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कब करें विश्वकर्मा पूजा, दुकान और घर में कैसे करें विश्वकर्मा पूजा?

Vishwakarma Pooja 2026 Time : 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दिन अत्यंत मंगलकारी रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो व्यापार में वृद्धि और यंत्रों के दीर्घकालिक संचालन के लिए बेहद शुभ माना जाता है। 

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भाई की कलाई पर कब बांधें राखी? रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त के साथ ग्रहण का भी रखें ध्यान

भाई-बहन के प्यार और विश्वास का त्योहार रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बहनें भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीद रही हैं, वहीं भाई भी अपनी बहनों को खास तोहफा देने की तैयारी में हैं। इस बार रक्षाबंधन को लेकर एक राहत वाली बात यह है कि राखी बांधने के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा।

भद्रा को लेकर हर साल लोगों के मन में सवाल रहता है कि राखी कब बांधें और किस समय राखी बांधने से बचना चाहिए। इस बार भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 28 अगस्त को भाई पूरे दिन अपनी बहनों से राखी बंधवा सकेंगे। हालांकि राहुकाल का समय जरूर ध्यान में रखना होगा।

28 अगस्त को राखी बांधने में नहीं होगी भद्रा की रुकावट

इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। 28 अगस्त को भद्रा खत्म होने के बाद ही राखी का त्योहार मनाया जाएगा। इसलिए बहनें अपने भाई को पूरे दिन राखी बांध सकती हैं।

रक्षाबंधन पर भद्रा को लेकर सबसे ज्यादा असमंजस उन परिवारों में रहता है, जहां सुबह ही राखी बांधने की तैयारी होती है। इस बार ऐसे परिवारों के लिए स्थिति आसान है। 28 अगस्त को भद्रा नहीं होने के कारण राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

राहुकाल में राखी बांधने से बचें

28 अगस्त को सुबह 10:31 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार राहुकाल के दौरान शुभ काम करने से बचा जाता है। इसलिए इस समय राखी बांधने की बजाय इसके पहले या बाद का समय चुना जा सकता है।

रक्षाबंधन पर अगर परिवार सुबह राखी बांधना चाहता है तो राहुकाल शुरू होने से पहले यह रस्म पूरी की जा सकती है। वहीं, दोपहर 12:07 बजे के बाद भी भाई की कलाई पर राखी बांधी जा सकती है।

रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण

28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका समेत हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन की पूजा व अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।

नेशनल अवार्ड प्राप्‍त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्‍वी इस स्थिति में आती है कि पृथ्‍वी की गहरी छाया चंद्रमा को पूरी तरह नहीं ढक पाती है बल्कि आंशिक भाग को ढकती है तो चंद्रमा का गहरी छाया से ढका भाग ग्रहणग्रस्‍त दिखाई देता है, इसे आंशिक चंद्र ग्रहण या पार्शियल लुनर इकल्प्सि कहते हैं ।

एक गणितीय अनुमान के अनुसार विश्‍व की लगभग 41 प्रतिशत जनसंख्‍या इसे देख सकेगी । 12 अगस्‍त को हुए सूर्य ग्रहण के 15 दिन के अंतराल से यह घटना होने पर सोशल मीडिया में बताया जा रहा है कि 15 दिन के अंतर से ग्रहण होना अनिष्‍ट करता है जबकि वैज्ञानिक तथ्‍य है कि कोई भी ग्रहण अकेला नहीं होता है। हर ग्रहण जोड़ी के रूप मे 15 दिन के अंतर पर होता है । आज तक जितने भी ग्रहण हुए है उनके 15 दिन के अंतर पर दूसरा ग्रहण होता ही है । इसलिए यह ग्रहण कोई अनोखी घटना नहीं है ।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी धार्मिक मान्यता या शुभ-अशुभ दावे की पुष्टि नहीं करता।

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