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टाटा संस के बोर्ड ने एन.चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल का समर्थन किया, लिस्टिंग को भी दी मंजूरी

मुंबई, 17 सितंबर (आईएएनएस)। टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल का समर्थन किया। साथ ही, कंपनी की लिस्टिंग को भी मंजूरी दे दी। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल का विरोध किया, जबकि अन्य बोर्ड सदस्यों ने इसका समर्थन दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों से पता चला है कि नोएल टाटा, जिनके पास टाटा ट्रस्ट्स की ओर से बोर्ड में वीटो का अधिकार है, दोनों प्रस्तावों से सहमत नहीं थे और उन्होंने प्रस्तावों को रोकने के लिए अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल किया है।

यह फैसला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा टाटा संस को लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिए जाने के कुछ हफ्ते बाद आया है।

इसके अलावा, आरबीआई ने टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी के तौर पर वर्गीकृत किया था, जिसके तहत उसे 2022 में तीन साल के भीतर लिस्ट होना जरूरी था।

बोर्ड के इस फैसले से कंपनी की लीडरशिप को लेकर महीनों से चली आ रही अनिश्चितता भी खत्म हो गई है।

चंद्रशेखरन फरवरी 2017 से टाटा संस की कमान संभाले हुए हैं और 2022 में दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया था, जो 20 फरवरी, 2027 को खत्म होने वाला है।

हालांकि टाटा ट्रस्ट्स ने 2025 में तीसरे कार्यकाल का समर्थन किया था, लेकिन इस साल की शुरुआत में एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसे व्यवसायों के प्रदर्शन और पूंजी आवंटन को लेकर नोएल टाटा की चिंताओं के कारण बातचीत रुक गई थी।

इससे पहले अगस्त में, चंद्रशेखरन ने संकेत दिया था कि वह अगला कार्यकाल नहीं चाहते हैं और बोर्ड को अपने फैसले के बारे में बता दिया था।

इससे पहले एक बयान में चंद्रशेखरन ने कहा है कि मैंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं।

उन्होंने कहा, मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने के बेहद संतोषजनक अवसर के लिए आभारी हूं। पिछले दशक में टाटा संस का नेतृत्व करना एक बड़ा सम्मान और एक बड़ी जिम्मेदारी रही है।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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UP Election 2027: गौतम बुद्ध नगर की 3 सीटों पर क्या है सियासी माहौल?

Gautam Buddh Nagar: दिल्ली से सटा गौतम बुद्ध नगर जिला भले ही सीटों की संख्या में यूपी के सबसे छोटे जिलों में गिना जाता हो, मगर सियासी और आर्थिक अहमियत के लिहाज से इसका कद किसी बड़े जिले से कम नहीं है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और अब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की वजह से यह जिला हमेशा राष्ट्रीय सुर्खियों में रहता है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तो यहां सियासी पारा अभी से चढ़ना शुरू हो गया है. आइए जानते हैं जिले की सभी सीटों का पूरा हाल.

जिले में बड़ी संख्या में है प्रवासी कामकाजी आबादी 

गौतम बुद्ध नगर जिला 1997 में बुलंदशहर और गाजियाबाद के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया था. जनगणना 2011 के अनुसार जिले की कुल आबादी करीब 16 लाख 48 हजार थी, जिसमें पुरुषों की संख्या करीब 8 लाख 90 हजार और महिलाओं की संख्या करीब 7 लाख 58 हजार दर्ज हुई. यहां प्रति हजार पुरुषों पर सिर्फ 851 महिलाएं हैं, जो प्रदेश के औसत से काफी कम है, इसकी एक वजह जिले में बड़ी संख्या में आने वाली पुरुष प्रवासी कामकाजी आबादी मानी जाती है.

दादरी और जेवर जैसे इलाकों में किसान और ग्रामीण आबादी 

साक्षरता के मामले में यह जिला प्रदेश में सबसे आगे गिना जाता है, यहां कुल साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता करीब 88 प्रतिशत और महिला साक्षरता करीब 71 प्रतिशत रही. धार्मिक आबादी की बात करें तो जिले में हिंदू आबादी करीब 85 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 13 प्रतिशत है. खास बात यह है कि जिले की करीब 59 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है, जो इसे यूपी के सबसे शहरीकृत जिलों में शुमार करती है, हालांकि दादरी और जेवर जैसे इलाकों में आज भी किसान और ग्रामीण आबादी की बड़ी मौजूदगी है.

जिले में सिर्फ 3 विधानसभा सीटें, कोई भी आरक्षित नहीं

गौतम बुद्ध नगर जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं नोएडा, दादरी और जेवर. बता दें यह तीनों सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं और यहां कोई भी सीट अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए आरक्षित नहीं है.

भाजपा को मिला था भारी बहुमत, सपा सेंध लगाने की लगा रही जुगत 

2022 के विधानसभा चुनाव में गौतम बुद्ध नगर जिले की तीनों सीटों पर भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की, विपक्ष यहां कहीं भी मुकाबले में नजर नहीं आया. आइए आपको तीनों विधानसभाओं के बारे में डिटेल में बताते हैं.

नोएडा सीट की बात करें तो यहां भाजपा के पंकज सिंह ने सपा के सुनील चौधरी को करीब 1 लाख 81 हजार वोटों के भारी अंतर से हराया था. पंकज सिंह केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे हैं और यह जिले की सबसे बड़ी जीत रही थी.

दादरी सीट की बात करें तो भाजपा के तेजपाल सिंह नागर ने सपा के राजकुमार भाटी को करीब 1 लाख 38 हजार वोटों से पराजित किया था.

जेवर सीट पर भाजपा के धीरेंद्र सिंह ने रालोद प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना को करीब 56 हजार वोटों से हराया था.

जमीन अधिग्रहण आंदोलन से भाजपा के गढ़ तक का सफर ने जिले को दी पहचान 

गौतम बुद्ध नगर जिले की राजनीति समझने के लिए 2011 के भट्टा परसौल किसान आंदोलन को याद करना जरूरी है. ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के लिए हुए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ भड़के इस आंदोलन ने पूरे जिले की सियासत को हिलाकर रख दिया था और इसका सीधा असर 2012 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला, जब सत्ताधारी दल को यहां नुकसान उठाना पड़ा था. मगर 2014 की मोदी लहर के बाद जिले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई. 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में भाजपा ने तीनों सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज की. दिलचस्प बात यह है कि नोएडा और दादरी जैसी सीटों पर बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से आकर बसे मतदाता हैं, जो परंपरागत जातीय समीकरणों से हटकर विकास और सुरक्षा जैसे शहरी मुद्दों पर वोट करते रहे हैं, जबकि जेवर जैसी सीट पर स्थानीय गुर्जर, जाट ठाकुर किसान बिरादरी का प्रभाव आज भी कायम है.

अब क्या हैं मौजूदा हालात, क्या बीजेपी को मिलेगी चुनौती?

2027 के चुनाव से पहले गौतम बुद्ध नगर जिला यूपी की सियासत का सबसे बड़ा अखाड़ा बनता जा रहा है. मार्च 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया, जिसे भाजपा अपनी सबसे बड़ी विकास उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है. इसी दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दादरी में बड़ी जनसभा कर सत्ताधारी दल को सीधी चुनौती दी है. जबकि बसपा कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं. 

60 साल से ज्यादा उम्र के विधायकों का कटेगा​ टिकट

मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक भाजपा उन सीटों पर मौजूदा विधायकों का टिकट बदलने पर विचार कर रही है जहां विधायक 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं और दो बार जीत चुके हैं. जिससे दादरी सीट पर नए चेहरे को मौका मिलने की अटकलें तेज हैं. दूसरी ओर सपा जेवर सीट पर भी शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में जुटी है ताकि भाजपा के इस मजबूत गढ़ में सेंध लगाई जा सके.

किस सीट पर क्या है जातीय समीकरण आइए समझते हैं 

- नोएडा सीट की बात करें तो शहरी और बाहरी राज्यों से आई प्रवासी आबादी का यहां सबसे बड़ा प्रभाव है. इसके अलावा पंजाबी, ब्राह्मण और वैश्य समाज भी यहां अहम भूमिका में रहते हैं.

