दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव के लिए आज वोटिंग:यह देश का सबसे बड़ा स्टूडेंट इलेक्शन; पिछली बार ABVP ने 4 में से 3 पोस्ट जीती थीं
दिल्ली यूनिवर्सिटी में आज छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए वोटिंग होनी है। डे कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए वोटिंग का समय सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक है। वहीं, इवनिंग शिफ्ट के छात्रों के लिए वोटिंग दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक होगी। नतीजे 19 सितंबर को आएंगे। करीब 2.75 लाख छात्र ही इस चुनाव में वोटिंग के लिए एलिजिबल हैं। यह देश का सबसे बड़ा स्टूडेंट इलेक्शन है। 2025 के चुनाव में ABVP ने 4 में से 3 पोस्ट जीती थीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2 कैंपस, इनमें 91 कॉलेज, चुनाव 52 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में दो कैंपस हैं। साउथ और नॉर्थ कैंपस लगभग 15 किमी की दूरी पर बने हैं। दोनों कैंपस मिलाकर DU में 91 कॉलेज आते हैं, लेकिन DUSU के चुनावों में DU के सभी कॉलेज वोट नहीं कर सकते हैं। DUSU में सिर्फ 52 कॉलेज और फैकल्टी ही सीधे तौर पर वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। सेंट स्टीफंस, लेडी श्री राम और जीसस एंड मैरी जैसे कुछ बड़े कॉलेज भी DUSU का हिस्सा नहीं हैं। अरुण जेटली समेत कई चर्चित नेता DUSU के प्रेसिडेंट रह चुके हैं अरुण जेटली: 1974 में DUSU अध्यक्ष रहे और आगे चलकर केंद्र सरकार में देश के वित्त एवं रक्षा मंत्री बने (BJP)। विजय गोयल: 1977 में DUSU अध्यक्ष रहे और आगे चलकर केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बने (BJP)। अजय माकन: 1985 में DUSU अध्यक्ष रहे और आगे चलकर केंद्र सरकार में आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्री बने (INC)। अलका लांबा: 1995 में DUSU अध्यक्ष रहीं और आगे चलकर दिल्ली विधानसभा में विधायक तथा महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं (INC)। मुद्दे जो स्टूडेंट्स के बीच चर्चा में… दिल्ली हाईकोर्ट ने DUSU चुनाव हिंसा पर नाराजगी जताई दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों के दौरान हो रही हिंसा पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- लोकतंत्र को अपराधियों का समाज नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने इस मामले में डीयू प्रशासन, दिल्ली पुलिस और सरकार से कल तक रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर उठाए गए कदमों से वह संतुष्ट नहीं हुआ, तो वोटों की गिनती और नतीजों के ऐलान पर रोक लगा दी जाएगी। कोर्ट ने ये टिप्पणी DUSU चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा और गुंडागर्दी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव से पहले बुधवार रात नॉर्थ कैंपस में छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प हुई थी। ABVP और NSUI ने एक-दूसरे से जुड़े लोगों पर अलग-अलग जगहों पर हमला करने के आरोप लगाए। ----------------------------- ये खबर पढ़ें… DU छात्र संघ चुनाव-CJP प्रोटेस्ट के बाद पहला जेन-जी इलेक्शन:सत्य निकेतन हॉस्टल हादसा बड़ा मुद्दा; स्टूडेंट्स बोले- हॉस्टल और छात्राओं की सुरक्षा सबसे जरूरी लग्जरी गाड़ियों का काफिला नारेबाजी के साथ आता है। उसमें से उतरते ही नेताजी के गले में मालाओं का ढेर लग जाता है। बैकग्राउंड में पटाखे छूट रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
महिला LPG-सिलेंडर नहीं उठा सकती... कहकर नौकरी नहीं दी थी:अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन महिला को देगा 12 लाख रुपए का मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) को एक योग्य महिला उम्मीदवार सुमित्रा को 12 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। करीब 38 साल पहले आईओसी ने यह कहकर नौकरी देने से इनकार किया था कि 'महिला सिलेंडर नहीं उठा पाएगी। महिला अब रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच चुकी है। इसलिए कोर्ट ने उसे नौकरी देने के बजाय 12 लाख रुपए का मुआवजा देना तय किया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कॉर्पोरेशन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि केवल महिला होने के आधार पर नौकरी न देना नारीत्व का अपमान है। अब पूरा मामला समझिए... हरियाणा के गुड़्हा गांव की रहने वाली सुमित्रा सुमित्रा उन 49 लोगों में शामिल थीं, जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक स्थानीय समिति ने एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में रिफिलिंग हेल्पर या कैजुअल खलासी के पद के लिए की थी। यह मामला गुढ़ा गांव में रहने वाली एक महिला से जुड़ा है। साल 1988 में उनका नाम उन 49 लोगों की सूची में शामिल था, जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली स्थानीय समिति ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के LPG बॉटलिंग प्लांट के लिए की थी। महिला ने खलासी, चपरासी या रीफिलिंग हेल्पर के पद के लिए इंटरव्यू दिया था। लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली, जबकि सूची में शामिल अन्य लोगों को नियुक्ति पत्र दे दिए गए थे। इसके बाद महिला ने नौकरी नहीं दिए जाने के फैसले के खिलाफ ट्रायल कोर्ट का रुख किया। ट्रायल कोर्ट ने माना कि महिला नौकरी के लिए तय योग्यता पूरी करती थीं। कोर्ट ने एक गवाह के बयान का भी हवाला दिया, जिससे यह बात सामने आई कि उन्हें सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं दी गई क्योंकि वह महिला थीं। हालांकि, ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद आईओसी ने अपील की और 6 अगस्त 1993 को प्रथम अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया। इसके बाद मामला हरियाणा हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। क्या महिलाएं घरों में गैस सिलेंडर नहीं उठातीं: कोर्ट इंडियन ऑयल के वकील ने दलील दी थी कि इस काम में भारी LPG सिलेंडर उठाने पड़ते हैं और रात की शिफ्ट होती है, इसलिए शायद अधिकारियों ने महिला को उपयुक्त नहीं माना। इस पर कोर्ट ने वकील से सवाल किया- क्या महिलाएं घरों में गैस सिलेंडर नहीं उठातीं? कोर्ट ने कहा- हम भारत से हैं और हर दिन महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं। हम कहते हैं कि महिला देवी के समान है। ऐसे में भारत सरकार के एक उपक्रम की ओर से यह महिला गरिमा का अपमान है। ------------ ये खबर भी पढ़ें... सुप्रीम कोर्ट बोला- महिलाएं होममेकर नहीं, राष्ट्र निर्माता हैं:सड़क दुर्घटना केस में कहा- उनके श्रम की कीमत ₹30 हजार महीना सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला में कहा, ‘सड़क हादसे में गृहिणियों की मौत होने पर उनके द्वारा की जाने वाली परिवार की देखभाल और घरेलू काम की कीमत कम से कम ₹30 हजार प्रति महीना (₹3.6 लाख सालाना) मानी जाएगी।’ पूरी खबर पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 











