SEMICON India 2026: BRICS डिक्लेरेशन का सर्वसम्मति से पारित होना वैश्विक विश्वास का प्रतीक - पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेन्शन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'सेमीकॉन इंडिया 2026' का फीता काटकर भव्य शुभारंभ किया। 'सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम' विषय पर आधारित इस वैश्विक सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक उपलब्धियों, सेमीकंडक्टर क्षेत्र की प्रगति और हालिया कूटनीतिक सफलताओं पर विस्तार से अपनी बात रखी।
BRICS न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन पर सर्वसम्मति वैश्विक विश्वास का प्रमाण
सेमीकॉन इंडिया के उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए 2026 के BRICS शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को सभी सदस्य देशों द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया है। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच जारी भू-राजनीतिक गतिरोध के बावजूद पूरी रात चली वार्ता के बाद भारत ने इस ऐतिहासिक घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने में सफलता पाई, जो वैश्विक मंच पर भारत की मध्यस्थता और नेतृत्व क्षमता पर दुनिया के अटूट विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
चुनौतियों के दौर में भी भारत ने हासिल की 7.8% की GDP ग्रोथ
देश के आर्थिक प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सितंबर माह में जारी तिमाही जीडीपी रिपोर्ट में भारत ने कठिन वैश्विक परिस्थितियों और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद 7.8 प्रतिशत की मजबूत विकास दर दर्ज की है। इसके अलावा, इसी समयावधि में जापान की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की sovereign रेटिंग को अपग्रेड किया गया है, जो देश के मजबूत आर्थिक आधार और निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट और भविष्य की तकनीकों पर जोर
सितंबर महीने की अन्य प्रमुख तकनीकी और आर्थिक गतिविधियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट' में एजेंटिक AI, टोकेनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए समावेशी वित्त पोषण पर गहन विचार-विमर्श हुआ। भारत आज नई पीढ़ी की तकनीकों को अपनाकर वित्तीय सशक्तिकरण को नई दिशा दे रहा है।
विश्वकर्मा जयंती और PM विश्वकर्मा योजना का अद्वितीय संगम
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों को विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा जयंती के साथ 'पीएम विश्वकर्मा योजना' का यह संयोग भारत की सदियों पुरानी निर्माण व सृजन की परंपरा को 21वीं सदी की आधुनिक तकनीक और दूरदर्शी दृष्टि के साथ जोड़ने का कार्य कर रहा है। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का यह विस्तार भारत को एक नई औद्योगिक क्रांति की ओर ले जा रहा है।
EPFO के नए बदलाव के बाद इन-हैंड सैलरी पर कितना पड़ेगा असर? समझें पूरा हिसाब
Explainer: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़े कर्मचारियों के लिए सितंबर 2026 में बड़ा बदलाव हुआ है. केंद्र सरकार ने EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 प्रति माह करने को मंजूरी दी है. नई सीमा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी. सरकार के मुताबिक, इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं.
इस फैसले का असर सिर्फ नए कर्मचारियों के PF खाते तक सीमित नहीं है. जिन कर्मचारियों का वेतन नई सीमा के दायरे में आता है, उनके लिए EPF, EPS और EDLI जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच बढ़ेगी. हालांकि, दूसरी तरफ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि अगर PF योगदान बढ़ता है तो हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी कितनी कम हो सकती है?
आइए आसान उदाहरण से पूरा गणित समझते हैं...
पहले समझें क्या है EPFO की Wage Ceiling?
EPFO की Wage Ceiling वह वेतन सीमा है जिसके आधार पर कर्मचारी को EPF व्यवस्था में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाता है, लागू नियमों और पात्रता के अधीन.
सितंबर 2014 में यह सीमा 15,000 रुपए प्रति माह की गई थी. इसके बाद करीब 12 साल तक इसमें बदलाव नहीं हुआ. अब इसे बढ़ाकर 25,000 रुपए किया गया है. सरकार के मुताबिक यह बदलाव बढ़ती मजदूरी, आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
इसका सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनकी मासिक वेतन राशि 15,000 से अधिक लेकिन 25,000 रुपए तक है और जो पहले केवल इस सीमा के कारण अनिवार्य EPFO कवरेज में नहीं आते थे.
