TATA मोटर्स का बड़ा एलान, 1 अक्टूबर से कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की करेगी बढ़ोतरी
टाटा मोटर्स ने गुरुवार को कहा कि वह 1 अक्टूबर 2026 से अपने पूरे कमर्शियल वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करेगी. कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा कि कीमतों में यह संशोधन मॉडल और वेरिएंट के अनुसार अलग-अलग होगा. बढ़ती कमोडिटी कीमतों और अन्य इनपुट लागतों के प्रभाव को कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है.
इस वर्ष कमर्शियल वाहन श्रेणी में टाटा मोटर्स द्वारा की जा रही यह दूसरी मूल्य वृद्धि है. इससे पहले कंपनी ने 1 अप्रैल 2026 से कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी. उस समय भी कंपनी ने बढ़ती कमोडिटी और इनपुट लागतों को इसका कारण बताया था. ताजा फैसला टाटा मोटर्स के विभिन्न कारोबारों में कीमतों में हो रही बढ़ोतरी की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है. टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड ने भी 1 जुलाई से अपने यात्री वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी. इसमें आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाले मॉडल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों शामिल थे.
ये भी पढे़ं: भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की नींव रखी जा चुकी है, अब इसे तेजी से आगे बढ़ाने का समय है: अश्विनी वैष्णव
यह पैसेंजर वाहन कारोबार में वर्ष 2026 की दूसरी मूल्य वृद्धि थी. इससे पहले 1 अप्रैल से कंपनी ने अपने आईसीई पोर्टफोलियो की कीमतों में 0.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी. अप्रैल में किए गए संशोधन के तहत कुछ वेरिएंट्स की कीमतों में 1.09 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई थी, जबकि टाटा अल्ट्रोज के कुछ वेरिएंट्स की कीमतों में मामूली कमी की गई थी. पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग में वाहन निर्माता बढ़ती कमोडिटी कीमतों, लॉजिस्टिक्स खर्च, सप्लाई चेन लागत और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतों में बदलाव कर रहे हैं.
मारुति सुजुकी ने जून 2026 से अपने वाहनों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी की थी, जबकि ह्युंडई मोटर इंडिया ने 1 जून से कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी की थी. इसके अलावा, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया, बीएमडब्ल्यू इंडिया, मर्सिडीज-बेंज इंडिया, ऑडी इंडिया और होंडा कार्स इंडिया जैसी कंपनियों ने भी इसी अवधि के आसपास वाहन कीमतों में वृद्धि की घोषणा की थी. 180 अरब डॉलर के टाटा समूह का हिस्सा टाटा मोटर्स भारत की प्रमुख कमर्शियल और पैसेंजर वाहन निर्माता कंपनियों में शामिल है. कंपनी का परिचालन भारत और दक्षिण कोरिया में है तथा अफ्रीका, मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और सार्क देशों के बाजारों में भी उसकी मौजूदगी है.
ये भी पढे़ं: यूपीआई एमडीआर बदलाव में सुरक्षा और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाना जरूरी: सीआईआई अध्यक्ष
Input: IANS
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की नींव रखी जा चुकी है, अब इसे तेजी से आगे बढ़ाने का समय है: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की नींव रखी जा चुकी है और अब इस उद्योग को अगले स्तर तक ले जाने का समय आ गया है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा, चाहे सामग्री (मटेरियल्स) हो, मशीनरी हो, नए फैब संयंत्र हों, एटीएमपी इकाइयां हों, डिजाइन हो या प्रतिभा विकास, हमारा प्रयास इन सभी को भारत में विकसित करने का है।
उन्होंने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग छह प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ेगा।
सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ हैं - डिजाइन, मशीनरी और मटेरियल्स, अधिक फैब इकाइयों की स्थापना, एटीएमपी/ओसैट उद्योग को और मजबूत करना, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) तथा प्रतिभा विकास।
अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा, सेमीकॉन 1.0 में हमारे पास बड़ी संख्या में स्टार्टअप्स थे, जो यह देख रहे थे कि चिप डिजाइनिंग कैसे की जा सकती है। इसमें हमें अच्छी सफलता मिली। 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने इसमें भाग लिया और उनमें से लगभग 20 को करीब 800 करोड़ रुपए की वेंचर कैपिटल फंडिंग भी मिली। यह तो सिर्फ शुरुआत थी।
इसके अलावा, इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि इस वर्ष का आयोजन पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक बड़ा है।
उन्होंने कहा, करीब 40,000 प्रतिनिधियों ने पंजीकरण कराया है। प्रदर्शनी में 600 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं। 52 देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो रहे हैं और प्रदर्शनी में भाग लेने वाली 300 से अधिक कंपनियां विदेशी हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि सेमीकंडक्टर निर्माण के गंतव्य के रूप में दुनिया का भारत पर कितना भरोसा बढ़ा है।
सरकार के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 के तहत समर्थित परियोजनाओं की अवधि सामान्य तौर पर छह वर्ष तक होगी, जबकि यह योजना शुरुआती तौर पर तीन वर्ष तक आवेदन के लिए खुली रहेगी।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) इस योजना की नोडल एजेंसी होगी। यह आवेदन आमंत्रित करेगा, तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन करेगा, चयनित आवेदकों की सिफारिश करेगा और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा।
योजना के प्रभाव का आकलन करने और आवश्यकता पड़ने पर इसमें संशोधन या विस्तार पर विचार करने के लिए तीन वर्ष बाद या जरूरत के अनुसार मध्यावधि समीक्षा भी की जाएगी।
इस बीच सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना के सभी छह स्तंभों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। इसे भारत की सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह योजना पहले शुरू किए गए सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की उपलब्धियों को आगे बढ़ाती है और चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, उपकरण, मटेरियल्स, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास सहित पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को वित्तीय और बुनियादी ढांचे का समर्थन प्रदान करेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation








