कोयला खदानों को देख विकास की एक और तस्वीर सामने आई, पर्यावरण संरक्षण को दी प्राथमिकता
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित पांच दिवसीय अध्ययन एवं मीडिया एक्सपोजर टूर के दूसरे दिन मीडिया दल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा ओपनकास्ट कोयला खदान का भ्रमण किया. कोयला खदानों में धरती के भीतर छिपी ऊर्जा को निकालने की प्रक्रिया देखने पहुंचे उत्तराखंड के 13 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने विकास की एक ऐसी तस्वीर देखी, जिसमें उत्पादन के साथ सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है.
प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया गया
भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने खदान क्षेत्र में पहुंचकर खनन गतिविधियों को करीब से देखा. उन्हें कोयला निकालने से लेकर ओवरबर्डन हटाने, कोयले की हैंडलिंग और परिवहन तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई. उच्च क्षमता वाली आधुनिक मशीनरी, शॉवेल-डंपर संयोजन, सरफेस माइनर और रिपर तकनीक के साथ खनन की निगरानी और संचालन में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से भी प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया गया.
सामाजिक दायित्व और पर्यावरणीय संरक्षण को महत्व
एसईसीएल के महाप्रबंधक क्षेत्रीय संजय मिश्रा ने कहा कि देश के विकास और ऊर्जा जरूरतों में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका है. खाना पकाने के ईंधन से लेकर उद्योगों और विभिन्न ऊर्जा जरूरतों तक कोयला लंबे समय से महत्वपूर्ण स्रोत रहा है. उन्होंने कहा कि कंपनी उत्पादन के साथ श्रमिकों की सुरक्षा, सामाजिक दायित्व और पर्यावरणीय संरक्षण को भी महत्व दे रही है.
59.1 मिलियन टन कोयले का उत्पादन
महाप्रबंधक (ऑपरेशंस) धीरज चौधरी ने पत्रकारों को गेवरा खदान के संचालन, उत्पादन क्षमता और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गेवरा दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी और एशिया की नंबर वन ओपनकास्ट कोयला खदान है. वर्ष 2023-24 में यहां करीब 59.1 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ. खदान से देश के सात राज्यों को कोयले की आपूर्ति होती है और यह भारत के कुल कोयला उत्पादन में करीब छह प्रतिशत का योगदान देती है. उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ाने के साथ सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है. भविष्य की योजनाओं के तहत एसईसीएल अगले वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
सर्वाइवल रेट करीब 70 प्रतिशत बताया
मीडिया दल को खदानों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी गई. इनमें वनीकरण, मियावाकी पौधरोपण, धूल नियंत्रण, खदान के पानी का प्रबंधन और भूमि पुनर्वास शामिल हैं. मियावाकी तकनीक के तहत करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में 20 हजार पौधे लगाए गए हैं और इनका सर्वाइवल रेट करीब 70 प्रतिशत बताया गया. कम भूमि में सघन वन तैयार करने वाली यह तकनीक उत्तराखंड जैसे सीमित भू-भाग वाले राज्य के लिए भी उपयोगी हो सकती है. घना हरित क्षेत्र कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण में भी बेहतर योगदान दे सकता है.
टूर के संचालन अधिकारी पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास, ऊर्जा, सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रबंधन के इस मॉडल का अध्ययन उत्तराखंड के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा. बुधवार को मीडिया प्रतिनिधिमंडल कोरबा में एनटीपीसी और बाल्को का दौरा कर वहां ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों और तकनीकी प्रबंधन की जानकारी लेगा.
एक्सप्लेनर: नए यूपीए फ्रेमवर्क में पी2पी लेनदेन पर नहीं लगेगा चार्ज, ग्राहकों को जारी रहेगी छूट
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। नए यूपीआई फ्रेमवर्क से किसी भी पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि इस तरह के लेनदेन को एमडीआर ढांचे से बाहर रखा गया है। यह जानकारी मंगलवार को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक्सप्लेनर में दी गई।
एक्सप्लेनर में बताया गया कि नए यूपीआई ढांचे के तहत 2,000 रुपए तक के व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतान के साथ-साथ छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे। इसके परिणामस्वरूप, सभी पर्सन-टू-मर्टेंच (पी2एम) लेनदेन में लगभग 96 प्रतिशत लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
एमडीआर केवल 2,000 रुपए से अधिक के पीएएम लेनदेन पर लागू होगा। यह व्यापारिक शुल्क पर लगेगा।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क है। इसे यूपीआई इकोसिस्टम के संचालन और निरंतर विस्तार में सहायता के लिए बैंकों और पेमेंट एप्लिकेशन प्रदाताओं सहित भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा।
0.4 प्रतिशत का मामूली एमडीआर केवल 2,000 रुपए से अधिक के पी2एम लेनदेन पर लागू होगा। एमडीआर को बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स सहित भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच साझा किया जाएगा। 75,000 रुपए और उससे अधिक के लेनदेन के लिए एमडीआर प्रति लेनदेन अधिकतम 300 रुपए होगा।
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट सहित आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर प्रति लेनदेन 5 रुपए का फ्लैट एमडीआर लगेगा। यह फ्लैट शुल्क महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं और कम मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारों के लिए लागत की निश्चितता प्रदान करेगा।
म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलरों से संबंधित भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत का एमडीआर लगेगा, जो प्रति लेनदेन अधिकतम 300 रुपए होगा। कम दर का उद्देश्य औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा भागीदारी को जारी रखने में मदद करना है।
एमडीआर व्यापारी भुगतान इकोसिस्टम के भीतर लिया जाने वाला शुल्क है। यह यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी एमडीआर शुल्क ग्राहकों से न वसूलें। यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बैंकों और एनपीसीआई द्वारा निर्धारित दैनिक लेनदेन सीमाएं (आमतौर पर लेनदेन की श्रेणी के आधार पर 1 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक होती हैं) सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के उपाय हैं। ये शुल्क लगाने की सीमाएं नहीं हैं।
यह फ्रेमवर्क आम लोगों, सूक्ष्म उद्यमों और छोटे कारोबारों की सुरक्षा करता है, जबकि बड़े व्यापारी लेनदेन पर सीमित शुल्क लागू करता है।
छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित फंड स्थापित किया जाएगा। कुल एमडीआर संग्रह के 5 प्रतिशत के बराबर राशि इस फंड में योगदान की जाएगी।
यह फंड यूपीआई की व्यापक स्वीकार्यता, निरंतर उपयोग और भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में छोटे कारोबारों के समावेशन में सहायता करेगा।
एक्सप्लेनर में कहा गया है कि बड़े व्यापारी लेनदेन से उत्पन्न राजस्व बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को भुगतान बुनियादी ढांचे के विस्तार और सुधार में सहायता करेगा, जिसमें ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र भी शामिल हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation







