परीक्षा के तनाव से लेकर अंतरिक्ष की उड़ान तक, जानिए कैसे पीएम मोदी बने देश के Gen Z की पहली पसंद
PM Modi 76th Birthday: भारत की कुल आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा है और यही युवा पीढ़ी देश को आगे ले जाने वाली सबसे बड़ी ताकत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ताकत को बहुत पहले ही पहचान लिया था. यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में उनके कामकाज के तौर-तरीकों में युवाओं के साथ एक गहरा और आत्मीय नाता साफ नजर आता है. यह रिश्ता केवल औपचारिक सम्मेलनों या बड़े भाषणों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आमने-सामने की बातचीत और जमीनी स्तर पर बनाई गई नीतियों में भी पूरी तरह झलकता है. चाहे स्कूल के बच्चों से परीक्षा की घबराहट दूर करनी हो, कॉलेज के छात्रों को करियर के लिए तैयार करना हो या फिर नए स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं की पीठ थपथपानी हो, प्रधानमंत्री हर मोड़ पर युवा सपनों के साथी बनकर सामने आते हैं.
सीधा संवाद और परीक्षा का तनाव दूर करने की अनोखी पहल
प्रधानमंत्री और छात्रों के रिश्ते की सबसे सुंदर मिसाल परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम है. कुछ साल पहले शुरू हुआ यह कार्यक्रम अब हर साल का एक बड़ा उत्सव बन चुका है. इसमें प्रधानमंत्री किसी शिक्षक या नेता की तरह नहीं, बल्कि परिवार के एक बड़े बुजुर्ग या मार्गदर्शक की तरह बच्चों से बात करते हैं. वे छात्रों को समझाते हैं कि जीवन में अंकों से ज्यादा अनुभव और सीखने की लगन मायने रखती है. इस संवाद का असर इतना गहरा हुआ है कि वर्ष 2026 में इसमें शामिल होने के लिए साढ़े चार करोड़ से भी ज्यादा पंजीकरण हुए. इसके साथ ही वे सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर युवाओं की पसंदीदा भाषा और तरीके से संवाद करते हैं. जब वे किसी यात्रा में मेट्रो या ट्रेन में आम युवाओं के पास जाकर बैठ जाते हैं, तो वह दृश्य बताता है कि वे देश की नई पीढ़ी की सोच को सीधे उन्हीं की जुबानी सुनना चाहते हैं.
शिक्षा और मेडिकल सीटों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
बात केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सरकार के नीतिगत फैसलों में भी युवाओं की भलाई सबसे ऊपर रखी गई है. साल 2020 में लाई गई नई शिक्षा नीति ने पुरानी रटंत प्रणाली को बदलकर छात्रों को अपनी पसंद के विषय चुनने की आजादी दी. इसके साथ ही देश में उच्च और मेडिकल शिक्षा का अभूतपूर्व विस्तार किया गया है. साल 2014 के दौर में देश के अंदर एमबीबीएस की केवल 51,348 सीटें उपलब्ध थीं, जिन्हें लगातार नए मेडिकल कॉलेज खोलकर 2026 तक 1,39,864 तक पहुंचा दिया गया. इसी तरह पोस्टग्रेजुएट स्तर की मेडिकल सीटें भी 31,185 से बढ़कर 86,360 के पार पहुंच चुकी हैं. इस बड़े बदलाव की वजह से हजारों प्रतिभाशाली छात्रों को देश में ही रहकर डॉक्टर बनने का मौका मिल रहा है.
स्कूल स्तर पर नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा
बच्चों के भीतर वैज्ञानिक सोच और कुछ नया रचने का जज्बा पैदा करने के लिए देशभर के स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स का एक मजबूत नेटवर्क खड़ा किया गया है. जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक देश के विभिन्न हिस्सों में दस हजार से अधिक ऐसी लैब्स बनाई जा चुकी हैं. इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से एक करोड़ दस लाख से ज्यादा स्कूली छात्र रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग और कोडिंग जैसी आधुनिक विधाओं को बहुत कम उम्र में सीख रहे हैं. इससे आने वाले कल के लिए ऐसे वैज्ञानिक और उद्यमी तैयार हो रहे हैं जो देश की समस्याओं का समाधान तकनीक के जरिए तलाशेंगे.
रोजगार मेलों से सरकारी सेवाओं में पारदर्शी अवसर
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए केंद्र सरकार ने रोजगार मेलों की एक खास व्यवस्था तैयार की. दस लाख खाली पदों को भरने के संकल्प के साथ शुरू हुए इस अभियान ने अपने तय लक्ष्य से भी आगे कदम बढ़ा दिए हैं. इन मेलों के जरिए युवाओं को तय समयसीमा के भीतर नियुक्ति पत्र बांटे जा रहे हैं, जिससे भर्ती प्रक्रिया में न केवल तेजी आई है बल्कि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ी है. समय पर नौकरी मिलने से युवाओं का आत्मविश्वास मजबूत हुआ है और वे पूरी ऊर्जा के साथ राष्ट्र सेवा में जुट रहे हैं.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर का नया दौर
आने वाला समय आधुनिक तकनीक का है और सरकार चाहती है कि भारत का युवा दुनिया में सबसे आगे रहे. इसके लिए इंडिया एआई मिशन के तहत बड़े पैमाने पर काम शुरू किया गया है. युवा एआई फॉर ऑल और एआई लैब्स जैसी योजनाओं के जरिए छोटे शहरों, कस्बों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक के छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके साथ ही सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इन संयंत्रों के लगने से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च तकनीक के क्षेत्र में लाखों नए रोजगार के रास्ते खुल रहे हैं.
अंतरिक्ष और डिजिटल क्रिएटर अर्थव्यवस्था में नई उड़ान
पहले भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था, लेकिन नीतियों में बदलाव कर इसे निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोल दिया गया. साल 2014 में देश में जहां अंतरिक्ष से जुड़ा केवल एक स्टार्टअप था, वहीं आज सैकड़ों निजी स्टार्टअप अपने उपग्रह और रॉकेट तैयार कर रहे हैं. इसके अलावा आज का युवा केवल पारंपरिक नौकरियों तक सीमित नहीं है. गेमिंग, एनीमेशन, पॉडकास्ट और कंटेंट क्रिएशन जैसी डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी सरकार ने पूरा सम्मान और बढ़ावा दिया है. प्रधानमंत्री ने इस क्रिएटर अर्थव्यवस्था के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उन्हें देश के विकास की नई दिशा बताया है.
नशे से आजादी और युवाओं का नेतृत्व
युवा शक्ति को सही दिशा में बनाए रखने के लिए सरकार ने नशे के खिलाफ भी एक बड़ा जनआंदोलन छेड़ा है. अगस्त 2026 में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान की शुरुआत की गई, जो पूरे देश में सौ हफ्तों तक जागरूकता फैलाएगा. इसके साथ ही यंग लीडर्स डायलॉग जैसे कार्यक्रमों के जरिए लोकतंत्र, सतत विकास और आधुनिक खेती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सीधे युवाओं के विचार जाने जा रहे हैं. इन सभी कदमों से साफ जाहिर होता है कि केंद्र सरकार देश की युवा शक्ति को सिर्फ एक मतदाता या दर्शक नहीं, बल्कि आने वाले भारत का असली निर्माता मानती है.
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