25,000 बेसिक+DA वाले कर्मचारी का उदाहरण
मान लीजिए किसी कर्मचारी की PF गणना के लिए मान्य मासिक वेतन 25,000 है और कर्मचारी एवं नियोक्ता दोनों का योगदान 12 प्रतिशत के हिसाब से किया जा रहा है.
पुरानी 15,000 रुपए की सीमा के आधार पर कर्मचारी का योगदान होता था:
15,000 × 12% = 1,800 प्रति माह
नई 25,000 की सीमा पर:
25,000 × 12% = 3,000 प्रति माह
यानी कर्मचारी के हिस्से से PF में जाने वाली राशि में:
3,000 - ₹1,800 = 1,200 प्रति माह की बढ़ोतरी हो सकती है.
इसका मतलब है कि अन्य सभी वेतन घटक समान रहने पर कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी 1,200 तक कम हो सकती है, क्योंकि यह राशि अब भविष्य निधि में चली जाएगी.
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है वास्तविक इन-हैंड सैलरी पर असर कर्मचारी के वेतन ढांचे, CTC और कंपनी की PF गणना पद्धति पर निर्भर कर सकता है. इसलिए हर कर्मचारी के लिए 1,200 की बिल्कुल समान कटौती मान लेना सही नहीं होगा.
कंपनी का योगदान भी बढ़ेगा
PF सिर्फ कर्मचारी के पैसे से नहीं बनता. सामान्य व्यवस्था में नियोक्ता भी योगदान करता है.
15,000 की सीमा पर 12 प्रतिशत योगदान:
15,000 × 12% = 1,800
25,000 की सीमा पर:
25,000 × 12% = 3,000
यानी नियोक्ता के योगदान में भी 1,200 प्रति माह की बढ़ोतरी का गणित बनता है, जहां पूरा 12 प्रतिशत योगदान लागू हो.
इस तरह कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को मिलाकर संबंधित फंड में जाने वाली कुल राशि:
पुरानी सीमा: 1,800 + 1,800 = 3,600
नई सीमा: 3,000 + 3,000 = 6,000 हो सकती है.
यानी इस उदाहरण में कुल योगदान 2,400 प्रति माह बढ़ता है.
लेकिन पूरा 3,000 EPF खाते में नहीं जाएगा
यहां सबसे जरूरी अंतर EPF और EPS के बीच है.
नियोक्ता के 12 प्रतिशत हिस्से का एक भाग कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS में जाता है और बाकी हिस्सा EPF में रहता है. इसलिए यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि नियोक्ता के पूरे 3,000 सीधे EPF खाते में जमा होंगे.
परंपरागत EPS व्यवस्था में नियोक्ता के हिस्से का 8.33 प्रतिशत EPS की ओर जाता है, जबकि शेष हिस्सा EPF में जाता है, लागू नियमों और पात्रता के अधीन. EPFO के आधिकारिक दस्तावेज भी EPS में नियोक्ता के 8.33 प्रतिशत योगदान का उल्लेख करते हैं.
EPS में कितना पैसा जाएगा?
15,000 की सीमा पर 8.33 प्रतिशत का हिसाब:
15,000 × 8.33% = 1,250
यही वजह है कि पुरानी व्यवस्था में EPS के लिए लगभग 1,250 की अधिकतम मासिक राशि का आंकड़ा सामने आता था.
नई 25,000 सीमा पर समान दर से गणना करें तो:
25,000 × 8.33% = 2,082.50
यानी गणितीय रूप से EPS में जाने वाली राशि करीब 2,083 प्रति माह हो सकती है, हालांकि वास्तविक क्रेडिट लागू EPFO नियमों, पात्रता और योगदान व्यवस्था के अनुसार होगा.
इससे यह समझना जरूरी है कि वेज सीलिंग बढ़ने से EPS योगदान बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे हर कर्मचारी की भविष्य की पेंशन अपने आप 833 प्रति माह बढ़ जाएगी ऐसा कहना सही नहीं होगा. पेंशन की अंतिम राशि सेवा अवधि, पेंशन योग्य वेतन और लागू EPS नियमों पर निर्भर करती है.
रिटायरमेंट फंड पर क्या होगा असर?
कर्मचारी की नजर से देखें तो अधिक योगदान का मतलब है कि हर महीने खर्च करने के लिए उपलब्ध पैसा कुछ कम हो सकता है. लेकिन दूसरी तरफ उसी राशि का बड़ा हिस्सा कर्मचारी के नाम पर सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट से जुड़े फंड में जमा होता है.
