Applied Materials भारत में 10 वर्षों में 5 अरब डॉलर करेगी निवेश
सेमीकंडक्टर उपकरण विनिर्माता कंपनी एप्लाइड मैटेरियल्स अगले 10 साल में भारत में पांच अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य भारत के हरित ऊर्जा परिवेश को गति देना और उसे वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ना है। ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ में एप्लाइड मैटेरियल्स के अध्यक्ष (सेमीकंडक्टर प्रॉडक्ट ग्रूप) प्रभु राजा ने कहा कि कंपनी सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग क्षमता केंद्र स्थापित करने वाली शुरुआती कंपनियों में शामिल थी।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हम ‘इंडिया विजन 2035’ की घोषणा कर रहे हैं। अगले दशक में भारत के हरित ऊर्जा परिवेश को गति देने और उसे वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने के लिए हम पांच अरब डॉलर का निवेश करेंगे।’’ राजा ने कहा कि इस कार्यक्रम के तीन प्रमुख स्तंभ- भारत में अपने अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बराबर करना, भारत में परिवेश को गति देना और भारत में भविष्य की प्रतिभाओं का विकास करना शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि 2035 तक एप्लाइड मैटेरियल्स का लक्ष्य भारत में स्थित अपनी आपूर्ति श्रृंखला की क्षमता को 10 गुना बढ़ाना है।
इससे भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए अवसर पैदा होंगे और वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं को भारत लाने में मदद मिलेगी।
बिना सत्यापन असामाजिक तत्व घोषित करने पर Patna High Court सख्त, सरकार पर लगाया 2 लाख का जुर्माना
पटना उच्च न्यायालय ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (बीसीसीए) के तहत दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित कर उनकी आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध संबंधी आदेश रद्द करते हुए कहा कि नालंदा जिला प्रशासन ने उचित सत्यापन के बिना कार्रवाई की थी। अदालत ने राज्य सरकार को दोनों याचिकाकर्ताओं को एक-एक लाख रुपये हर्जाना प्रदान करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने 11 सितंबर के अपने आदेश में मुकदमेबाजी के कारण हुए खर्च की भरपाई के रूप में दोनों याचिकाकर्ताओं को 10-10 हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता शशि कुमार उर्फ फुकन और अजय सिंह ने नालंदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) द्वारा उन्हें ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने की संस्तुति के आधार पर शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी। यह संस्तुति वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव और छठ पूजा के दौरान राजगीर के अनुमंडलीय पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि उन्हें आपराधिक मामलों में झूठा फंसाया गया था और वे पहले से ही जमानत पर थे।
अदालत ने कहा, “एसडीपीओ की रिपोर्ट के आधार पर नालंदा के एसपी ने याचिकाकर्ताओं को असामाजिक तत्व घोषित करने की संस्तुति की, जिसके परिणामस्वरूप उनके खिलाफ बीसीसीए वाद संख्या 178/2025 और 183/2025 दर्ज किए गए।” अदालत के अनुसार, मामले दर्ज होने के बाद नालंदा के जिलाधिकारी (डीएम) ने 10 सितंबर, 2025 को दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जिलाधिकारी ने यह कहते हुए कार्रवाई की कि याचिकाकर्ता अपने बचाव में कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं कर सके और उनकी स्वतंत्र आवाजाही से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
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