सरकारी दफ्तरों में स्वच्छता अभियान: 5 वर्षों में कबाड़ बेचकर जुटाए ₹5100 करोड़
सरकारी कार्यालयों में चलाए गए विशेष अभियानों के तहत पिछले पांच वर्षों में कबाड़ बेचकर 5,100 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त किया गया है। केंद्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इन अभियानों का उद्देश्य सभी सरकारी दफ्तरों में ‘स्वच्छता’ को संस्थागत रूप देना है।
कार्मिक मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि वर्ष 2021 से इस अभियान के पांच सालाना संस्करणों और सचिवालय में सुधारों की मासिक निगरानी (जुलाई 2026 तक) के जरिए 24.20 लाख से अधिक स्थलों पर अभियान चलाया गया, 180.48 लाख से अधिक फ़ाइलों को हटाया या बंद किया गया है, और कबाड़ बेचकर 5,102.91 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि अकेले ‘अभियान-5’ में 11.6 लाख स्थलों से कुल 29.52 लाख फाइलों को हटाया गया, 233.75 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थल खाली कराया गया और कबाड़ बेचकर लगभग 833.92 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया। कार्मिक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह बुधवार को ‘अभियान 6’ की प्रगति की निगरानी के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत करेंगे।
यह अभियान दो अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच चलाया जाएगा। इससे पहले 16 सितंबर से 30 सितंबर तक तैयारी का चरण होगा। तैयारी के चरण के दौरान, मंत्रालय और विभाग चुनिंदा श्रेणियों में लंबित मामलों की पहचान करेंगे, जमीनी स्तर के कर्मचारियों को एकत्र करेंगे, अभियान की जगहों को अंतिम रूप देंगे, रिकॉर्ड की समीक्षा करेंगे और जगह के प्रबंधन की योजना बनाने के साथ-साथ चिह्नित कबाड़ का निस्तारण करेंगे।
बयान के मुताबिक 19 से 25 दिसंबर तक चलने वाले ‘सुशासन सप्ताह’के दौरान बेहतरीन तौर-तरीके पेश किए जाएंगे। कार्मिक मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को होने वाले कार्यक्रम के दौरान, केंद्र के सभी 84 मंत्रालयों और विभागों में ‘अभियान 6’ के नोडल अधिकारियों, जन शिकायतों से जुड़े नोडल अधिकारियों और अपीलीय अधिकारियों की एक बैठक होगी। बयान के मुताबिक बैठक को प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), डाक, कोयला, खान और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संबोधित करेंगे।
Kashmir में पहली बार Theatre Conference का आयोजन, नाट्य विरासत को मिलेगा बढ़ावा
कश्मीर में अपनी तरह का पहला थिएटर सम्मेलन आयोजित किया गया है। इसका मकसद इलाके की थिएटर विरासत की ओर ध्यान दिलाना और लंबे समय से चली आ रही परफॉर्मिंग आर्ट्स की परंपराओं को बचाने और बढ़ावा देने की ज़रूरत को उजागर करना है। इस सम्मेलन का मकसद कश्मीर की थिएटर विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही, यह थिएटर से जुड़े लोगों और संस्कृति से जुड़े हितधारकों को इस इलाके में थिएटर के विकास और उसकी अहमियत पर चर्चा करने के लिए एक मंच भी देता है।
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यह पहल कश्मीरी परफॉर्मिंग आर्ट्स को मज़बूत करने और स्थानीय थिएटर कलाकारों के लिए मंच तैयार करने की नई कोशिशों के तहत की गई है। घाटी में हाल की थिएटर पहलों में कश्मीरी भाषा के थिएटर को फिर से जीवित करने और दर्शकों को स्थानीय कहानियों और कलाकारों से जुड़ने का मौका देने पर भी ध्यान दिया गया है। यह कॉन्फ्रेंस थिएटर को सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, कहानी कहने और संस्कृति को बचाने के एक ज़रिया के तौर पर पेश करती है। इस क्षेत्र की थिएटर विरासत पर इसका फ़ोकस ऐसे समय में है जब सांस्कृतिक संस्थान और कलाकार जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्य और प्रदर्शन कलाओं के लिए ज़्यादा जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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इस क्षेत्र में थिएटर के पूरे माहौल में युवा कलाकारों को बढ़ावा देने और उन्हें पेशेवर ट्रेनिंग देने की कोशिशें हुई हैं। 2026 में, 'अदबी मरकज़ कामराज़' ने अपनी सांस्कृतिक संरक्षण की व्यापक कोशिशों के तहत, स्थानीय कलाकारों को पेशेवर ट्रेनिंग देने के लिए घाटी के बाहर के विशेषज्ञों के साथ एक थिएटर वर्कशॉप आयोजित करने की योजना की घोषणा की। इसलिए, यह कॉन्फ्रेंस न केवल कश्मीर की थिएटर परंपरा पर पीछे मुड़कर देखने का एक मौक़ा है, बल्कि इसके भविष्य पर विचार करने का भी एक अवसर है — जिसमें यह भी शामिल है कि थिएटर कैसे नए दर्शकों को जोड़ सकता है, कलाकारों को तैयार कर सकता है और क्षेत्रीय सांस्कृतिक कहानियों को संजोकर रख सकता है।
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