Responsive Scrollable Menu

DU छात्र संघ चुनाव-CJP प्रोटेस्ट के बाद पहला जेन-जी इलेक्शन:सत्य निकेतन हॉस्टल हादसा बड़ा मुद्दा; स्टूडेंट्स बोले- हॉस्टल और छात्राओं की सुरक्षा सबसे जरूरी

“लग्जरी गाड़ियों का काफिला नारेबाजी के साथ आता है। उसमें से उतरते ही नेताजी के गले में मालाओं का ढेर लग जाता है। बैकग्राउंड में पटाखे छूट रहे हैं। गाड़ियों की छत पर खड़े समर्थक नारेबाजी कर रहे हैं। ढोल-नगाड़ों की आवाज के बीच हवा में पर्चे और फूल उछाले जा रहे हैं। एक के जाते ही दूसरी पार्टी का उम्मीदवार आ रहा है।” ये नजारा सुनने में किसी विधायकी या सांसदी के चुनाव का लगता है, लेकिन ये दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के लिए हो रहे चुनाव प्रचार का सीन है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में 18 सितंबर को छात्र संघ (DUSU) चुनावों के लिए वोटिंग होनी है। 16 सितंबर को शाम 5 बजे इसके लिए चुनाव प्रचार थम गया। नतीजे 19 सितंबर को आएंगे। DUSU का चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि जंतर मंतर पर हुए CJP के बड़े प्रोटेस्ट के बाद पहली बार कोई छात्र संघ का चुनाव हो रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2 कैंपस, इनमें 91 कॉलेज, चुनाव 52 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में दो कैंपस हैं। साउथ और नॉर्थ कैंपस लगभग 15 किमी की दूरी पर बने हैं। दोनों कैंपस मिलाकर DU में 91 कॉलेज आते हैं, लेकिन DUSU के चुनावों में DU के सभी कॉलेज वोट नहीं कर सकते हैं। DUSU में सिर्फ 52 कॉलेज और फैकल्टी ही सीधे तौर पर वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। सेंट स्टीफंस, लेडी श्री राम और जीसस एंड मैरी जैसे कुछ बड़े कॉलेज भी DUSU का हिस्सा नहीं हैं। मुद्दे जो स्टूडेंट्स के बीच चर्चा में… CJP प्रोटेस्ट के बाद हो रहे GenZ वोटरों के इन छात्र संघ चुनावों में स्टूडेंट्स के क्या मुद्दे हैं? सत्य निकेतन पीजी हादसे का चुनावों पर क्या असर हुआ है? पिछले चुनावों से इस बार DUSU किस तरह अलग है? यही सब जानने के लिए DU के अलग-अलग कॉलेज में दैनिक भास्कर ने छात्रों और कैंडिडेट्स से बात की। साउथ कैंपस: सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा, कहा- बाहरी लोग बंद हों छात्रों के मुद्दे समझने के लिए सबसे पहले हम साउथ कैंपस पहुंचे। प्रचार के शोर-शराबे में आम छात्र साफ असहज दिखाई दे रहे थे। विशेषकर लड़कियां बाहर से आ रहे लोगों से नाखुश नजर आईं। PGDAV कॉलेज में BA इंग्लिश ऑनर्स थर्ड ईयर की अनन्या का मानती हैं कि महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। अन्नया की क्लासमेट हर्षिता चौधरी कॉलेज में साफ-सफाई को एक बड़ा मुद्दा मानती हैं। वे कहती हैं कि छात्र संघ जीतने के बाद कोई काम नहीं करता और चुनाव प्रचार का तरीका सालों से नहीं बदला है। बड़ी गाड़ियां, भीड़ के चलते दिक्कत होती है। चुनाव में बाहरी लोगों से होने वाली समस्याओं को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। हर्षिता मानती हैं कि प्रचार का तरीका बदला जाना जरूरी है। साउथ कैंपस के PGDAV कॉलेज में BA प्रोग्राम सेकंड ईयर की हिमांशी भी चुनाव प्रचार से पढ़ाई डिस्टर्ब होने का मुद्दा उठाती हैं। साथ ही वे कहती हैं कि सत्य निकेतन