यानी इसे दो हिस्सों में समझा जा सकता है
आज: इन-हैंड सैलरी में संभावित कमी
भविष्य: EPF बचत और लागू नियमों के तहत पेंशन सुरक्षा में संभावित बढ़ोतरी
इसलिए कर्मचारी के लिए यह सिर्फ सैलरी कटने का मामला नहीं है, बल्कि वर्तमान आय और भविष्य की बचत के बीच संतुलन का सवाल भी है.
EDLI बीमा का क्या होगा?
EPFO के तहत सिर्फ PF और पेंशन ही नहीं, बल्कि Employees Deposit Linked Insurance Scheme यानी EDLI भी सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा है.
सरकार ने नई व्यवस्था के तहत EPF, EPS और EDLI तक व्यापक पहुंच की बात कही है. यानी नई वेतन सीमा के दायरे में आने वाले पात्र कर्मचारियों को इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकता है.
हालांकि EDLI की वास्तविक बीमा राशि और उसकी गणना को केवल नई 25,000 वेतन सीमा से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा. इसके लिए लागू EDLI नियम और अधिकतम लाभ सीमा देखना जरूरी है.
51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा कवरेज
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनकी कमाई 15,000 रुपए से ऊपर थी और वे केवल मौजूदा वेतन सीमा के कारण अनिवार्य EPFO कवरेज से बाहर रह जाते थे.
सरकार का अनुमान है कि 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आएंगे. इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा आधारित सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच मिलेगी.
सरकार पर भी बढ़ेगा खर्च
वेज सीलिंग बढ़ाने का असर सिर्फ कर्मचारियों और कंपनियों तक सीमित नहीं है. सरकार ने बताया है कि इस बदलाव के कारण केंद्र सरकार पर अनुमानित 11,339 रुपए करोड़ का अतिरिक्त वार्षिक व्यय आएगा. पांच साल की अवधि में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपए बताया गया है. यानी सरकार ने इसे व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने वाली व्यवस्था के रूप में लागू किया है.
किन कर्मचारियों को सबसे ज्यादा समझना चाहिए यह बदलाव?
इस बदलाव को समझने के लिए तीन स्थितियां अलग-अलग देखना जरूरी है.
पहली स्थिति: जिन कर्मचारियों की PF गणना योग्य वेतन 15,000 से कम है, उनके लिए सिर्फ Wage Ceiling बढ़ने से जरूरी नहीं कि योगदान में कोई बड़ा बदलाव हो.
दूसरी स्थिति: जिनकी गणना योग्य वेतन 15,000 से 25,000 के बीच है और वे पहले अनिवार्य कवरेज से बाहर थे, उनके लिए यह बदलाव खास महत्व रखता है.
तीसरी स्थिति: जिन कर्मचारियों का वेतन 25,000 से अधिक है, उनके मामले में यह देखना जरूरी होगा कि उनकी EPF सदस्यता और योगदान किस व्यवस्था के तहत है. नई 25,000 सीमा का अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी की पूरी सैलरी पर अपने आप 12 प्रतिशत PF कटने लगेगा.
जेब में कम, भविष्य के लिए ज्यादा बचत
EPFO की वेज सीलिंग को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 करना सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाता है. सरकार के अनुसार इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य कवरेज में आ सकते हैं और EPF, EPS के साथ EDLI तक उनकी पहुंच बढ़ेगी.
25,000 के उदाहरण में कर्मचारी का अपना योगदान 1,800 से बढ़कर 3,000 हो सकता है, यानी इन-हैंड सैलरी पर करीब 1,200 का असर पड़ सकता है. साथ ही नियोक्ता का योगदान भी बढ़ने से कर्मचारी के लिए रिटायरमेंट से जुड़ी कुल बचत में वृद्धि हो सकती है.
लेकिन वास्तविक वेतन पर्ची में कितना बदलाव आएगा, यह कर्मचारी के Basic+DA, CTC, PF विकल्प, सदस्यता की स्थिति और लागू EPFO नियमों पर निर्भर करेगा.
इसलिए नई व्यवस्था को केवल “सैलरी कम होने” या केवल “PF बढ़ने” के नजरिए से देखना अधूरा होगा. असल बदलाव यह है कि कर्मचारी की मौजूदा खर्च करने योग्य आय और भविष्य की सामाजिक सुरक्षा के बीच योगदान का संतुलन अब नई 25,000 सीमा के आधार पर बदलेगा.
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