फीस बढ़ाई थी।
बढ़ी हुई फीस नए पासपोर्ट आवेदन, री-इश्यू, तत्काल सेवा, खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के बदले नया पासपोर्ट, पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) समेत अन्य सेवाओं पर लागू है।
बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को मिलती रहेगी छूट
8 साल से कम उम्र के बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए नए पासपोर्ट आवेदन पर 10 फीसदी की छूट जारी रहेगी। हालांकि, यह छूट पासपोर्ट री-इश्यू कराने वाले आवेदनों पर लागू नहीं होगी।
वयस्कों के सामान्य पासपोर्ट की फीस
36 पन्नों वाले वयस्क पासपोर्ट के नए आवेदन या नवीनीकरण के लिए सामान्य शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह 60 पन्नों वाले वयस्क पासपोर्ट के लिए शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है।
तत्काल पासपोर्ट की फीस में भी बढ़ोतरी
तत्काल योजना के तहत 36 पन्नों वाले वयस्क पासपोर्ट का शुल्क 3,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, 60 पन्नों वाले पासपोर्ट के लिए तत्काल शुल्क 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये किया गया है। 60 पन्नों वाले वयस्क पासपोर्ट को तत्काल श्रेणी में रिप्लेस कराने की फीस भी 5,500 रुपये से बढ़ाकर 8,500 रुपये कर दी गई है।
18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी सेवाएं महंगी
पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं की बढ़ी हुई फीस का असर नाबालिग आवेदकों पर भी पड़ा है। हालांकि, 8 साल से कम उम्र के बच्चों के नए पासपोर्ट आवेदन पर 10 फीसदी की छूट जारी है।
ऐसे में बच्चों का पासपोर्ट बनवाने या दोबारा जारी कराने वाले अभिभावकों को आवेदन से पहले संबंधित श्रेणी की मौजूदा फीस और नियमों की जांच कर लेनी चाहिए।
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