केंद्र कल से आयोजित करेगा राज्यों के वित्त मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक, 'विकसित भारत' के लिए वित्तीय रणनीति पर होगा मंथन
नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण विषय पर राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों तथा वित्त सचिवों का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित करेगा, जो शुक्रवार से शुरू होगा।
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नई दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उपस्थित रहेंगी, जिसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।
बयान में कहा गया है कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत पूरकता को मजबूत करना है। यह मंच भारत की विकास यात्रा से जुड़ी वित्तीय चुनौतियों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा के लिए अकादमिक दृष्टिकोण और व्यावहारिक नीति अनुभव को एक साथ लाएगा।
उद्घाटन सत्र में आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) की सचिव अनुराधा ठाकुर सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालेंगी।
उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष रहे और इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ के अध्यक्ष एवं लाइफ ट्रस्टी एन.के. सिंह देंगे। वहीं महाराष्ट्र सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव और वित्त सचिव सुधीर श्रीवास्तव विकसित भारत के वित्तपोषण पर राज्यों का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।
सम्मेलन में तीन प्रमुख विषयगत सत्र होंगे, जिनमें व्यापक आर्थिक परिदृश्य (मैक्रो इकोनॉमिक ओवरव्यू), कृषि परिवर्तन के लिए वित्तपोषण और ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्तपोषण शामिल हैं।
इन चर्चाओं के लिए प्रतिभागियों को पहले से पृष्ठभूमि दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें विकसित भारत की दिशा में आर्थिक उपलब्धियां और रोडमैप, विकसित भारत के लिए निजी वित्तपोषण तथा राज्यों पर जीएसटी 2.0 के प्रभाव जैसे विषय शामिल हैं।
इसके अलावा, कृषि बाजारों और विपणन के लिए वित्तपोषण, भारतीय कृषि में लचीलापन और टिकाऊ संसाधन उपयोग, नवीकरणीय ऊर्जा और ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों के लिए वित्तपोषण तथा कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।
बयान में कहा गया है कि सम्मेलन के दौरान सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के सचिव सौरभ गर्ग विकसित भारत की यात्रा में विकास परिणामों को मापने के महत्व पर प्रकाश डालेंगे।
वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव एस. कृष्णन सुशासन में नई प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे।
--आईएएनएस
डीबीपी
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नशा मुक्ति यात्रा पर बलतेज पन्नू का हमला, बोले- पंजाब को बदनाम करने के बजाय बॉर्डर से ड्रग्स रोकने पर ध्यान दें
पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया इंचार्ज और नशा मुक्ति मोर्चा के मुख्य प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने विपक्षी दल की ओर से निकाली जा रही ‘नशा मुक्ति पंजाब यात्रा’ पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ होने वाली हर गंभीर कोशिश का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इस मुद्दे को राजनीतिक अभियान बनाकर पंजाब की छवि खराब नहीं की जानी चाहिए.
2007 से 2017 के दौर को लेकर उठाए सवाल
पन्नू ने आरोप लगाया कि 2007 से 2017 के बीच जब राज्य में गठबंधन सरकार थी और नशे की समस्या गंभीर रूप से चर्चा में आने लगी थी, तब नशे के खिलाफ इसी तरह की व्यापक मुहिम क्यों नहीं चलाई गई.
उन्होंने उस दौर में ड्रग्स से जुड़े मामलों की जांच और अधिकारियों के तबादले को लेकर भी सवाल उठाए. पन्नू ने कहा कि जब जांच के दौरान कई नाम सामने आने की बात कही जा रही थी, तब संबंधित जांच को लेकर भी जवाब दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि आज नशे के मुद्दे पर राजनीतिक यात्रा निकालने से पहले पुराने कार्यकाल की भूमिका और उस समय उठाए गए कदमों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए.
बॉर्डर से नशे की तस्करी पर केंद्रित हो चर्चा
बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब के जिन सीमावर्ती जिलों में ड्रग्स की समस्या को लेकर ज्यादा चर्चा होती है, उनमें से कई जिले अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े हुए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि सीमा पार से होने वाली कथित तस्करी को रोकने के लिए केंद्र और सीमा सुरक्षा बल की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि पंजाब को निशाना बनाने के बजाय इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि सीमा पार से नशीले पदार्थों की संभावित एंट्री रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां किस तरह काम कर रही हैं.
‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का दावा
पन्नू ने कहा कि 2022 में सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान शुरू किया. उनके मुताबिक पंजाब पुलिस की ओर से ड्रग नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया गया है, ताकि सीमा पार से होने वाली तस्करी की संभावित गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जा सके.
युवाओं के खेलों की ओर बढ़ने का दावा
पन्नू ने पंजाब में बढ़ती खेल गतिविधियों को नशे के खिलाफ सामाजिक बदलाव का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि हाल ही में बठिंडा में आयोजित यूथ रन में 25 हजार से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया.
उन्होंने दावा किया कि राज्य में 3,100 खेल मैदान बनाए गए हैं, जिनमें करीब 750 मैदान लोगों को समर्पित किए जा चुके हैं. उनके अनुसार इन सुविधाओं का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें स्वस्थ गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है.
‘पंजाब की पहचान को सिर्फ नशे से न जोड़ें’
पन्नू ने कहा कि पंजाब को केवल नशे की समस्या से जोड़कर देखना सही नहीं है. उन्होंने राज्य की खेल प्रतिभा का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा जरूरी लगातार पुलिस कार्रवाई, सीमा सुरक्षा, पुनर्वास और युवाओं के लिए रोजगार व खेल के अवसर बढ़ाना है.
राजनीतिक बहस के बीच नशे का मुद्दा
पंजाब में नशा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का प्रमुख मुद्दा रहा है. ऐसे में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. बलतेज पन्नू ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान तभी प्रभावी होगा, जब इसे राजनीतिक बयानबाजी से आगे ले जाकर लगातार कार्रवाई और सामाजिक भागीदारी से जोड़ा जाए.
उन्होंने कहा कि पंजाब को नशे से मुक्त करने की लड़ाई लंबी है और सरकार की ओर से चलाया जा रहा अभियान जारी रहेगा. साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर पंजाब की छवि को नुकसान पहुंचाने के बजाय ठोस समाधान पर ध्यान देने की अपील की.
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