Prithvi Shaw और Akriti Agarwal हुए अलग, 6 महीने पहले ही हुई थी सगाई
भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और उनकी मंगेतर आकृति अग्रवाल अलग हो गए हैं। आकृति ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों के फ्यूचर गोल्स और मौजूदा परिस्थितियां अलग हैं। इसी वजह से दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया है।
प्यार और परवाह के बावजूद लिया अलग होने का फैसला
आकृति ने अपने पोस्ट में कहा कि एक-दूसरे के लिए प्यार और परवाह होने के बावजूद दोनों ने यह महसूस किया कि उनकी राहें एक साथ नहीं हैं। उन्होंने लोगों से दोनों के फैसले को समझने और उनकी प्राइवेसी का सम्मान करने की अपील की।
आकृति ने यह भी कहा कि इस फैसले को लेकर किसी तरह की अटकलें न लगाई जाएं। उन्होंने लोगों से उनकी प्राइवेसी का सम्मान करने के लिए धन्यवाद भी कहा।
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जुलाई में आकृति की पोस्ट के बाद उठे थे सवाल
जुलाई 2026 के पहले हफ्ते में आकृति अग्रवाल ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा था कि उन्हें कई बार धोखा मिला है और हर अफवाह सच है। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों के रिश्ते को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे।
उस दौरान दोनों के एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करने के दावे भी सामने आए थे। हालांकि, बाद में आकृति ने साफ किया था कि उनकी वह पोस्ट पृथ्वी शॉ से जुड़ी हुई नहीं थी।
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया था कि दोनों सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को फॉलो कर रहे थे। इसके अलावा दोनों की सगाई की तस्वीरें भी सोशल मीडिया से डिलीट नहीं की गई थीं।
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मार्च 2026 में हुई थी सगाई
पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल ने इसी साल 8 मार्च 2026 को सगाई की थी। पृथ्वी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करके अपने रिश्ते का ऐलान किया था।
सगाई के करीब छह महीने बाद अब दोनों ने अलग होने का फैसला किया है। आकृति के बयान के मुताबिक, यह फैसला दोनों ने आपसी सहमति से लिया है और उन्होंने लोगों से इस मामले में किसी तरह की अटकलें न लगाने की अपील की है।
'गॉडफादर ऑफ एआई' बोले- मानवजाति को खत्म कर देगा AI:हमने ऐसी टेक्नोलॉजी नहीं देखी जो इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान हो सकती है
AI पिछले कुछ सालों में तेजी से विकसित हुआ है, लेकिन इसके लंबे समय के खतरों को लेकर तकनीक के शुरुआती दिग्गजों की चिंता बढ़ती जा रही है। एआई के 'गॉडफादर' कहे जाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन ने चेतावनी दी है कि अगले एक दशक यानी 10 साल के भीतर एआई मानव सभ्यता खत्म कर सकता है। एक प्रोग्राम में बात करते हुए कंप्यूटर साइंटिस्ट हिंटन ने कहा कि ऐसा होने की संभावना करीब 10% है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस खतरे का सटीक अनुमान लगाने का कोई पुख्ता तरीका नहीं है। अभी रिस्क सटीक आकलन करना मुश्किल हिंटन ने कहा कि 10% खतरे का अनुमान मेरे हिसाब से गलत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि खतरे का आंकड़ा इससे बहुत कम रखना भी सही नहीं होगा, क्योंकि फिलहाल कोई नहीं जानता कि इस रिस्क का सटीक आकलन कैसे किया जाए। 30-50 साल का खतरा अब 10 साल पर आया हिंटन ने खुलासा किया कि एआई से पैदा होने वाले खतरों की टाइमलाइन में अब बड़ा बदलाव आ गया है। पहले उनका मानना था कि एआई से इंसानी अस्तित्व को खतरा पैदा होने में 30 से 50 साल लगेंगे। बाद में उन्होंने इस समय को घटाकर 10 से 20 साल किया। अब उनका मानना है कि यह खतरा अगले 10 साल या उससे भी कम समय में सामने आ सकता है। उन्होंने यह भी माना कि कई रिसर्चर्स का अनुमान इससे भी कम समय का है। एआई कंपनियों पर लगा 'इंसानों की जान से खिलवाड़' का आरोप एआई के खतरों को लेकर हिंटन की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब इस मुद्दे पर वैश्विक बहस तेज हो गई है। हाल ही में एंथ्रोपिक के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कॉक्सन ने अनुमान जताया था कि 10 साल के भीतर एआई के इंसानों को खत्म करने की 10% से ज्यादा की संभावना है। उन्होंने एआई कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे सेल्फ-इम्प्रूविंग (खुद को बेहतर बनाने वाली) सुपरइंटेलिजेंस बनाने की होड़ में इंसानों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। इसके अलावा एंथ्रोपिक के सेफ्टी रिसर्चर इवान ह्यूबिंगर ने भी खतरे की संभावना 10% से अधिक बताई है। वैश्विक नियमों की सख्त जरूरत: अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही समाधान हिंटन का कहना है कि भविष्य दो अलग दिशाओं में जा सकता है। अगर खतरों को सही ढंग से मैनेज किया जाए, तो एआई से समाज को बड़े फायदे भी मिल सकते हैं। इसके लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े नियम और सहयोग बनाने की मांग की। हिंटन के अनुसार, एडवांस एआई सिस्टम को इंसानों के कंट्रोल से बाहर होने से रोकने में सभी देशों का एक जैसा हित है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दुनिया की सरकारें सही समय पर एक साथ मिलकर इसके नियम बना पाएंगी।
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