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वित्त मंत्री सीतारमण ने जेन जी और जेन अल्फा को दी सलाह, ‘विनम्रता और जिम्मेदारी की मजबूत भावना विकसित करना जरूरी’

चेन्नई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि छात्रों को विनम्रता और जिम्मेदारी की मजबूत भावना विकसित करनी चाहिए। उन्होंने प्रसिद्ध विद्वान सर आइजैक न्यूटन का उदाहरण देते हुए कहा कि न्यूटन ने अपनी सफलता में अन्य विद्वानों के योगदान को स्वीकार किया था।

तमिलनाडु के चेन्नई में एमजीआर विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि न्यूटन जैसे महान विद्वान ने भी स्वीकार किया था कि अपनी सफलता हासिल करने और खोजें करने के लिए उन्हें कई अन्य विद्वानों की सहायता की आवश्यकता थी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “न्यूटन जैसे महान विद्वान ने स्वीकार किया था कि अपनी सफलता हासिल करने के लिए उन्हें विभिन्न विद्वानों की सहायता की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा था कि इसी सहयोग के माध्यम से वह अपनी विभिन्न खोजें कर पाए। उन्होंने इसे बेहद विनम्रता के साथ व्यक्त किया।”

वित्त मंत्री ने कहा, “इसलिए छात्रों के लिए विनम्रता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना बेहद महत्वपूर्ण है।”

सीतारमण ने कहा कि न्यूटन द्वारा दूसरों के योगदान को स्वीकार करना उनकी गहरी विनम्रता को दर्शाता है और यह बताता है कि किसी व्यक्ति की उपलब्धियों में दूसरों के योगदान को पहचानना कितना महत्वपूर्ण है।

वित्त मंत्री ने छात्रों से इस दृष्टिकोण से प्रेरणा लेने और अपनी शैक्षणिक तथा पेशेवर यात्रा के साथ-साथ विनम्रता विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर दिया कि व्यक्तिगत और पेशेवर विकास में जिम्मेदारी की भावना भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहनी चाहिए।

वित्त मंत्री ने कहा, “न्यूटन जैसे प्रतिष्ठित विद्वान ने अपने भाषण में कहा था कि उन्हें अपनी सफलता के लिए विभिन्न विद्वानों की मदद की जरूरत पड़ी। इसके माध्यम से उन्होंने बताया कि वह विभिन्न खोजें करने में सक्षम हुए। उन्होंने इसे बेहद विनम्रता के साथ व्यक्त किया।”

सीतारमण ने स्नातक छात्रों से अपनी पेशेवर यात्रा शुरू करते हुए नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभालने और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। वित्त मंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा और मजबूती उसके नागरिकों के स्थिर भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी आधार हैं।

सीतारमण ने स्नातकों से उत्कृष्टता हासिल करने और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के अनुकूल खुद को ढालने के साथ-साथ विनम्र बने रहने की भी अपील की।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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क्या 2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर कटेगा टैक्स? बीजेपी ने सभी दावों को सिरे से किया खारिज; सामने आया ये बयान

UPI Charges Row: देशभर में रोजाना करोड़ों लोग चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक ऑनलाइन भुगतान के लिए यूपीआई का सहारा लेते हैं. ऐसे में जब भी इस डिजिटल व्यवस्था पर कोई नया नियम या शुल्क लगने की सुगबुगाहट होती है, तो आम जनता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. हाल के दिनों में सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में यह दावा तेजी से फैला कि दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर अब सरकार आधा फीसदी टैक्स वसूलेगी.

कांग्रेस और विपक्ष के कई नेताओं ने इसे आम आदमी की जेब पर डाका करार दिया. इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित मालवीय ने सामने आकर इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने साफ किया कि सरकार ने ऐसा कोई टैक्स तय नहीं किया है और लोग झूठी गणनाओं के आधार पर भ्रम फैला रहे हैं.

टैक्स का गणित और अमित मालवीय का जवाब

सोशल मीडिया पर जोर-शोर से प्रचारित किया जा रहा था कि अगर कोई व्यक्ति पांच हजार रुपये भेजेगा तो पच्चीस रुपये कटेंगे और दस हजार रुपये भेजने पर पचास रुपये का फटका लगेगा. अमित मालवीय ने इस गणित की पोल खोलते हुए कहा कि यह सिर्फ शून्य दशमलव पांच फीसदी की एक काल्पनिक दर मानकर तैयार किया गया आंकडा है. किसी भी सरकारी आदेश या शुल्क सूची में ऐसी कोई दर दर्ज नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की ओर से पेश किए जा रहे ये आंकड़े पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इनका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है. सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है जिससे आम नागरिक के खाते से इस तरह की रकम काटी जाए.

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना की असल सच्चाई

इस पूरे विवाद की जड़ में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से चौदह सितंबर को जारी की गई एक अधिसूचना है. इस गजट अधिसूचना में सरकार ने रूपे से जुड़े डेबिट कार्ड और दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन को पूरी तरह सुरक्षित श्रेणी में रखा है. इसका सीधा अर्थ यह है कि दो हजार रुपये तक के भुगतान पर कोई भी बैंक या पेमेंट कंपनी किसी भी रूप में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं वसूल सकती. कुछ लोगों ने इस नियम का उल्टा मतलब निकाल लिया कि अगर दो हजार तक छूट है, तो इससे ऊपर अपने आप टैक्स लग जाएगा. जबकि सच्चाई यह है कि अधिसूचना में दो हजार से अधिक की राशि के लिए किसी भी तरह की आधा फीसदी वाली दर का कोई उल्लेख तक नहीं है.

आम यूपीआई यूजर की जेब पर क्या पड़ेगा असर

देश के करोड़ों आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उनके रोजाना के लेनदेन महंगे हो जाएंगे. सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी पीटूूपी ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा. अगर आप अपने किसी मित्र, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को पांच हजार या दस हजार रुपये भेजते हैं, तो उस पर एक भी नया पैसा अतिरिक्त नहीं कटेगा. सरकार ने यह बात दोहराई है कि आम उपभोक्ता पर कोई नया वित्तीय बोझ डालने की योजना नहीं है. इसलिए आम लोगों को किसी भी तरह की घबराहट या अफवाह के बहकावे में आने की बिल्कुल जरूरत नहीं है.

टैक्स और एमडीआर के अंतर को समझना जरूरी

इस पूरी बहस में टैक्स और मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर के फर्क को मिला दिया गया है, जिससे भ्रम पैदा हुआ. एमडीआर कोई सरकारी टैक्स नहीं होता जो ग्राहक की जेब से वसूला जाए. यह दरअसल वह सेवा शुल्क होता है जो सामान या सेवा बेचने वाला व्यापारी उस बैंक या पेमेंट गेटवे को देता है जिसकी तकनीक के जरिए भुगतान स्वीकार किया गया है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि सरकार और बैंकों के बीच दो हजार से बड़े कारोबारी लेनदेन पर करीब शून्य दशमलव चार फीसदी एमडीआर तय करने को लेकर बातचीत चल रही है. हालांकि यह बातचीत अभी शुरुआती स्तर पर है और सरकार ने इसे अंतिम रूप नहीं दिया है. अगर भविष्य में ऐसा कोई नियम आता भी है, तो उसका असर केवल चुनिंदा बड़े व्यापारियों और प्लेटफॉर्म के बीच के समझौते पर होगा, सीधे उपभोक्ता पर नहीं.

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में सरकार की मदद

भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सरकार खुद यूपीआई के पूरे ढांचे को आर्थिक सहायता देती आई है. वित्त मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2021-22 से लेकर 2024-25 के दौरान सरकार ने डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत रखने के लिए करीब आठ हजार सात सौ तीस करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी है. यह पैसा इसलिए दिया जाता है ताकि बैंकों और तकनीकी कंपनियों का खर्च निकलता रहे और आम जनता को यह आधुनिक सुविधा बिना किसी रुकावट के मुफ्त मिलती रहे. 

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