AIAPGET 2026 Answer Key OUT: प्रोविजनल आंसर की जारी, 5 सितंबर तक दर्ज करें आपत्ति
AIAPGET 2026 Answer Key: ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट (AIAPGET) 2026 में शामिल उम्मीदवारों का इंतजार खत्म हो गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है। उम्मीदवार अब आंसर की के साथ अपना क्वेश्चन पेपर और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स भी ऑनलाइन देख सकते हैं।
उम्मीदवारों के लिए आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। अगर किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर उन्हें लगता है कि प्रोविजनल आंसर की में गलती है, तो वे 5 सितंबर 2026 रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन चैलेंज कर सकते हैं।
हर सवाल पर देनी होगी ₹200 फीस
प्रोविजनल आंसर की को चुनौती देने के लिए उम्मीदवारों को प्रति प्रश्न ₹200 प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। यह फीस नॉन-रिफंडेबल है। आपत्ति तभी मान्य मानी जाएगी, जब निर्धारित शुल्क का सफलतापूर्वक भुगतान किया गया हो।
फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है। ऑफलाइन या किसी अन्य माध्यम से भेजी गई आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।
AIAPGET 2026 Answer Key: जरूरी तारीखें
इवेंट तारीख
प्रोविजनल आंसर की जारी 3 सितंबर 2026
आंसर की चैलेंज शुरू 3 सितंबर 2026
आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तारीख 5 सितंबर 2026
चैलेंज फीस जमा करने की अंतिम तारीख 5 सितंबर 2026, रात 11:59 बजे तक
चैलेंज फीस ₹200 प्रति प्रश्न
22 अगस्त को हुई थी मुख्य परीक्षा
NTA ने AIAPGET 2026 परीक्षा का आयोजन 22 अगस्त 2026 को किया था। परीक्षा देशभर के 104 शहरों में करीब 205 परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित हुई थी। परीक्षा में लगभग 51,482 उम्मीदवारों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
इसके बाद तकनीकी/परीक्षा संबंधी कारणों से प्रभावित 49 उम्मीदवारों के लिए 1 सितंबर को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा जयपुर स्थित राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन में हुई।
AIAPGET 2026 Answer Key ऐसे करें चेक
- सबसे पहले AIAPGET की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- होम पेज पर “Challenge(s) regarding Answer Key” लिंक पर क्लिक करें।
- अब एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड से लॉगिन करें।
- कैप्चा दर्ज करके सबमिट करें।
- “View Question Paper” पर क्लिक करके अपना क्वेश्चन पेपर और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स देखें।
- इसके बाद “Click to View/Challenge Answer Key” विकल्प चुनें।
- क्वेश्चन पेपर में दिए गए Question ID को आंसर की में दिए गए ID से मिलाएं।
- संबंधित प्रश्न के सामने दिए गए सही विकल्प को चेक करें।
किसी उत्तर पर आपत्ति है तो ऐसे करें Challenge
अगर उम्मीदवार को किसी उत्तर में गलती लगती है, तो वह निर्धारित समय के भीतर उसे चुनौती दे सकता है। इसके लिए:
- जिस प्रश्न पर आपत्ति है, उसे चुनें।
- संबंधित Option ID के सामने दिए गए चेकबॉक्स को सिलेक्ट करें।
- जरूरत होने पर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज अपलोड करें।
- सभी दस्तावेज एक ही PDF फाइल में अपलोड करने होंगे।
- “Submit and Review Claims” पर क्लिक करें।
- चुने गए प्रश्न और विकल्प को दोबारा जांच लें।
- बदलाव करना हो तो “Modify your Claims” विकल्प का इस्तेमाल करें।
- सबकुछ सही होने पर “Final Submit” पर क्लिक करें।
- इसके बाद “Pay Now” विकल्प से फीस का भुगतान करें।
- प्रत्येक चुनौती के लिए ₹200 फीस जमा करें।
ध्यान रखें कि फीस का भुगतान सफल होने के बाद ही चैलेंज अंतिम रूप से सबमिट माना जाएगा।
एक्सपर्ट पैनल करेगा आपत्तियों की जांच
NTA के अनुसार उम्मीदवारों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों की समीक्षा विषय विशेषज्ञों की एक समिति करेगी। अगर किसी चुनौती को सही पाया जाता है तो प्रोविजनल आंसर की में जरूरी बदलाव किया जाएगा और संशोधित उत्तर सभी उम्मीदवारों के परिणाम पर लागू होगा।
