Salman Khan: गणपति आरती में सलमान से हुई गलती, बहन अर्पिता ने तुरंत टोका; भाई ने मुस्कुराकर सुधारी भूल
Salman Khan: खान परिवार के घर गणपति उत्सव के दौरान सलमान खान भी पूजा और आरती में शामिल हुए। आरती करते समय सलमान से एक गलती हो गई, जिस पर बहन अर्पिता खान ने तुरंत टोका। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
आरती करते समय अर्पिता ने टोका
वीडियो में सलमान खान हाथ में आरती की थाली लेकर बप्पा की आरती करते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान वह थाली गलत दिशा में घुमाने लगे। पास खड़ी अर्पिता की नजर इस पर पड़ी और उन्होंने इशारे से भाई को सही दिशा बताई। सलमान ने भी तुरंत अर्पिता की बात समझी और थाली सही दिशा में घुमाने लगे। इसके बाद वह मुस्कुराते नजर आए।
भांजी आयत को भी समझाया
#WATCH | Actor Salman Khan participated in 'aarti' at his brother and actor Sohail Khan's house after Ganpati Visarjan.
— ANI (@ANI) September 16, 2026
(Source: Salman Khan's PR team) pic.twitter.com/xWemo7VKIA
आरती पूरी करने के बाद सलमान अपनी भांजी आयत के पास भी गए। उन्होंने आयत को आरती करने का तरीका समझाया। वीडियो में सलमान का यह अंदाज भी देखने को मिला। अर्पिता के इस तरह से बड़े भाई की गलती सुधारने पर सोशल मीडिया यूजर्स भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोग उनके शांत और प्यार भरे अंदाज की तारीफ कर रहे हैं।
यूलिया वंतूर भी पूजा में पहुंचीं
सोहेल खान के घर हुए गणपति उत्सव में परिवार के अलावा कई करीबी लोग और सेलेब्स भी शामिल हुए। यूलिया वंतूर भी यहां पूजा और आरती करती नजर आईं।
गणपति विसर्जन के दौरान सोहेल खान, अरहान और अर्पिता ने जमकर डांस किया। वहीं, पूजा के दौरान सलमान खान अभिनेता वरुण शर्मा के साथ मजाक-मस्ती करते भी दिखाई दिए।
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US Tariff on India: ट्रंप भारत पर लगा सकते हैं 100% टैरिफ, अगर ये बिल पास हुआ तो हो जाएगी बड़ी मुश्किल
US Tariff on India: रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने मंगलवार को उस विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए मतदान किया, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला 2026 का अधिनियम नाम के इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए हुए प्रक्रियात्मक मतदान में प्रस्ताव 214-211 के अंतर से पास हुआ। अब बिल पर हाउस में अंतिम मतदान होना है।
भारत और चीन पर क्यों नजर?
प्रस्तावित कानून का निशाना सिर्फ रूस नहीं है। इसमें उन देशों पर भी आर्थिक दबाव डालने का प्रावधान है, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं।
भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। ऐसे में कानून लागू होने की स्थिति में दोनों देशों के अमेरिकी बाजार में जाने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि भारत पर सीधे 100% टैरिफ लागू हो गया है। प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात करता है; इसका इस्तेमाल कब और किस देश के खिलाफ किया जाएगा, यह आगे के फैसलों पर निर्भर करेगा।
हाउस में 214-211 से आगे बढ़ा बिल
हाउस में बिल को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव पर 214 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 211 ने विरोध किया। इस मतदान ने डेमोक्रेटिक नेतृत्व को भी आश्चर्यचकित किया, क्योंकि दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ मतदान किया। बिल को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच मुख्य विवाद राष्ट्रपति को मिलने वाली अतिरिक्त टैरिफ शक्तियों को लेकर है।
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के रैंकिंग सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि विधेयक राष्ट्रपति को पर्याप्त सुरक्षा प्रावधानों के बिना व्यापक टैरिफ अधिकार दे सकता है।
सीनेट पहले ही कर चुका है पास
यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से पहले ही 86-11 के वोट से पारित हो चुका है। सीनेट में पारित संस्करण रूस के नेताओं, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर कार्रवाई का प्रावधान रखता है।
कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना है। अमेरिका का कहना है कि रूसी कच्चे तेल से होने वाली कमाई यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध को आर्थिक मदद देती है।
‘शैडो फ्लीट’ पर भी कार्रवाई
बिल में उन जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है, जिनका इस्तेमाल रूस से तेल की डिलीवरी के दौरान मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए किए जाने का आरोप है।
इस तरह प्रस्तावित कानून रूस के ऊर्जा कारोबार के साथ-साथ उससे जुड़े वित्तीय और समुद्री नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ाने की कोशिश करता है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है?
भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रूस से ऊर्जा खरीद पर प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई है। यदि कानून लागू होता है और ट्रंप प्रशासन भारत को उन देशों की श्रेणी में रखता है जिन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाना है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है।
हालांकि, अंतिम प्रभाव कई बातों पर निर्भर करेगा कानून का अंतिम स्वरूप क्या रहता है, राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल किस तरह करते हैं और किन देशों को टैरिफ के दायरे में रखा जाता है।
इसलिए फिलहाल इसे भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ लागू होने की खबर के बजाय संभावित टैरिफ अधिकार देने वाले विधेयक के रूप में समझना ज्यादा सही है।
हाउस की अंतिम मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा बिल
हाउस में अंतिम मंजूरी मिलने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। हाउस का मौजूदा सत्र जल्द अवकाश पर जाने वाला है, इसलिए इस विधेयक को लेकर अमेरिकी संसद में आने वाले दिनों में होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
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