EPFO WhatsApp Channel:अब ‘Hello’ लिखें और पाएं PF अकाउंट से जुड़ी ये सारी जानकारी, जानें कैसे उठा सकते हैं लाभ
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के कर्मचारियों और खाताधारकों के लिए अच्छी खबर है। ईपीएफओ ने व्हाट्सएप चैनल की सुविधा शुरू कर दी है। इसके जरिए खाताधारक न सिर्फ खाते का बैलेंस, लेनेदेन का विवरण, बल्कि अन्य सभी अपडेट्स प्राप्त कर सकते हैं।
इसकी जानकारी खुद ईपीएफओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से दी है। इसके साथ ही ईपीएफओ ने एक क्यूआर कोड (QR Code) भी पोस्ट में शेयर किया है। यदि आप भी EPFO के आधिकारिक WhatsApp Channel से जुड़ना चाहते हैं तो आप सीधे व्हाट्सएप चैनल के लिंक या क्यूआर कोड के जरिए ज्वाइन कर सकते हैं। अब अपने ईपीएफओ पंजीकृत मोबाइल नंबर वाले व्हाट्सएप से ‘Hello’ लिखकर भेजें और आवश्यक सेवाओं का विकल्प चुनें।
साथ ही लिंक https://whatsapp.com/channel/0029Vb6kmH48Pgs8ftd6Kw3Y के जरिए भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठक के आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल से जुड़ सकते हैं। इसके माध्यम से खाताधारक अपने खाते का बैलेंस और खाते के अंतिम 5 ट्रांजैक्शन चेक कर सकते हैं। इसके अलावा अपने क्लेम का स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हैं। ईपीएफओ से जुड़े नियमों और सेवाओं के मुख्य अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य सदस्यों को तेज, सहज और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकी उन्हें पीएफ खातों से जुड़ी जानकारी और सुविधाएं आसानी से मिल सकें।
EPFO now on WhatsApp too!
????Join EPFO's official WhatsApp Channel to get important updates and useful information. Click on the link to join. https://t.co/k2KmISipxw #EPFO #EPFOWithYou #HumHainNa #EPFOWhatsAppChannel pic.twitter.com/mgLueBG1GD
— EPFO (@officialepfo) September 13, 2026
गणपति बप्पा मोरया: कहीं नावों पर उत्सव तो कहीं हजारों महिलाओं का अथर्वशीर्ष पाठ, गणेशोत्सव की अनोखी परंपराएं
आज हमारे घर बप्पा आए हैं। अब से दस दिन तक श्रद्धालुओं के घरों और विभिन्न पंडालों में गणपति बप्पा की भक्ति और उत्सव का माहौल रहेगा। कहीं सुबह-शाम आरती होगी, कहीं भोग और प्रसाद बांटा जाएगा तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ गणेशोत्सव मनाया जाएगा। इन दस दिनों में बप्पा के स्वागत से लेकर विदाई तक हर दिन की अपनी खास मान्यता और रस्म होती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में गणेशोत्सव स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं के साथ मनाई जाती है। कहीं बप्पा के साथ गौरी का स्वागत होता है, कहीं नावों पर उत्सव मनाया जाता है तो कहीं प्राकृतिक चीजों से गणेश जी का मंडप सजाया जाता है। यही अलग-अलग परंपराएं गणेशोत्सव को और खास बनाती हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ अनोखी परंपराओं के बारे में।
गोवा: गणपति के ऊपर सजती है ‘माटोली’
गोवा में गणेश चतुर्थी को ‘चवथ’ कहा जाता है। यहां गणपति की स्थापना के साथ ‘माटोली’ सजाने की परंपरा बेहद खास है। इसके लिए गणेश प्रतिमा के ऊपर लकड़ी या बांस की एक संरचना बनाई जाती है। इसे केले, नारियल, सुपारी, फल, सब्जियों, फूलों, जड़ों और दूसरी प्राकृतिक चीजों से सजाया जाता है। यानी बप्पा का मंडप सिर्फ फूलों से नहीं बल्कि आसपास की प्रकृति और स्थानीय उपज से भी सजता है। यही माटोली गोवा के गणेशोत्सव को दूसरी जगहों से अलग पहचान देती है।