इसके बाद फाइनल आंसर की के आधार पर AIAPGET 2026 का रिजल्ट तैयार किया जाएगा। NTA उम्मीदवारों को उनकी व्यक्तिगत आपत्ति स्वीकार या खारिज होने की अलग से जानकारी नहीं देगा। विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद तैयार की गई आंसर की को अंतिम माना जाएगा।
Brent crude price: क्रूड ऑयल की कीमतें 95 डॉलर के पार, महंगे तेल से भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
Brent crude oil price: पश्चिम एशिया में सुलगते संघर्ष और नए सिरे से भड़की हिंसा के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (कच्चा तेल) के दाम आसमान छूने लगे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं। जुलाई की शुरुआत में जो कीमतें करीब 79 डॉलर थीं, वे अब लगभग 20 प्रतिशत तक उछल चुकी हैं, जिससे बाजार में कुछ समय की शांति के बाद राहत का दौर थम गया है।
बीते सप्ताह कच्चे तेल की कीमतें 88 से 97 डॉलर के दायरे में कारोबार करती नजर आईं। 31 अगस्त को ईरान के दक्षिणी तट पर अमेरिकी हमलों और उसके बाद ईरान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई के बाद यह तेजी आई है। इस सैन्य तनातनी ने क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात पर अनिश्चितता के बादल गहरा दिए हैं।
भारत के लिए क्यों चिंता का विषय है महंगा तेल?
भारत अपनी कुल क्रूड ऑयल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसकी वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है। वित्त वर्ष 2026 में देश का कुल तेल आयात बिल करीब 123 अरब डॉलर रहा था। एक अनुमान के मुताबिक, यदि क्रूड ऑयल की कीमतों में एक डॉलर की भी बढ़ोतरी पूरे सालभर बनी रहती है, तो इससे देश के सालाना आयात बिल में लगभग 18,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।
चालू वित्त वर्ष 2027 के शुरुआती चार महीनों में भारत ने 63.4 अरब डॉलर मूल्य का कच्चा तेल आयात किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 56.5 प्रतिशत अधिक है। यदि ये बढ़ी हुई कीमतें आम उपभोक्ताओं तक पहुंचती हैं, तो इससे देश में महंगाई भड़क सकती है, आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी चौड़ा हो सकता है।
सप्लाई रूट पर संकट और भारत का विकल्प
पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया भारत की कुल क्रूड जरूरतों का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करता रहा है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जिससे पहले वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता था, के बंद होने से इन सप्लीज में भारी गिरावट आई है।
इस संकट से निपटने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने रूस, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात की दिशा में अपने विकल्प बढ़ाए हैं। बाजार में तेल की उपलब्धता तो है, लेकिन लंबे शिपिंग रूट्स और कुछ क्रूड ग्रेड्स की भारी प्रकृति (Heavier nature) के कारण ढुलाई और प्रोसेसिंग की लागत काफी बढ़ गई है।
देश में लगातार बढ़ रही है ईंधन की मांग
एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं, तो दूसरी तरफ देश के भीतर भी मांग तेजी से ऊपर जा रही है। अगस्त महीने में भारत में पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर 7.88 प्रतिशत बढ़कर 3.82 मिलियन टन पर पहुंच गई, जबकि डीजल की मांग 6.46 प्रतिशत की तेजी के साथ 7 मिलियन टन दर्ज की गई। ईंधन की यह बढ़ती खपत आने वाले दिनों में देश की आयात जरूरतों को और ज्यादा बढ़ाएगी।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदम
अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए भारत अब लगभग 41 देशों से तेल की खरीद कर रहा है और नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में जुटा है। इसके अलावा, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 84,000 करोड़ रुपए की 'समुद्र मंथन' अपतटीय अन्वेषण (Offshore exploration) योजना पर भी जोर दिया जा रहा है। अनुमान है कि भारत के पूर्वी और पश्चिमी अपतटीय बेसिनों में 5,600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल-समकक्ष हाइड्रोकार्बन की क्षमता मौजूद है।
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