क्या यह दुनिया के सबसे हरित स्कूलों में से एक है? [Is this one of the world’s greenest schools?]
क्या होगा अगर बचा हुआ खाना कचरा घटा सके, जानवरों का पेट भर सके और हरित भविष्य को ऊर्जा दे सके? युगांडा के कंपाला का एक स्कूल ऐसी ही कोशिशों में जुटा है. What if leftovers could cut waste, feed animals and help power a greener future? A Kampala school has been making pioneering efforts – and it’s now on the shortlist for a prestigious international environment award.
कहीं कीचड़ में स्कूल जाते बच्चे, कहीं घुटनों तक पानी:कहीं फिसलन, कहीं सांप-बिच्छू तो, कहीं पानी में डूबने का खतरा; वीडियो वायरल
एमपी के रायसेन जिले में गैरतगंज तहसील में आने वाले देवनगर में स्कूल जाती छात्राओं का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल की तरफ जा रहे हैं और उनकी पीठ पर स्कूल बैग हैं और ये इन बच्चों का आम रास्ता है। कीचड़ भरे रास्ते से रोज जाते हैं स्कूल वे आगे जाकर पहले पानी ढूंढते हैं ताकि अपने पैर साफ कर सकें उसके बाद ही स्कूल तक पहुंच पाते हैं। इसी वजह से इन बच्चों ने पैरों में किसी भी तरह की कोई चप्पल या जूते भी नहीं पहन रखे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बच्चे रोज इसी तरह स्कूल जाने को मजबूर हैं, कई बार वे फिसलकर गिर पड़ते हैं और चोटिल हो जाते हैं। इसी मुश्किल रास्ते की वजह से कई बार छोटे बच्चों का स्कूल जाना कठिन हो जाता है। खतरनाक रास्ते से जाने की वजह से सांप-बिच्छू के काटने का भी खतरा रहता है। स्कूल टीचर भी कर चुके हैं सड़क की मांग वहीं स्कूल टीचर का कहना है कि कई बार वे इसकी शिकायत कर चुकी हैं और पंचायत प्रशासन से सड़क बनाने के लिए आवेदन भी दे चुके हैं लेकिन अभी तक कोई भी हल नहीं निकला है। वहीं ग्रामीणों को कहना है कि सरपंच से कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं कि बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। साथ ही आम लोगों को भी आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन सरपंच का कहना है कि वो रोड नहीं बनवाएगा। बिहार में 25 सालों से पुल की मांग ये सिर्फ एमपी के के गांव की तस्वीर नहीं है ऐसा ही एक वीडियो देशभर से आ रहे हैं। बिहार के गया जिले के मानपुर प्रखंड में कईया गांव का है। जहां बच्चे घुटने तक पानी पार करकर स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां एक तरफ नदी है और एक तरफ नहर लेकिन कोई पुल नहीं है। इस वजह से बच्चों को रोज इसी तरह स्कूल जाना पड़ता है। 3 महीने में 3 हफ्ते ही स्कूल जा पा रहे बच्चे ग्रामीणों की शिकायत है कि बच्चे बारिश के समय कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं क्योंकि पानी बढ़ जाता है और न रोड है न पुल है। जिससे बच्चों के डूबने का खतरा होता है इसलिए बच्चे 3 महीने की बारिश में हफ्ते में 1-2 दिन ही स्कूल जा पाते हैं, उन्हें मजबूरी में क्लास छोड़नी पड़ती हैं। ‘डीएम साहब हमारे स्कूल की रोड बनवा दीजिए’ ऐसा ही एक ओर वीडियो वायरल हो रहा है, दावा है कि ये वीडियो एमपी के बुरहानपुर जिले के देवला ग्राम पंचायत का है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ में सिर पर किताबें लेकर स्कूल से वापस घर की तरफ आ रहे हैं। इस वीडियो में बच्चे अपना स्कूल दिखा रहे हैं और कह रहे हैं 'डीएम साहब हमारे स्कूल की रोड बनवा दीजिए, वो हमारा स्कूल है, स्कूल जाने में दिक्कत होती है। ' शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के मुताबिक शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) के सेक्शन 6 के तहत बच्चों के स्कूल की दूरी के स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। साथ ही रास्ते पर बेहतर रोशनी और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होना चाहिए। -------------------------- मिड डे मील में कहीं कीड़े, कहीं सड़े आलू:आरोप छात्रों से प्रिंसिपल कहते हैं- शिकायत की तो केस कर देंगे, देशभर के कई राज्यों के मामले एमपी के छिंदवाड़ा के मानेगांव में स्कूली बच्चों के मध्यान भोजन यानी मिड डे मील में खाने की गुणवत्ता, सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें..
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