PM Modi के 25 साल के जन-सेवा सफर पर बोले Rajnath Singh, चुनौतियों के बाद भी नहीं बदली भावना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'सेवा संकल्प अभियान' के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर पूरे देश में इस अभियान के तहत 12 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो जन-सेवा और राष्ट्र-निर्माण की भावना को दर्शाएंगे। 16 सितंबर को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंह ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के घरों में दीये जलाकर की जाएगी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इसमें शामिल होना पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा।
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राजनाथ ने कहा कि किसी को भी ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा; हालांकि, यह स्वाभाविक है कि जिन लोगों को सरकारी योजनाओं से फ़ायदा मिला है, वे ख़ुशी महसूस कर सकते हैं और प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीये जलाना चुन सकते हैं। इस अभियान के तहत कई तरह की गतिविधियां होंगी, जिनमें नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। सिंह ने इन अलग-अलग कार्यक्रमों को राष्ट्र-निर्माण और जन-कल्याण की उसी भावना का प्रतीक बताया जो मोदी के पूरे जीवन में दिखाई देती रही है। उन्होंने कहा, "अगर मुझे मोदी जी के पिछले 25 वर्षों के जीवन को एक शब्द में समेटना हो, तो मैं कहूंगा – सेवा। उनका पद बदला है, उनकी जिम्मेदारियां बदली हैं, उनकी भूमिका बदली है और चुनौतियां भी बढ़ी हैं। लेकिन उनके जीवन की मूल भावना नहीं बदली है।"
उन्होंने आगे कहा कि मोदी का 25 साल का सफर, जो गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शुरू हुआ और प्रधानमंत्री के तौर पर जारी है, उसने न केवल राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि भारत के विकास को एक नई दिशा दी है और वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। सिंह ने 'सेवा संकल्प अभियान' को सिर्फ़ एक कार्यक्रम से कहीं ज़्यादा बताया और इसे सेवा, सहयोग और जन-भागीदारी के ज़रिए समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का एक पक्का संकल्प कहा। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यक्रमों का मुख्य मकसद समाज के ज़रूरतमंद लोगों तक विकास की योजनाओं को पहुंचाना, जन-सेवा के काम करना और देश के प्रति हमारी क्या ज़िम्मेदारी है, इस भावना को मज़बूत करना है।
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उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए मोदी के नेतृत्व में देश की तरक्की पर भरोसा जताया और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के मार्गदर्शन में पश्चिम बंगाल से अहम योगदान की उम्मीद जताई। सिंह ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में पूरा देश तरक्की, सुशासन और विकास के रास्ते पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुझे पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जी के मार्गदर्शन में, पश्चिम बंगाल एक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य में अहम योगदान देगा।
मेटा भारत के साइबर अपराध पोर्टल आई4सी को बाल सुरक्षा से जुड़े मामले भेजेगी
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिका स्थित प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा ने मंगलवार को घोषणा की कि वह बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा संचालित भारत के साइबर अपराध पोर्टल को देगी।
यह निर्णय इंस्टाग्राम पर विज्ञापनों के माध्यम से कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) के प्रसार और प्रचार को लेकर भारत में मेटा की कड़ी निगरानी के बीच आया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कहा है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भारत में संचालित होने वाले प्रत्येक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए एक मूलभूत सिद्धांत है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। सूत्रों ने आगे कहा कि मेटा की यह प्रतिबद्धता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।
मेटा ने इस मुद्दे पर एक बयान में कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और वह ऐसे अपराधों के दोषियों को सजा दिलाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मेटा के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस नुकसान से निपटने के हमारे सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के लिए, मेटा अब बाल सुरक्षा संबंधी मामलों की रिपोर्ट सीधे आई4सी द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर करेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बाल यौन शोषण और अन्य प्रकार के बाल शोषण को प्रसारित करने या उसकी पहुंच को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है।
ऐसे मामलों की सूचना कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि ऐसी घटनाओं का निपटारा केवल प्लेटफॉर्म के आंतरिक सामग्री नियंत्रण प्रणालियों के माध्यम से ही न हो।
सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है और हानिकारक सामग्री की पहचानने और उसे हटाने के लिए अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ बातचीत जारी है।
सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि जो प्लेटफॉर्म बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त सक्रिय उपाय नहीं अपनाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
यह घटनाक्रम बच्चों के लिए जोखिमों (यौन शोषण, हानिकारक सामग्री और ऑनलाइन दुर्व्यवहार शामिल) को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बढ़ती वैश्विक जांच के बीच आया है।
भारत में, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 द्वारा शासित होते हैं, जो मध्यस्थों के लिए उचित सावधानी बरतने के दायित्व निर्धारित करते हैं।
टेक्नोलॉजी ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (टीटीपी) द्वारा की गई एक जांच के बाद मेटा जांच के दायरे में आ गया था, जिसमें पाया गया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम ने इस वर्ष बाल यौन शोषण सामग्री वाले सशुल्क विज्ञापन दिखाए, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से हेरफेर की गई असली बच्चों की तस्वीरें भी शामिल थीं।
जांच में मेटा के प्लेटफॉर्म पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित बाल यौन शोषण सामग्री वाले 300 से अधिक विज्ञापन भी पाए गए।
--आईएएनएस
एमएस/
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