CM Yogi on Encephalitis: 75 जिलों में 85 मेडिकल कॉलेज, इंसेफेलाइटिस पर योगी का बड़ा दावा
CM Yogi on Encephalitis: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर में आईएमए के चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन के दौरान कहा कि करीब साढ़े नौ साल पहले पूर्वी यूपी में इंसेफेलाइटिस बड़ी चिंता हुआ करती थी और इसके चलते बच्चों की मौत होती थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. उन्होंने दावा किया कि “माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी खत्म हो गया है” और कहा कि आज लोग नए गोरखपुर और नए उत्तर प्रदेश का दर्शन कर रहे हैं. सीएम ने बताया कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. अधिक जानकारी के लिए देखें पूरा वीडियो-
यूपी विधानसभा 2027 चुनाव से पहले बीजेपी को झटका, पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा सपा में शामिल
Ram Asare Kushwaha: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बीजेपी को एक और सियासी झटका लगा है. दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके राम आसरे कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है. उन्होंने सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है. खास बात यह है कि राम आसरे कुशवाहा करीब 13 साल बाद समाजवादी पार्टी में वापस लौटे हैं.
राम आसरे कुशवाहा की सपा में 13 साल बाद हुई वापसी
जानकारी के अनुसार राम आसरे कुशवाहा का सपा में लौटना ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि राम आसरे के सपा में जाने के बाद पार्टी का कुशवाह वोट बैंक मजबूत होगा. बताया जा रहा है कि उनके बीजेपी छोड़ने और सपा में शामिल होने को आगामी चुनावी तैयारियों के तौर पर देखा जा रहा है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक आसरे का सपा में जाना यूपी में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है.
राम आसरे कुशवाहा का बीजेपी से सपा तक कैसा रहा सियासी सफर?
राम आसरे कुशवाहा ने अपनी पुरानी पार्टी में वापसी की है. राम आसरे कुशवाहा उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. वह यूपी के कद्दावर नेताओं में से एक हैं. उनका लंबा राजनीतिक अनुभव है, जिससे सपा को इससे फायदा मिलेगा. अब जब 2027 विधानसभा चुनाव पास हैं तो सपा को उनके अनुभव से गठबंधन करने में आसानी होगी. बता दें उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी, सपा समेत अन्य राजनीतिक संगठन पार्टी के सामाजिक समीकरण को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं. ऐसे में प्रदेश में नेताओं का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना चुनावी तैयारियों के लिहाज से चर्चा का विषय बन रहा है.
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