तानों से स्टारडम तक, कौन हैं चूरू के 12 साल के 'एलियन स्टार'
मोती की कहानी सिर्फ़ करोड़ों व्यूज़ और लाखों फॉलोअर्स की कहानी नहीं है. बल्कि, यह उस बच्चे की कहानी है जिसने अपने ऊपर किए गए मज़ाक़ को अपनी पहचान बना लिया.
चंद्रशेखरन 5 साल और टाटा संस के चेयरमैन रहेंगे:बोर्ड ने कार्यकाल बढ़ाया; पिछले महीने नोएल टाटा से मतभेद के चलते इस्तीफा दिया था
टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 2032 तक बढ़ा दिया गया है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को 5 साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन को दोबारा अपॉइंट करने को चुनौती दे सकते हैं। अभी चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था। तब उनके तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। ग्रुप में पहली बार रिटायरमेंट उम्र से आगे कार्यकाल बढ़ाया टाटा ग्रुप में पहली बार ऐसा हुआ है जब कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव स्टैंडर्ड रिटायरमेंट उम्र से आगे अपने पद पर बना रहेगा। टाटा ग्रुप की पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव को आमतौर पर 65 की उम्र में रिटायर हो जाना चाहिए। हालांकि, नॉन एग्जीक्यूटिव रोल में वे 70 साल की उम्र तक रह सकते हैं। चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। दूसरे टर्म के खत्म होने पर फरवरी 2027 में वे ठीक 65 साल के हो जाएंगे। अब 2032 में 70 साल की उम्र में वे रिटायर होंगे। चंद्रशेखरन पहली बार अक्टूबर 2016 में टाटा सन्स के बोर्ड में शामिल हुए थे, चार महीने बाद जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1987 में TCS में इंटर्न के तौर पर की थी। चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू ₹16.24 लाख करोड़ पहुंचा चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा। टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क जानिए ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… टाटा-संस को 3 साल में IPO लाना ही होगा: RBI ने शेयर मार्केट में लिस्ट न होने की अर्जी खारिज की, छोटे निवेशकों को मौका मिलेगा टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को 3 साल में अपना IPO लाना ही होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने टाटा संस की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी का दर्जा छोड़ने की मांग की थी। टाटा संस ने 2024 में ₹21,813 करोड़ का अपना सारा कर्ज चुका दिया था। कंपनी का कहना था कि अब उस पर कोई कर्ज नहीं है, इसलिए उसे NBFC की कैटेगरी से बाहर किया जाए, लेकिन RBI ने इस मांग को नहीं माना। पूरी खबर पढ़ें…
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