Gold Silver Price Today: ₹2,567 महंगी होकर ₹2.34 लाख पर पहुंची चांदी, सोना ₹1.53 लाख के पार; जानें ताजा भाव
Gold Silver Price Today (8 September 2026): सोने-चांदी की कीमतों में 8 सितंबर को बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, मंगलवार को सोना ₹834 प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ है। 999 शुद्धता वाला गोल्ड आज ₹1,53,309 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। जबकि एक दिन पहले सोमवार को इसका भाव ₹1,52,475 था। वहीं, आज 22 कैरेट सोने का रेट ₹1,40,431 प्रति 10 ग्राम है। ऐसे में अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो खरीदारी से पहले ताजा भाव जरूर चेक कर लें।
₹2,567 महंगी हुई चांदी
सोने के साथ-साथ चांदी भी तेजी दर्ज की गई है। आज सिल्वर ₹2,567 बढ़कर ₹2,34,056 प्रति किलोग्राम के लेवल पर पहुंच गई। जबकि कल यानी 7 सितंबर को यह ₹2,31,489 प्रति किलोग्राम पर थी। चलिए अब जानते हैं देश के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने के ताजा रेट क्या हैं।
प्रमुख शहरों में प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत (सोर्स- Goodreturns)
| शहर | कीमत |
| दिल्ली | 1,42,550 |
| मुंबई | 1,42,400 |
| कोलकाता | 1,42,400 |
| चेन्नई | 1,42,700 |
| भोपाल | 1,42,450 |
| जयपुर | 1,42,550 |
| लखनऊ | 1,42,550 |
| रायपुर | 1,42,400 |
| अहमदाबाद | 1,42,450 |
ध्यान दें: IBJA के रेट 24K शुद्ध सोने (बुलियन) के मानक भाव होते हैं, जबकि शहरवार 22 कैरेट ज्वेलरी रेट स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं।
सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें खास ध्यान
1. सिर्फ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें
हमेशा BIS (Bureau of Indian Standards) हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है, जैसे अल्फान्यूमेरिक कोड (AZ4524)।
2. कीमत जरूर क्रॉस चेक करें
खरीदने से पहले सोने का भाव अलग-अलग स्रोतों जैसे IBJA (India Bullion and Jewellers Association) से जरूर जांचें। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है।
असली चांदी की पहचान कैसे करें? जानें 4 आसान तरीके
1. मैग्नेट से जांच करें: शुद्ध चांदी चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होती। अगर कोई चांदी की वस्तु तेज़ी से चुंबक से चिपकती है, तो उसमें दूसरी धातु होने की संभावना हो सकती है। हालांकि, केवल इस टेस्ट से चांदी की शुद्धता तय नहीं की जा सकती।
2. बर्फ से करें जांच: चांदी गर्मी को तेजी से ट्रांसफर करती है। इसलिए चांदी की सतह पर रखी बर्फ सामान्य धातुओं की तुलना में तेजी से पिघल सकती है। यह एक आसान घरेलू संकेत है, लेकिन इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
3. गंध पर ध्यान दें: शुद्ध चांदी में आमतौर पर कोई खास धातु जैसी गंध नहीं होती। अगर वस्तु से तेज या असामान्य धातु की गंध आती है, तो उसमें दूसरी धातु मिली होने की संभावना हो सकती है।
4. सफेद कपड़े से रगड़कर देखें: चांदी को साफ सफेद कपड़े से रगड़ने पर कभी-कभी कपड़े पर काला या गहरा निशान दिखाई दे सकता है। ऐसा चांदी की सतह पर होने वाली ऑक्सीकरण प्रक्रिया के कारण हो सकता है। हालांकि, यह टेस्ट भी अकेले चांदी के असली या नकली होने की पक्की पुष्टि नहीं करता।
ध्यान रखें: घरेलू टेस्ट केवल शुरुआती अंदाजा लगाने में मदद करते हैं। चांदी की शुद्धता की सही पुष्टि के लिए हॉलमार्क, 925 स्टैम्प या प्रोफेशनल प्योरिटी टेस्ट कराना ज्यादा भरोसेमंद तरीका है।
Copper Price: कॉपर की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर, 2026 में 16% चढ़ा; आगे कैसा रहेगा भाव
कॉपर यानी तांबे की कीमत ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तीन महीने का कॉपर फ्यूचर 14,533 डॉलर प्रति टन के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया। 2026 में अब तक इसकी कीमत करीब 16% बढ़ चुकी है।
7 सितंबर को लंदन एक्सचेंज के आधिकारिक भाव के मुताबिक कैश कॉपर 14539-14540 डॉलर प्रति टन के आसपास रहा। वहीं तीन महीने का कॉपर कॉन्ट्रैक्ट 14,443-14,448 डॉलर प्रति टन पर कारोबार करता दिखा।
सप्लाई घटने से बढ़ी कॉपर की कीमत
कॉपर में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह दुनिया के कुछ प्रमुख बाजारों में घटता स्टॉक है। अमेरिका के बाहर कॉपर की उपलब्धता कम हो रही है। इसके साथ डॉलर में कमजोरी और फंड्स की खरीदारी ने भी कीमतों को ऊपर धकेला है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेस की कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट परीन पटनी के मुताबिक बाजार अब सप्लाई में बढ़ती कमी पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात कॉपर के लिए काफी मजबूत नजर आ रहे हैं।
लंदन मेटल एक्सचेंज में करीब 51% कैंसिल्ड वारंट हैं। इसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में 1.21 लाख टन से ज्यादा कॉपर LME के वेयरहाउस सिस्टम से बाहर जा सकता है। इससे बाजार में उपलब्ध स्टॉक और घट सकता है।
चीन में कॉपर का स्टॉक 85% तक गिरा
चीन में भी कॉपर का स्टॉक तेजी से घटा है। शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज यानी SHFE का कॉपर इन्वेंटरी करीब 63 हजार टन रह गया है। मार्च के मध्य के मुकाबले यह करीब 85% कम है। यह जनवरी 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
SHFE में कॉपर की कीमतों का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले आगे के कॉन्ट्रैक्ट से महंगा होना भी तत्काल सप्लाई की कमी का संकेत दे रहा है। LME में भी ऐसी ही स्थिति है। इसे बाजार में कॉपर की तंगी का संकेत माना जा रहा है।
अमेरिका और चीन के स्टॉक में बड़ा अंतर
अमेरिका में कॉपर का स्टॉक अभी ऊंचा है, लेकिन चीन और LME सिस्टम में लगातार गिर रहा है। यह अंतर बाजार के लिए अहम है। एक्सपर्ट के मुताबिक इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका के बाहर कॉपर की सप्लाई तेजी से टाइट हो रही है। संभावित टैरिफ ने भी कीमतों को सपोर्ट दिया है।
AI और EV से बढ़ेगी कॉपर की मांग
कॉपर की कहानी सिर्फ मौजूदा सप्लाई संकट तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद है। AI डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, पावर ग्रिड का विस्तार और दुनिया में बढ़ता इलेक्ट्रिफिकेशन कॉपर की मांग को मजबूत कर रहे हैं। इन सेक्टर्स में बड़ी मात्रा में कॉपर की जरूरत होती है।
हालांकि इतनी तेज तेजी के बाद कीमतों में थोड़ी मुनाफावसूली हो सकती है। शॉर्ट टर्म में कॉपर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि लंबे समय में सप्लाई की कमी बनी रहने की संभावना है। ऐसे में अगर इन्वेंटरी कम रहती है और मांग मजबूत बनी रहती है तो कॉपर में गिरावट को खरीदारी के मौके के तौर पर देखा जा सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
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