पेट्रोल पर 1 रुपये तो डीजल पर 5 रुपये की टैक्स कटौती, सरकार ने घटा दी एक्सपोर्ट ड्यूटी, जानिए कीमतों पर क्या असर होगा
Petrol Diesel Tax Cut: सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कटौती की है. इसके बाद लोगों के मन में यही सवाल है कि क्या इस फैसले से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे. पूरा गणित यहां समझ लीजिए.
Vishwakarma Puja 2026: आज है विश्वकर्मा पूजा, जानें सही पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और राहुकाल
Vishwakarma Puja 2026: हर साल की तरह इस बार भी सितंबर का महीना आते ही देश के कारखानों, निर्माण इकाइयों, और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में एक खास उल्लास नजर आने लगा है। ब्रह्मांड के पहले शिल्पी और वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा का जन्मोत्सव यानी विश्वकर्मा पूजा आज गुरुवार, 17 सितंबर को मनाई जा रही है।
क्यों खास है यह पर्व?
अन्य हिंदू त्योहारों की तरह यह पर्व चंद्रमा की तिथियों पर आधारित न होकर सूर्य की गति पर निर्भर करता है। जब सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं (जिसे कन्या संक्रांति कहा जाता है), तब यह पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्य इसी काल में हुआ था। इस दिन श्रमिक, इंजीनियर, शिल्पकार, और व्यापारी वर्ग अपनी मशीनों, कंप्यूटर, वाहनों और रोजमर्रा में काम आने वाले उपकरणों की पूजा कर उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
पूजा के लिए उत्तम समय और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कन्या संक्रांति का क्षण सुबह 7:58 बजे होगा। इस समय से ही पूजा का पुण्य काल प्रारंभ हो जाएगा, जो दोपहर तक रहेगा। आप अपनी सुविधा के अनुसार सुबह के सत्र में या दोपहर के समय निर्धारित चौघड़िया व शुभ बेला में अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं।
राहुकाल: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 17 सितंबर को दोपहर के वक्त राहुकाल रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार की नई पूजा या मांगलिक शुरुआत करने से बचना चाहिए।
पूजा विधि
- सफाई और शुद्धि: पर्व के दिन प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर अपने कार्यक्षेत्र, दुकान या कारखाने की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। कोने-कोने में गंगाजल छिड़ककर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।
- चौकी की स्थापना: एक साफ लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति सुशोभित करें।
- कलश पूजन: जल से भरा कलश स्थापित करें, जिस पर रोली से स्वास्तिक बनाकर कलावा बांधा गया हो।
- उपकरणों का शृंगार: कारखाने की मशीनों, ऑफिस के लैपटॉप, गाड़ियों या कामगारों के औजारों को साफ कर उन पर कुमकुम, हल्दी और अक्षत का तिलक लगाएं। साथ ही पुष्प और कलावा अर्पित करें।
- नैवेद्य व आरती: भगवान को फल, मिठाई और विशेष रूप से मौसमी चीजों का भोग लगाएं। अंत में धूप-दीप जलाकर सामूहिक रूप से आरती करें और व्यवसाय में तरक्की की प्रार्थना करें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है
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