गोवा: नावों पर मनाया जाता है गणेश उत्सव
गोवा के कुछ इलाकों में गणेश उत्सव का रिश्ता पानी से भी जुड़ जाता है। कुंभर्जुआ में ‘सांगोड’ नाम की परंपरा में सजी हुई नावों के जरिए गणेश उत्सव मनाया जाता है। यह परंपरा गोवा के नदी और जलमार्गों से जुड़े जीवन की झलक दिखाती है। वहीं, गणेश उत्सव के दौरान ‘नव्याची पंचमी’ भी मनाई जाती है। इस अवसर पर खेतों से आई नई धान की फसल को घर लाकर उसकी पूजा की जाती है।
महाराष्ट्र: गणपति के साथ घर आती हैं देवी गौरी
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की सबसे अधिक मान्यता है। ये पर्व यहां सबसे ज्यादा धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यहां कई परिवारों में गणेश चतुर्थी के कुछ दिन बाद देवी गौरी का स्वागत भी किया जाता है। इसे ‘गौरी आगमन’ कहा जाता है। गौरी को देवी पार्वती का स्वरूप माना जाता है और उनके स्वागत के लिए घर में विशेष सजावट की जाती है। कई परिवारों में गौरी की पूजा के दौरान अलग-अलग पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। कुछ समुदायों में गौरी के प्रतीक के रूप में नदी किनारे से लाए गए पत्थरों की भी पूजा करने की परंपरा भी है।
पुणे: हजारों महिलाएं करती हैं सामूहिक अथर्वशीर्ष पाठ
पुणे के प्रसिद्ध दगडूशेठ गणपति मंदिर के सामने गणेशोत्सव के दौरान महिलाओं का सामूहिक अथर्वशीर्ष पाठ एक खास परंपरा बन चुका है। यह भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष वैदिक स्तोत्र का सामूहिक पाठ होता है। इसकी शुरुआत 1985 में हुई थी और पहले साल इसमें लगभग 10-15 महिलाएं ही शामिल हुई थीं। लेकिन धीरे धीरे ये संख्या बढ़ती गई और अब यह आयोजन हजारों महिलाओं की भागीदारी तक पहुंच चुका है। हाल के वर्षों में 30 हजार से ज्यादा महिलाएं इस पाठ में शामिल हुईं थीं।
ओडिशा: विद्यार्थियों के बीच खास होता है गणेश उत्सव
ओडिशा में गणेश पूजा का संबंध विद्यार्थियों से खासतौर पर से जुड़ा हुआ है। स्कूल और कॉलेजों में गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। विद्यार्थी ज्ञान और पढ़ाई में सफलता की कामना के साथ श्रीगणेश की पूजा करते हैं। इस वजह से यहां गणेश उत्सव शैक्षणिक संस्थानों में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है।
कर्नाटक: गणेश जी से पहले होती है गौरी की पूजा
कर्नाटक में कई जगह गणेश चतुर्थी से पहले गौरी पूजा की परंपरा देखने को मिलती है। यहां गौरी को घर में आमंत्रित करने के बाद गणेश जी की पूजा की जाती है। इस परंपरा में महिलाएं विशेष रूप से भाग लेती हैं।गोवा: गणपति के साथ नई फसल का भी स्वागत
आंध्र प्रदेश: मिट्टी और हल्दी से बने गणेश की पूजा
आंध्र प्रदेश में गणेश पूजा के दौरान मिट्टी से बने गणेश की प्रतिमाओं की परंपरा मिलती है। कुछ जगहों पर हल्दी से बनाए गए गणेश स्वरूप की भी पूजा की जाती है। यहां गणेश चतुर्थी को ‘विनायक चविथी’ कहा जाता है।
आंध्र प्रदेश के कनिपकम में 21 दिन चलता है उत्सव
आंध्र प्रदेश के कनिपकम स्थित वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर में गणेश चतुर्थी से जुड़ा वार्षिक उत्सव 21 दिनों तक चलता है। इस दौरान भगवान गणेश की उत्सव प्रतिमा को अलग-अलग वाहनों पर नगर भ्रमण कराया जाता है। यानी यहां गणेश उत्सव की अवधि सामान्य 10 दिन के उत्सव से भी लंबी होती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News