में पीजी की इमारत गिरने जैसे मुद्दों पर छात्रों को इन मुद्दों पर एकजुट होना चाहिए। शहीद भगत सिंह कॉलेज में BCom ऑनर्स के छात्र चिन्मय सिंह भी चुनाव प्रचार के तरीकों को सही नहीं मानते। वे कहते हैं कि बहुत प्रदूषण और शोरगुल से क्लास में भारी दिक्कत होती है। वे कैंटीन और दो क्लास के बीच में बड़े गैप से परेशान हैं। चिन्मय की तरह PGDAV कॉलेज में BSc कंप्यूटर साइंस फर्स्ट ईयर के छात्र आलोक भी अचानक क्लास कैंसिल होने की समस्या से जूझ रहे हैं। चिन्मय और आलोक दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि डीयू में हॉस्टल न होने के कारण छात्रों को पीजी और ब्रोकरों को 12-14 हजार रुपए हर महीने देने पड़ते हैं। आलोक का कहना है कि पीजी हादसों को देखकर यूनिवर्सिटी को या तो मुआवजा देना चाहिए या अपने मान्यता प्राप्त हॉस्टल बनाने चाहिए। साउथ कैंपस में रह रहे एक और प्रेशर BCom ऑनर्स के संजय को कॉलेज में सब कुछ औसत ही लगता है। वे चाहते हैं कि फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर में और सुधार किया जाए। चुनाव पर वे मानते हैं कि छात्रों के मुद्दे उठाए जाते हैं, लेकिन इनपर काम नहीं होता। नॉर्थ कैंपस का हाल: महंगे पीजी, बिजली का बिल और हॉस्टल की भारी कमी DU के ज्यादातर नामी-गिरामी कॉलेज नॉर्थ कैंपस में ही हैं। इसमें मिरांडा, सेंट स्टीफंस, हंसराज जैसे कॉलेज का नाम आता है। साउथ की तरह नॉर्थ कैंपस में भी इस बार हॉस्टल की मांग ही सबसे बड़ा मुद्दा है। श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में BA इको ऑनर्स फर्स्ट ईयर के छात्र वैष्णव सेठ हॉस्टल न मिलने की वजह से PG में रह रहे हैं। वे बताते हैं कि विजय नगर जैसे इलाके में एक कमरे (डबल शेयरिंग) का किराया 30 हजार रुपए है, यानी एक छात्र पर 15 हजार रुपए महीने का बोझ आता है। वे आगे कहते हैं, "किराए के ऊपर से 15 रुपए प्रति यूनिट बिजली का बिल देना पड़ता है। कॉलेज की पूरे साल की फीस 30-40 हजार होती है, लेकिन पीजी का खर्च एजुकेशन को बहुत महंगा बना रहा है। क्लास की बेतरतीब टाइमिंग सुबह 8 बजे के बाद सीधे दोपहर 2 बजे क्लास के चलते छात्रों का पूरा दिन बर्बाद होता है।” रामजस कॉलेज में MA पॉलिटिकल साइंस लास्ट ईयर के छात्र चंदन कुमार का भी यही दर्द है। उनका कहना है कि पिछले 20-25 सालों से प्रशासन और छात्र संघ ने हॉस्टल के नाम पर सिर्फ वादे किए हैं। फैकल्टी ऑफ आर्ट्स फिलॉसफी विभाग की शालिनी नॉर्थ कैंपस में महिला सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा मानती हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े कैंपस में बिना किसी चेकिंग के कोई भी बाहरी व्यक्ति घुस आता है। चुनाव के दौरान तो इन्फ्लुएंसर और बाहरी लोग धड़ल्ले से अंदर आ जाते हैं, जिससे छात्राएं असुरक्षित महसूस करती हैं। अब कैंडिडेट्स की बात ABVP कैंडिडेट बोले- हॉस्टल ही हमारा सबसे बड़ा मुद्दा BJP के छात्र विंग ABVP ने इस बार प्रेसिडेंट पद के लिए यश डबास को टिकट दिया है। छात्र राजनीति में कदम रखने से पहले वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी रह चुके हैं। यश ने DU के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। फिलहाल वे DU के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग MA कर रहे हैं। यश भी मानते हैं कि हॉस्टल इस बार एक बड़ा मु्द्दा है। वे बताते हैं कि उनका मुद्दा है कि हर एक छात्र को हॉस्टल मिले और हर कॉलेज में लड़कियों के लिए अलग से हॉस्टल हो। सत्यनिकेतन हादसे को प्रशासन की लापरवाही बताते हुए यश कहते हैं, “प्रशासन की लापरवाही के कारण ही छात्रों की जान चली गई, जबकि मैंने एक साल पहले ही अपने पॉडकास्ट में ऐसी इमारतों के गिरने की आशंका जताई थी। हम छात्रों को भरोसा दिलाते हैं कि पावर में आते ही सबसे पहले हर पीजी और हॉस्टल का 'सेफ्टी ऑडिट' करवाएंगे और उसकी रिपोर्ट सबके सामने रखेंगे।" NSUI का कैंपेन हॉस्टल, किराया और महिला सुरक्षा पर फोकस कांग्रेस के छात्र विंग NSUI ने इस बार विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष पद के लिए उतारा है। वे DU के बौद्ध अध्ययन विभाग MA कर रहे हैं। वे कहते हैं कि इस चुनाव में होस्टल, किराया और महिला सुरक्षा पर ही उनका फोकस है। वे आरोप लगाते हैं कि ABVP ने छात्रों के साथ धोखा किया है। वे आगे कहते हैं, “हमारे तीन सबसे बड़े मुद्दे हैं, हॉस्टल्स की कमी, प्राइवेट पीजी का मनमाना किराया रोकने के लिए रेंट कंट्रोल एक्ट लागू करवाना, और छात्राओं के लिए मेन्स्ट्रुअल लीव की व्यवस्था कराना। सबसे बड़ी बात है 'मेट्रो कंसेशन पास' होना चाहिए। ABVP पिछले 15 सालों से इसका वादा कर रही है, लेकिन इस बार तो उन्होंने इसे अपने मेनिफेस्टो से ही हटा दिया।" विजय जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का जिक्र भी करते हैं। वे कहते हैं कि इसका असर इन चुनावों में दिख रहा है। वहां लाठियां खाने वाले और पैलेट गन का सामना करने वाले NSUI के छात्र भी थे। वे कहते हैं कि मैंने खुद लाठियां खाईं, इसीलिए इस बार युवाओं में जो जोश है, उसका नतीजा 19 तारीख को दिखेगा। लेफ्ट (AISA-SFI) कैंडिडेट चुनाव प्रचार के तरीके से नाखुश DUSU चुनाव में इस बार वामपंथी छात्र संगठनों AISA और SFI ने अध्यक्ष पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर अनन्‍या को मैदान में उतारा है। अन्नया इस बार अध्यक्ष पद की इकलौती महिला उम्मीदवार हैं। अनन्या मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। वह DU के PGDAV कॉलेज की छात्रा हैं। अन्नया चुनाव में धनबल, बाहुबल और महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा मानती हैं। अनन्या दावा करती हैं कि उनका चुनाव प्रचार बाकी पार्टियों की गुंडागर्दी वाली राजनीति से एकदम अलग है। अनन्या कहती हैं, "इन्हीं की थार और डिफेंडर सुबह 'भैया-भैया' की पॉलिटिक्स करती हैं और शाम को कैट-कॉलिंग और लड़कियों से छेड़खानी करती हैं। ये लोग धड़ल्ले से महिला कॉलेजों के गेट तोड़कर अंदर घुस जाते हैं, जबकि हम क्लास में जाने से पहले टीचर्स से परमिशन मांगते हैं।" वे आरोप लगाती हैं कि DU में सिर्फ पैसे, पावर और गुटबाजी की राजनीति चल रही है। अन्नया कहती हैं कि ABVP और NSUI ने छात्रों के असली मुद्दों को भुला दिया है। 97% छात्रों को आज तक हॉस्टल नहीं मिला है। अपने चुनावी वादों पर वे आगे कहती हैं, “सभी महिला कॉलेजों को DUSU का हिस्सा बनाया जाए और हर कॉलेज में एक 'फंक्शनल ICC' (शिकायत समिति) हो, ताकि लड़कियों को पता हो कि किसी भी तरह की परेशानी या छेड़खानी होने पर उन्हें किसके पास जाना है।"

Continue reading on the app

TMC सिंबल पर आज फैसला ले सकता है चुनाव आयोग:दोनों गुटों को बैठक के लिए बुलाया; 6 अक्टूबर को बंगाल की दो सीटों पर उपचुनाव

चुनाव आयोग गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर आज अंतरिम आदेश दे सकता है। दोनों गुटों ने एक ही चिह्न पर उम्मीदवार उतारे हैं। आयोग ने दिल्ली में दोनों गुटों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव हैं। आयोग ने दोनों गुटों को गुरुवार की बैठक में मौजूद रहने को कहा है। चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों गुटों ने नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं। दोनों ने तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘घास पर दो फूल’ का इस्तेमाल किया है। रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC धड़े से मोहम्मद एतेशामुल हक नंदीग्राम और सफीउद्दीन शेख रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, पूर्व सीएम ममता बनर्जी की TMC ने रविवार को नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार घोषित किया गया था। नंदीग्राम TMC और भाजपा, दोनों के लिए अहम सीट नंदीग्राम लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2021 में ममता ने यहीं से बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। अधिकारी BJP में शामिल होने के बाद TMC के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया। अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई। TMC में संगठन और पार्टी के नाम पर संकट उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। पार्टी के नाम और दो फूल-घास वाले चुनाव चिन्ह को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुट आमने-सामने हैं। दोनों गुटों ने पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और फंड पर दावा किया है। चुनाव आयोग ने शनिवार को दोनों पक्षों से बातचीत की, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। ऋतब्रत गुट ने कहा है कि वह TMC के नाम और चिन्ह पर दावा जारी रखेगा। आयोग के फैसले के बिना नामांकन की समयसीमा खत्म होने पर वह निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर भी चुनाव लड़ सकता है। 4 राज्यों में उपचुनाव तमिलनाडु में 2 सीट: मदुरांतकम और धारापुरम- ये दोनों विधानसभा सीटें मरागथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। दोनों सीटों की फाइनल वोटर लिस्ट 23 फरवरी को जारी की गई। पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी सीट: यह सीट एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। सीट की मतदाता सूची 14 फरवरी को पब्लिश हुई। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर-नंदीग्राम सीट: रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर और नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई। इन सीटों की अंतिम वोटर लिस्ट 28 फरवरी को जारी की गई। असम की नगांव लोकसभा सीट: असम की नागांव लोकसभा प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को जारी की गई थी। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… TMC सांसदों की अयोग्यता पर समयसीमा में फैसला लें स्पीकर:सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया सुप्रीम कोर्ट ने TMC के 20 सांसदों की अयोग्यता पर कार्यवाही तय समयसीमा में करने की बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

Continue reading on the app

  Sports

अजीत अगरकर के भविष्य से लेकर रांची टेस्ट तक, जानें बीसीसीआई एजीएम की 5 बड़ी बातें

BCCI AGM 5 Big Points: बीसीसीआई की सालाना आम बैठक के बाद सचिव देवजीत सैकिया ने कई बड़े मुद्दो पर स्थिति स्पष्ट की. मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर का कार्यकाल 4 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है, लेकिन उनके भविष्य को लेकर फिलहाल सस्पेंस बरकरार है. सैकिया ने कहा कि अगले 15 दिनों में इस पर उचित फैसला लिया जाएगा. इसके अलावा, उन्होंने रांची में होने वाले बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी टेस्ट का वेन्यू बदलने की खबरों को खारिज किया और सुब्हदीप घोष को अस्थायी फील्डिं कोच नियुक्त करने की जानकारी दी. Fri, 18 Sep 2026 23:05:34 +0530

  Videos
See all

News Ki Pathshala: जनता ने दी मात.. अब अपनों में घमासान ! | Election Commission | Mamata Banerjee #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-18T18:05:19+00:00

क्या यूपी के लोग पुराना 'जंगलराज' भूल चुके हैं? Poochta Hai Bharat With Arnab | CM Yogi Vs Akhilesh #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-18T18:07:29+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers