Ram Mandir का मुख्य निर्माण पूरा, International Ramkatha Museum के लिए 10 अक्टूबर से टेंडर
राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने मंगलवार को कहा कि राम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो गया है और अब समिति का मुख्य ध्यान इंटरनेशनल रामकथा म्यूज़ियम बनाने पर है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 10 अक्टूबर से टेंडर जारी किए जाएंगे। पत्रकारों से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि आज म्यूज़ियम के बारे में भी चर्चा होगी। म्यूज़ियम का सबसे बड़ा काम अब शुरू होने वाला है। हर गैलरी के लिए 10 अक्टूबर से टेंडर जारी किए जाएंगे। कुल 20 गैलरी हैं - गैलरी 1, गैलरी 2, वगैरह। उन्होंने आगे कहा कि हर गैलरी की थीम अलग-अलग है और इसे पहले ही तय किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हर गैलरी के लिए थीम तय कर ली गई है और कहानी भी फाइनल हो गई है। हमारे डायरेक्टर संजीव कुमार सिंह ने पूरी कहानी तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की है। मिश्रा ने कहा कि अब इमर्सिव टेक्नोलॉजी, 3D टेक्नोलॉजी और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल करके वीडियो बनाए जाएंगे।
इसे भी पढ़ें: NSE Co-Location Scam में Chitra Ramkrishna को Supreme Court से झटका
उन्होंने कहा कि अंतिम भुगतान प्रक्रिया के तहत हर कंपनी को मंदिर के निर्माण कार्य के संबंध बैंक गारंटी देनी होगी ताकि यह सुनिश्चत हो सके कि आने वाले वर्षों में उनके काम की गुणवत्ता बनी रहेगी। मिश्रा ने कहा कि बैठकों के दौरान बैंक गारंटी से संबंधित कटौती के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि अंतिम बिल का प्रस्तावित तृतीय-पक्ष ऑडिट भी एक अन्य प्रमुख मुद्दा था। मिश्रा ने कहा कि टाटा पहले से ही परियोजना प्रबंधन परामर्श में शामिल था लेकिन ट्रस्ट ने अतिरिक्त ऑडिट के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को शामिल करने का भी फैसला किया था। उन्होंने कहा कि इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को अंतिम बिल का कम से कम 60 से 70 प्रतिशत ऑडिट करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा इसका चयन कंपनियों के संबंधित ऑर्डर और लागू प्रतिशत गुणांकों के आधार पर किया जाएगा। मिश्रा ने कहा कि मंदिर का निर्माण पूरा होने के साथ अब ध्यान अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय और अन्य संबंधित कार्यों पर है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर के अंदर एक सभागार और परिसर के बाहर एक अन्य सुविधा निर्माणाधीन है जिसके काम में लगभग तीन से चार महीने की देरी हुई।
इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar बोले जनता डरे तो Democracy तानाशाही बन जाती है
मिश्रा ने कहा हमें उम्मीद है कि जनवरी-फरवरी तक काम जरूर पूरा हो जाएगा।’’ मिश्रा मंदिर परिसर और संबंधित परियोजनाओं की तीन दिवसीय समीक्षा के लिए रविवार को अयोध्या पहुंचे। पहले दिन उन्होंने एक स्मारक स्तंभ का निरीक्षण किया जिसका कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा उन्होंने निर्माण एवं अन्य संबंधित परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने से पहले पुराने अस्थायी मंदिर में सौंदर्यीकरण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने सोमवार को मंदिर परिसर के अंदर निर्धारित निर्माण कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों, ठेकेदारों एवं मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं।
दुष्कर्म पीड़िता पर जबरन मातृत्व थोपना गरिमा से जीने के अधिकार का हनन, Delhi High Court ने 30 हफ्ते का गर्भ गिराने की दी मंजूरी
