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कौन हैं सीमा पाहुजा? दिशा सालियान केस में आया बड़ा मोड़! 'गुड़िया' से आरजी कर तक रहा है कनेक्शन...

दिशा सालियान केस में बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्ती के बाद सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है.इस इस मामले की जल्दी जांच के लिए एसपी सीमा पाहुजा को जिम्मेदारी सौंपी गई है. बता दें ये वही अफसर हैं जिनका नाम देश के कई सबसे उलझे हुए और चर्चित मामलों से जुड़ा रहा है.

इस केस को छह साल से भी अधिक समय हो चुका है. अब दिशा सालियान मौत मामले ने पूरी तरह नया रुख ले लिया है. आइए आपको समझाते हैं कि केस में अब तक क्या नया मोड़ आया और किस वजह से ये केस अब सुर्खियों में है.

14 सितंबर को मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज हुई है

दरअसल, 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीतसिंह राजा भोसले की खंडपीठ ने यह मामला सीबीआई के हवाले करने का आदेश सुनाया था. इतना ही नहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई पुलिस को कड़े शब्दों में आड़े हाथ लिया और कहा कि छह साल तक एफआईआर तक न होना और जांच का ऐसा तरीका जवाब देने के बजाय नए सवाल पैदा करता है. इसके अलावा कोर्ट ने इस मामले में ये भी निर्देश दिया कि जांच किसी वरिष्ठ व अनुभवी सीबीआई अफसर की निगरानी में आगे बढ़नी चाहिए और इसके बाद एजेंसी ने डीएसपी पूरन कुमार को विशेष जांच अधिकारी बनाया और 14 सितंबर को मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज हुई है.

कौन हैं सीमा पाहुजा? जिनके नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है...

अब आपको बताते हैं कि सीबीआई अधिकारी सीमा पाहुजा कौन हैं? दरअसल, सीबीआई के भीतर सीमा पाहुजा की गिनती उन गिने-चुने अफसरों में होती है जिन्हें सबसे मुश्किल केस सौंपे जाते हैं उनकी सबसे बड़ी पहचान हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में हुए 'गुड़िया कांड' से जुड़ी है. बता दें इस मामले में एक स्कूली छात्रा स्कूल से घर लौटते वक्त लापता हो गई थी और दो दिन बाद उसका शव जंगल में मिला था हिमाचल पुलिस जब गुत्थी नहीं सुलझा पाई तो केस सीबीआई को गया और एजेंसी ने डीएनए प्रोफाइलिंग समेत अन्य तकनीक से जांच के बाद करीब 250 लोगों के डीएनए सैंपल लिए और फिर आरोपी पकड़ा गया. जिसके बाद उसे उम्रकैद हुई थी. 
उनके नाम और कौन से बड़े केस दर्ज हैं

उन्नाव दुष्कर्म मामले की जांच टीम में भी अहम भूमिका निभाई  

सीमा पाहुजा ने हाथरस गैंगरेप कांड की जांच भी की थी. उस वक्त वे गाजियाबाद स्थित सीबीआई यूनिट में तैनात थीं इसके अलावा उन्नाव दुष्कर्म मामले की जांच टीम में भी वे अहम भूमिका निभा चुकी हैं. इतना ही नहीं कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज ट्रेनी डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या का मामला भी वह देख रही हैं. 

सीमा पाहुजा की छवि और उपलब्धियां 

सीमा पाहुजा को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक मिल चुका है. एक रिपोर्ट के अनुसार बेहतरीन जांच कार्य के लिए उन्हें दो बार गोल्ड मेडल से भी नवाजा गया है. सीबीआई के अंदर उनकी पहचान ऐसी अफसर की है जिन पर किसी तरह का बाहरी दबाव असर नहीं डालता और उनका करियर रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग माना जाता है. 

सीबीआई की एफआईआर में किन बड़े नामों की एंट्री हुई है

एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती के साथ-साथ पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे और परमबीर सिंह जैसे नाम दर्ज किए गए हैं हालांकि अदालत पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि एफआईआर में नाम आने का मतलब किसी को दोषी या आरोपी मान लेना नहीं है, यह तभी तय होगा जब जांच में पर्याप्त आधार सामने आएं

आखिर यह पूरा मामला है क्या

8 जून 2020 की रात मुंबई के मलाड इलाके में एक बहुमंजिला इमारत से गिरने के बाद 28 वर्षीय सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत हो गई थी. इसके ठीक छह दिन बाद 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित घर में मृत मिले. दिशा सुशांत की पूर्व मैनेजर रह चुकी थीं. दोनों मौतों के बीच के कम अंतराल ने उस वक्त तमाम तरह की अटकलों को हवा दी थी. मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इसे एक्सीडेंटल डेथ बताकर आत्महत्या का मामला माना. अक्टूबर 2020 में जांच बंद कर दी गई. फिर दिसंबर 2023 में केस दोबारा खोला गया और एसआईटी बनी, लेकिन पुलिस आत्महत्या की थ्योरी पर ही कायम रही थी.

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आईएमफ ने की भारत की आर्थिक बढ़ोतरी की तारीफ, कहा- भारत के पास नेतृत्व करने की क्षमता

भारत की पांच द‍िवसीय यात्रा पूरी करने के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के उप-प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क ने भारत को लेकर बड़ी बात कही. उन्‍होंने कहा क‍ि भारत के पास दुनिया की आर्थिक बढ़ोतरी की अगली बड़ी लहर का नेतृत्व करने की क्षमता है. इसकी वजह देश की मजबूत आर्थिक नींव, निजी क्षेत्र की तेज प्रगति और लगातार बढ़ती तकनीकी क्षमताएं हैं. 

दिल्ली-मुंबई में अहम बैठकों में लिया हिस्सा

भारत की यात्रा के दौरान इस दौरान उन्होंने नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया. वॉशिंगटन से जारी एक बयान में क्लार्क ने कहा, "भारत दुनिया की अगली आर्थिक वृद्धि को गति देने की क्षमता रखता है और आईएमएफ इस सफर में देश का करीबी साझेदार बना रहेगा." आईएमएफ में उप-प्रबंध निदेशक बनने के बाद यह क्लार्क की भारत की पहली यात्रा थी. उन्होंने वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी से मुलाकात की.

भारत आने पर जताई खुशी

उन्होंने कहा, "आईएमएफ के उप-प्रबंध निदेशक के रूप में पहली बार भारत आकर मुझे बहुत खुशी हुई. नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के नेताओं और अन्य लोगों से बातचीत करने का अवसर मिला." क्लार्क ने निर्मला सीतारमण, संजय मल्होत्रा और अशोक कुमार लाहिड़ी को उनके गर्मजोशी भरे स्वागत और सकारात्मक चर्चाओं के लिए धन्यवाद दिया.

आईएमएफ अधिकारी ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताया और कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा, "मजबूत आर्थिक आधार और अच्छी नीतियों की वजह से भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और वैश्विक विकास का एक प्रमुख इंजन है."

'जोखिमों के बीच आर्थिक स्थिरता और मजबूती बनाए रखना जरूरी'

क्लार्क ने बताया कि भारतीय नीति-निर्माताओं के साथ उनकी बातचीत में देश की आर्थिक स्थिति, वैश्विक परिस्थितियों में हो रहे बदलाव और टिकाऊ तथा सबको साथ लेकर चलने वाली आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा, "दुनिया में बढ़ती अनिश्चितताओं और बदलते जोखिमों के बीच आर्थिक स्थिरता और मजबूती बनाए रखना बेहद जरूरी है."

उन्होंने कहा क‍ि हमने इस बात पर चर्चा की कि नीतियां परिस्थितियों के अनुसार लचीली बनी रहें, महंगाई नियंत्रण में रहे और ऐसे सुधार आगे बढ़ाए जाएं जो उत्पादकता बढ़ाएं, प्रतिस्पर्धा मजबूत करें और मध्यम अवधि में तेज विकास को बनाए रखें. क्लार्क ने भारत सरकार को बहुपक्षीय सहयोग को समर्थन देने और क्षेत्र के अन्य देशों की मदद करने के लिए भी धन्यवाद दिया.

उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से की मुलाकात

यात्रा के दौरान उन्होंने कई उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से मुलाकात की और यह समझने की कोशिश की कि भारत का निजी क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति में किस तरह योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा क‍ि मुझे व्यापार जगत के नेताओं से बातचीत का अवसर मिला और मैं भारत के निजी क्षेत्र की ऊर्जा, यहां मौजूद प्रतिभाशाली लोगों और तेजी से विकसित हो रही तकनीकी तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं से काफी प्रभावित हुआ.

क्लार्क के अनुसार, नवाचार (इनोवेशन), डिजिटल बदलाव, उन्नत विनिर्माण और नई तकनीकों को अपनाना ऐसे बड़े कारक हैं जो उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. उन्होंने कहा क‍ि हमारी चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, उन्नत विनिर्माण और तकनीक का व्यापक उपयोग उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर सकते हैं और अधिक मूल्य वाले आर्थिक कार्यों को बढ़ावा दे सकते हैं.

स्रोत- आईएएनएस

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