Kuno National Park में चीतों की संख्या पहुंची 52, चार वर्षों में जन्मे 32 शावक
मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किये गये चीता परियोजना के सफलतापूर्वक चार वर्ष पूरे होने के बाद यहां चीतों की आबादी अब 52 हो गई है, जिसमें देश में पैदा हुए 32 चीतों की संख्या भी शामिल है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने इस यात्रा को इसलिए याद किया क्योंकि चीतों के पुनर्वास के इस कार्यक्रम को 17 सितंबर को चार साल पूरे होने वाले हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर, 2022 को नामीबिया के आठ जंगली चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में विशेष बाड़ों में छोड़ा था। मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित श्योपुर जिले के इस उद्यान का राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने इसी साल 21 जून को दौरा किया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी यहां चीतों के साथ घड़ियालों को छोड़ने के लिए आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए थे, जिनसे जिले में पर्यटन विकास को गति मिली।
अधिकारियों ने कहा कि जैव विविधता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण इस परियोजना को आज चार वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलो से इस परियोजना की शुरूआत होने के बाद आज देश में चीतों की संख्या 52 हो गई है, जिनमें से 49 चीते श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में तथा तीन चीते गांधी सागर मंदसौर में विचरण कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कूनो का जंगल चीतों के प्रजनन के लिए सकारात्मक रहा है। प्रधानमंत्री की इस सौगात पर 17 सितंबर को सेवा संकल्प अभियान के तहत टिकटोली गेट पर वन विभाग के तत्वाधान में हजारों दीप रोशन कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया जायेगा।’’ उन्होंने कहा कि भारत से विलुप्त हुए चीतों की पुर्नबसावट की इस सफल परियोजना से श्योपुर जिले को विश्वव्यापी पहचान मिली, जिसके अच्छे प्रभाव हमारे सामने आये है।
अधिकारियों ने कहा कि आज श्योपुर जिले को चीतों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जा रहा है और इससे क्षेत्र में न केवल पर्यटन गतिविधियों को मजबूती मिली है, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
PM Modi @ 76: महिलाओं के लिए मोदी सरकार की योजनाओं और चुनौतियों की पूरी कहानी
मोदी सरकार के ‘विकसित भारत @2047’ विजन में महिलाओं की भूमिका को केवल कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी तक सीमित न रखकर उन्हें आर्थिक गतिविधियों, उद्यमिता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में आगे लाने पर जोर दिया गया है. पिछले एक दशक में इस दिशा में कई योजनाएं शुरू हुईं या उनका विस्तार हुआ. लेकिन आंकड़े यह भी बताते हैं कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, रोजगार की गुणवत्ता और बिना वेतन वाले घरेलू काम जैसे मोर्चों पर अभी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
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