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि रेप सर्वाइवर को यौन हमले से हुई प्रेग्नेंसी को जारी रखने और उसकी मर्ज़ी के बिना उसे माँ बनने के लिए मजबूर करना, सम्मान के साथ जीने के उसके अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। कोर्ट ने यह बात 15 साल की रेप सर्वाइवर की ओर से दायर याचिका को मंज़ूरी देते हुए कही, जिसमें प्रेग्नेंसी खत्म करने की मांग की गई थी। यह प्रेग्नेंसी 30 हफ़्ते से ज़्यादा की हो चुकी थी। जस्टिस मधु जैन ने कहा कि यौन हमले से जुड़े मामलों में, सिर्फ़ इस बात को अकेले आधार नहीं माना जा सकता कि प्रेग्नेंसी 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट' के तहत तय कानूनी सीमा से आगे निकल गई है।
बच्चे की पहचान सिर्फ़ उसकी माँ के विवरण तक सीमित नहीं की जा सकती
जस्टिस जैन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 या 32 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए अदालतों को नाबालिग के सर्वोत्तम हित और कल्याण को उचित प्राथमिकता देनी चाहिए, साथ ही MTP एक्ट के तहत कानूनी ढांचे को भी ध्यान में रखना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताया और कहा कि लड़की सिर्फ़ 15 साल की थी, वह पहले ही कथित तौर पर एक भयानक यौन हमले का सदमा झेल चुकी थी और उसने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। अदालत ने साथ ही कहा कि किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया के लिए महिला की शारीरिक स्थिति और चिकित्सा व्यवहार्यता की जांच, तथा सभी जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन करना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 या 32 के तहत प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करते हुए और एमटीपी अधिनियम के कानूनी ढांचे को ध्यान में रखते हुए अदालत को नाबालिग पीड़िता के हितों और कल्याण को उचित प्राथमिकता देनी चाहिए।
इसे भी पढ़ें: 2020 Delhi Riots: भजनपुरा हिंसा मामले में 5 दोषी करार, कोर्ट ने आगजनी के आरोप से किया बरी
अदालत ने कहा कि उसे यह कहना पड़ रहा है कि ऐसे मामले ‘गहरी पीड़ा’ छोड़ जाते हैं। उसने इस तथ्य पर संज्ञान लिया कि याचिकाकर्ता केवल 15 साल की बच्ची है, जो पहले ही एक भयानक यौन हमले का सदमा झेल चुकी है और उसकी मुश्किल स्थिति को और बढ़ाने वाली बात यह है कि उसने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है। अदालत ने कहा कि जिस उम्र में किसी बच्चे को सुरक्षा और देखभाल मिलनी चाहिए और उसे सुरक्षित व सम्मानजनक माहौल में बढ़ने का मौका मिलना चाहिए, उस उम्र में उसे ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिनका सामना किसी भी बच्चे को कभी नहीं करना चाहिए। न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘इस अदालत की नजर में, 15 साल की बच्ची को केवल इसलिए ‘मां’ नहीं कहा जा सकता क्योंकि यौन हिंसा के कारण उसे गर्भवती होने के लिए मजबूर किया गया है। इसमें कहा गया कि अदालत के संज्ञान में यह तथ्य है कि माता-पिता दोनों के न रहने से लड़की के हालात और मुश्किल हो गए हैं।
इसे भी पढ़ें: Disha Salian Death: बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने दर्ज की FIR
अदालत ने कहा कि कानून भले ही उपाय और प्रक्रियाएं उपलब्ध कराए, लेकिन उसका कोई भी आदेश उस सदमे को मिटा नहीं सकता जो बच्ची ने सहा है। अदालत ने याचिका को मंजूरी देते हुए लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय और एस के अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह लड़की का गर्भपात कराने की यथाशीघ्र व्यवस्था करें और प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखें। अदालत ने चिकित्सकों को निर्देश दिया कि वे दुष्कर्म के मामले में दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में डीएनए पहचान और अन्य प्रक्रिया के लिए ऊत्तकों या भ्रूण के हिस्से को सुरक्षित रखें। पीठ ने सरकार को गर्भपात से जुड़े सभी खर्च उठाने का निर्देश दिया, जिसमें प्रक्रिया, दवाएं, जांच, अस्पताल में भर्ती, भोजन और इलाज से जुड़ी अन्य जरूरतें शामिल हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि अगर चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान बच्चा जीवित पैदा होता है, तो उसकी चिकित्सा देखभाल के लिए सभी संभव उपाय किए जाएं और बाल कल्याण समिति कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