- दादरी सीट पर गुर्जर और ठाकुर बिरादरी का पारंपरिक दबदबा है. साथ ही इस सीट पर मुस्लिम और दलित मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

- जेवर सीट पर जाट और गुर्जर किसान बिरादरी का मजबूत प्रभाव. इसके अलावा दलित और मुस्लिम मतदाता भी अच्छी-खासी संख्या में मौजूद हैं.

(FAQ)

सवाल: गौतम बुद्ध नगर जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
जवाब: गौतम बुद्ध नगर जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं, नोएडा, दादरी और जेवर.

सवाल: इनमें से कौन-सी सीट आरक्षित है?
जवाब: जिले की तीनों सीटें सामान्य श्रेणी की हैं, यहां कोई भी सीट अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए आरक्षित नहीं है.

सवाल: 2022 चुनाव में गौतम बुद्ध नगर जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
जवाब: भाजपा ने तीनों सीटों पर भारी बहुमत से जीत दर्ज की, विपक्ष यहां कहीं मुकाबले में नहीं आ सका.  

सवाल: गौतम बुद्ध नगर जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
जवाब: जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू आबादी करीब 85 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 13 प्रतिशत है.

सवाल: जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
जवाब: 2011 के भट्टा परसौल किसान आंदोलन के बाद कुछ समय के लिए सत्ताधारी दल को नुकसान हुआ था, मगर 2014 के बाद से यह जिला भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुका है.

सवाल: 2027 के चुनाव से पहले फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
जवाब: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन को भाजपा अपने चुनाव प्रचार का केंद्र बना रही है, जबकि सपा और बसपा भी बड़ी रैलियों और कार्यक्रमों के जरिए भाजपा के इस गढ़ में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही हैं.

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Jos Buttler ने रचा इतिहास, T20 क्रिकेट में 15000 रन बनाने वाले बने दुनिया के पहले बल्लेबाज

इंग्लैंड के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ जोस बटलर, कार्डिफ़ के सोफिया गार्डन्स में श्रीलंका के ख़िलाफ़ इंग्लैंड के दूसरे T20 इंटरनेशनल मैच के दौरान T20 क्रिकेट में 15,000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने 18 सितंबर को इंग्लैंड की पारी के पांचवें ओवर में एशान मलिंगा की गेंद पर एक रन लेकर यह उपलब्धि हासिल की और T20 क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी के तौर पर वेस्टइंडीज़ के दिग्गज कीरोन पोलार्ड को पीछे छोड़ दिया।

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बटलर ने 528 मैचों में 35.46 की औसत और 147.46 के स्ट्राइक रेट से 15,000 रन बनाए हैं। उनके नाम नौ शतक और 107 अर्धशतक दर्ज हैं। उन्होंने कई टीमों और टूर्नामेंट्स में हिस्सा लिया है, जिनमें इंग्लैंड, लंकाशायर, मैनचेस्टर ओरिजिनल्स, मैनचेस्टर सुपर जायंट्स, गुजरात टाइटंस, समरसेट, पार्ल रॉयल्स, मुंबई इंडियंस, सिडनी थंडर, कोमिला विक्टोरियंस, डरबन सुपर जायंट्स, मेलबर्न रेनेगेड्स और इंग्लैंड लायंस शामिल हैं। उन्होंने कीरोन पोलार्ड को पीछे छोड़ दिया, जिनके नाम 754 मैचों में 31.71 की औसत से 14,999 रन हैं।

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इस मैच में इंग्लैंड ने श्रीलंका को छह विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज़ में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। श्रीलंका को 20 ओवरों में नौ विकेट पर 145 रन पर रोकने के बाद, इंग्लैंड ने 12.1 ओवरों में लक्ष्य हासिल कर लिया और चार विकेट पर 146 रन बनाए। इस जीत के साथ T20 इंटरनेशनल में श्रीलंका के खिलाफ इंग्लैंड की लगातार जीत का सिलसिला 14 मैचों तक पहुंच गया। तीन विकेट लेने के लिए जॉर्ज डॉसन को 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' चुना गया। तीसरा और आखिरी T20I शनिवार को मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेला जाएगा, जबकि इंग्लैंड पहले ही सीरीज़ जीत चुका है।

Fri, 18 Sep 2026 19:21:00 +0530

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