Delhi में 10000 छात्रों के लिए बनेंगे Hostel, CM Rekha Gupta ने किया ऐलान
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार ने 10,000 छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने का फ़ैसला किया है, ताकि उनकी सुरक्षा और किफ़ायती रहने की जगह मिल सके। ये हॉस्टल लड़के और लड़कियों, दोनों तरह के छात्रों के लिए होंगे। दिल्ली की किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र इन सुविधाओं का फ़ायदा उठा सकेंगे। हमने हॉस्टल बनाने में सक्षम संबंधित विभागों के साथ बैठकें की हैं, सही जगहें चुनी हैं और एक पॉलिसी का ड्राफ़्ट तैयार करना शुरू कर दिया है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने छात्रों की ज़रूरतों और इन हॉस्टलों में ज़रूरी सुविधाओं पर अच्छी तरह से विचार किया है। मैं आपको भरोसा दिलाती हूँ कि हम ऐसे हॉस्टल बनाएँगे जहाँ देश भर के माता-पिता पूरी निश्चिंतता के साथ अपने बच्चों को भेज सकें, और जहाँ छात्र—खाने-पीने या रहने की चिंता से मुक्त होकर—पूरी तरह से अपने सपनों को पूरा करने पर ध्यान दे सकें। सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार इमारतों की जांच बढ़ाएगी, सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करेगी और पूरी राजधानी में पेइंग गेस्ट (PG) आवासों से जुड़े नियमों की समीक्षा करेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में इमारत की सुरक्षा, छात्रों के रहने की व्यवस्था और PG नियमों पर उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई एक संयुक्त समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि बैठक में सख्त सुरक्षा जांच, ज़िम्मेदारी तय करने और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर ज़ोर दिया गया। मुख्यमंत्री गुप्ता ने घोषणा की कि शहरी विकास मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता वाली एक समिति मौजूदा PG नियमों की समीक्षा करेगी। यह समिति विश्वविद्यालयों, दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के माध्यम से छात्रों के लिए आवास की सुविधा बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार करेगी।
#WATCH | Delhi CM Rekha Gupta says, "The Delhi government has decided to construct hostels for 10,000 students, ensuring their safety, security, and access to affordable housing. These hostels will cater to both male and female students. Any student enrolled in a university or… pic.twitter.com/KCDQYwzm0I
— ANI (@ANI) September 15, 2026
तेंदुआ शिकार मामला: Wildlife SOS प्रमुख की याचिका पर सुनवाई को Supreme Court तैयार
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 15 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी, जिसमें तेंदुए के कथित शिकार के मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस लेने के मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। सत्यनारायण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ से याचिका पर तुरंत सुनवाई करने की अपील की। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इसे सूचीबद्ध किया जायेगा।’’ यह मामला तेंदुओं के कथित शिकार की मध्यप्रदेश राज्य बाघ कार्यबल (एसटीएसएफ) द्वारा जांच से जुड़ा है।
इन तेंदुओं की खालें उत्तर प्रदेश के आगरा में बरामद हुई थीं। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने हाल में वन्यजीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 के तहत दायर की गयी दो याचिकाओं को खारिज कर दिया था और सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को वापस ले लिया था। उच्च न्यायालय ने उन्हें 21 सितंबर को एसटीएसएफ के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया था।
एक खबर के मुताबिक, मध्यप्रदेश वन विभाग ने आरोप लगाया था कि सत्यनारायण ने अपने खिलाफ जारी तीसरा समन और गिरफ्तारी वारंट छिपाया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने उन्हें दी गई सुरक्षा वापस ले ली। विभाग ने आरोप लगाया था कि वह श्योपुर और मुरैना ज़िलों में 10 तेंदुओं के अवैध शिकार की जांच में शामिल नहीं हुए।
वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रमुख ने राज्य के इस दावे को खारिज कर दिया कि वह ‘फरार’ हैं। संगठन का कहना है कि अवैध शिकार के खिलाफ उसकी इकाई ने कथित गिरोह का पता लगाने में अधिकारियों की मदद की थी और कानूनी सुरक्षा मांगने का मतलब जांच में सहयोग करने से इनकार करना नहीं है। दवे ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ को बताया कि सत्यनारायण के संगठन ने अधिकारियों को तेंदुए की खालें बरामद करने में मदद की थी, लेकिन बाद में उन्हें ही इस मामले में फंसा दिया गया।
दवे ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम के तहत दायर की गयी दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हमारा संबंध एक गैर सरकारी संगठन से है और हमने ही तेंदुए की खालें बरामद करवाई थीं। अब राज्य सरकार ने हमें ही इस मामले में फंसा दिया है।’’ खंडपीठ ने पूछा, ‘‘आप घर पर तेंदुए रखते थे?’’ दवे ने अपने मुवक्किल की ओेर से कहा,“नहीं।
हमने ही आगरा में खालें बरामद करवाई थीं। बरामदगी उत्तर प्रदेश में हुई थी और इसके बाद मामला मध्यप्रदेश में हाथ में लिया गया।” उन्होंने कहा कि सत्यनारायण अधिकारियों के साथ सहयोग करने और जांच एजेंसी के सामने पेश होने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा चाहिए।
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