भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी कभी फिटनेस तो कभी चोटों के कारण लंबे समय तक टीम इंडिया से बाहर रहे हैं और निजी जीवन की परेशानियां भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हैं।
मौजूद हालात को देखते हुए उनका करियर अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। गौरतलब है कि मार्च 2025 में न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला साबित हो सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, चैंपियंस ट्रॉफी में शमी भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज रहे हैं और अंतिम तीन मैचों में वह एकमात्र स्पेशलिस्ट पेसर थे। टूर्नामेंट की शुरुआत में बांग्लादेश के खिलाफ पांच विकेट लेकर उन्होंने शानदार वापसी की थी और कुल नौ विकेट लेकर संयुक्त रूप से दूसरे सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं।
इसके बावजूद हाल के महीनों में चयन को लेकर तस्वीर साफ नहीं रही है। अक्टूबर में मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के फिटनेस बयान और शमी की प्रतिक्रिया ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता कितनी है। जानकारों का मानना है कि खिलाड़ी को उसके भविष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए हैं।
शमी का रिकॉर्ड इस बात की गवाही देता है कि उन्होंने बड़े टूर्नामेंट्स में हमेशा टीम के लिए योगदान दिया है। उनके नाम 462 अंतरराष्ट्रीय विकेट दर्ज हैं और 2023 विश्व कप में 24 विकेट लेकर वह टूर्नामेंट के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं।
घरेलू क्रिकेट में भी उनकी फिटनेस और फॉर्म पर सवाल उठाना मुश्किल है। रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने लगातार विकेट लिए हैं और अगस्त के बाद से 19 मैचों में 52 विकेट झटक चुके हैं। यह आंकड़े उनकी तैयारी और क्षमता को दर्शाते हैं।
दूसरी ओर भारतीय टीम भविष्य की तैयारी में जुटी है और सफेद गेंद क्रिकेट में नए तेज गेंदबाजों को आजमाया जा रहा है। टेस्ट टीम में भी वैकल्पिक पेसर्स पर काम हो रहा है, जिससे शमी को बाहर बैठना पड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि अगर शमी पूरी तरह फिट रहते हैं तो क्या उन्हें न्यूजीलैंड दौरे या आगे के बड़े टूर्नामेंट्स में मौका मिलेगा। चयनकर्ताओं का रुख फिलहाल साफ नहीं दिख रहा है और यही स्थिति भारतीय क्रिकेट के एक भरोसेमंद गेंदबाज के लिए निराशाजनक मानी जा रही हैं।
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क्रिकेट में इन दिनों बांग्लादेश क्रिकेट को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और इसका असर अब मैदान के बाहर खिलाड़ियों पर भी साफ दिखने लगा है। भारत के साथ जारी तनातनी के बीच बांग्लादेश के कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के भारतीय स्पॉन्सरशिप करार खतरे में पड़ते नजर आ रहे हैं।
बता दें कि इस पूरे विवाद की जड़ तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान का आगामी आईपीएल से बाहर होना रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल से पहले उन्हें अपने स्क्वाड से हटाया, जिसके पीछे बीसीसीआई का निर्देश बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि इस फैसले के बाद मामला सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा और यह एक संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दे में बदल गया है। इसी पृष्ठभूमि में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल से संपर्क किया है और भारत में होने वाले आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में अपनी भागीदारी को लेकर चिंता जताई है।
इस अनिश्चितता का सीधा असर खिलाड़ियों के व्यावसायिक करियर पर भी पड़ता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय खेल उपकरण कंपनी सैंसपेरेल्स ग्रीनलैंड्स ने कुछ बांग्लादेशी खिलाड़ियों के साथ स्पॉन्सरशिप समझौते आगे न बढ़ाने का मन बना लिया है, जिसमें टीम के कप्तान लिटन दास का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक पत्र जारी नहीं हुआ है।
एक बांग्लादेशी खिलाड़ी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, जिससे टीम के भीतर भ्रम और बेचैनी का माहौल बना हुआ है। वहीं बीसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया है कि खिलाड़ी मानसिक दबाव में हैं और लगातार बोर्ड से भविष्य को लेकर सवाल कर रहे हैं।
यह स्थिति केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है बल्कि विदेशी कोचिंग स्टाफ भी असमंजस में है। सहयोगी स्टाफ के एक सदस्य का कहना है कि विश्व कप जैसे बड़े आयोजन से पहले इस तरह की अनिश्चितता सभी के लिए चिंताजनक है और उम्मीद है कि मामला जल्द सुलझेगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, खिलाड़ियों के एजेंटों को यह संकेत भी मिले हैं कि अन्य भारतीय कंपनियां भी भविष्य में स्पॉन्सरशिप से दूरी बना सकती हैं। इससे बांग्लादेशी क्रिकेटरों के लिए आर्थिक और पेशेवर दोनों स्तरों पर चुनौती बढ़ सकती है।
इस बीच बीसीबी ने 4 जनवरी को हुई आपात बैठक के बाद आईसीसी को दो बार पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश के मैच भारत के बजाय श्रीलंका में कराए जाएं। हालांकि इस पर अभी तक आईसीसी का अंतिम फैसला आना बाकी है। फिलहाल बांग्लादेश का कार्यक्रम कोलकाता और मुंबई में तय माना जा रहा है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
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