Ganesh Ji Mantra: गणेशोत्सव में करें गणपति जी के 10 शक्तिशाली मंत्रों का जाप, जानें उनके फायदे
Ganesh Ji Mantra: इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया गया था. इस दिन से गणेशोत्सव शुरू हो गया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर उनका प्राकट्य हुआ था. इस दिन बप्पा को घर में विराजमान करते हैं और उपवास रखते हैं. इस दिन पूजा-पाठ करते हैं और उनके मंत्रों का जाप कर सकते हैं. मान्यता है कि पूजा के साथ-साथ सही मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए. इन मंत्रों का जाप करने से भगवान गणेश जल्दी से प्रसन्न हो जाते हैं. जीवन में सुख-शांति और तरक्की प्राप्त करने के लिए गणेश चतुर्थी अपनी जरूरत के अनुसार, इन मंत्रों का जाप करना चाहिए.
गणेशोत्सव में इन गणेश मंत्रों का जाप करें (Ganesh Ji ke 10 Mantra)
1.मूल मंत्र
ऊं गं गणपतये नम:
हर नए कार्य की शुरुआत और विघ्न को दूर करने के लिए इस सबसे लोकप्रिय मंत्र का जाप करना चाहिए.
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2.महामंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
इस मंत्र का महत्व है कि इससे कार्य में बिना किसी बाधा के सफलता मिलती है.
3.गणेश गायत्री मंत्र
ऊं एकदंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दंति प्रचोदयात्॥
गणेश जी के इस मंत्र का जाप करने से बुद्धि, ज्ञान और मानसिक स्पष्टता के लिए जाप कर सकते हैं.
4.बीज मंत्र
ऊं गं
गणपति जी के इस मंत्र को एकाग्रता और तुरंत मानसिक शांति के लिए पढ़ सकते हैं.
5.ऋणमुक्ति मंत्र:
ऊं गणेश ऋणं छिंधि वरं हुं नमः फट्॥
इस ऋणमुक्ति मंत्र का जाप करने से आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति मिलती है. यह एक अचूक मंत्र है.
6.संकट नाशक मंत्र
ऊं नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा॥
इस मंत्र को जाप करने के लिए बड़े से बड़े संकट और कठिनाइयों से रक्षा मिलती है.
7.समृद्धि एवं सौभाग्य मंत्र
ऊं श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वरद सर्वजन्म में वषमान्य नम:
इस मंत्र का जाप करने से घर में सौभाग्य और वैभव प्राप्त होगा.
8.वक्रतुण्ड बीज मंत्र
ऊं वक्रतुण्डाय हुं
गणेश जी के इस मंत्र का जाप करने से शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है.
9.लंबोदर नमस्कार मंत्र
ऊं लंबोदराय नम:
यह मंत्र धैर्य, संतुलन और उदारता प्राप्त करने के लिए गणेश जी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए.
10.विघ्नेश्वर मंत्र
ऊं विघ्नेश्वराय नम:
गणेश जी के इस मंत्र का जाप करने से आपको हर क्षेत्र में आने वाली अड़चनों से राहत मिलती है.
इन मंत्रों का जाप करने से क्या लाभ होगा?
गणपति बप्पा के इन मंत्रों का जाप करते समय मन की पवित्रता और स्वच्छता का ध्यान रखें. मंत्र जाप करते समय पूजा के लिए आपको पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए. लाल रंग के आसन पर बैठ सकते हैं. अगर संभव हो तो रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं और लाल चंदन की माला धारण कर सकते हैं. इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप कर सकते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
डिजिटल पेमेंट की व्यापकता के बीच यूपीआई एमडीआर से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, लेकिन ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए चुनौती भी: नितिन कामथ
नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। जेरोधा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नितिन कामथ ने व्यक्ति से व्यापारी (पी2एम) यूपीआई भुगतान पर हाल ही में लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का समर्थन करते हुए कहा है कि यूपीआई के व्यापक स्तर पर अपनाए जाने के बाद यह कदम किसी न किसी समय उठाया जाना लगभग तय था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कामथ ने कहा कि एमडीआर लागू होने से यूपीआई इकोसिस्टम में मौजूदा एकाग्रता को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यूपीआई बाजार का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल तीन ऐप्स के पास है और नया शुल्क ढांचा अधिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकता है।
उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यूपीआई पर एमडीआर किसी न किसी समय लागू होना ही था, खासकर तब जब यूपीआई का उपयोग इतने व्यापक स्तर पर हो चुका है। इससे अधिक प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल सकती है।
हालांकि कामथ ने कहा कि प्रस्तावित एमडीआर संरचना कुछ क्षेत्रों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती, विशेष रूप से निवेश और ब्रोकिंग कारोबार के लिए।
उन्होंने बताया कि ब्रोकर्स के पास यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं होता कि यूपीआई के जरिए उनके खातों में ट्रांसफर किया गया पैसा आखिरकार किसी ट्रेड में इस्तेमाल होगा या नहीं। ग्राहक फंड ट्रांसफर करने के बाद ट्रेड करें, इसके लिए ब्रोकर्स उन्हें बाध्य नहीं कर सकते। ऐसे में यदि यूपीआई शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता तो ब्रोकर्स को लागत उठानी पड़ सकती है, जबकि उससे कोई अतिरिक्त राजस्व नहीं मिलेगा।
उदाहरण देते हुए कामथ ने कहा कि यदि 10,000 ग्राहक एक महीने में 2 लाख रुपए के 50-50 यूपीआई ट्रांसफर करें और बाद में कोई ट्रेड न करें, तो प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था के तहत किसी ब्रोकर पर लगभग 2 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
उन्होंने त्रैमासिक निपटान (क्वार्टरली सेटलमेंट-क्यूएस) नियमों का भी उल्लेख किया, जिसके तहत ब्रोकर्स को हर महीने या तिमाही में ग्राहकों के अप्रयुक्त फंड वापस उनके बैंक खातों में भेजने होते हैं।
कामथ ने कहा कि ग्राहक अक्सर यह राशि फिर से अपने ब्रोकिंग खातों में जमा करते हैं और ऐसे आधे से अधिक ट्रांसफर यूपीआई के माध्यम से होते हैं। इससे बार-बार फंड ट्रांसफर पर ब्रोकर्स को यूपीआई शुल्क देना पड़ सकता है, जबकि उनके राजस्व में कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होती।
उनका कहना है कि यूपीआई पर एमडीआर लागू करने के पीछे तर्क मजबूत है, लेकिन निवेश और ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि डिजिटल भुगतान की बढ़ती लागत उद्योग पर अनावश्यक बोझ न बने।
--आईएएनएस
डीबीपी
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