Explainer: क्या है किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट? विवाद पर गृहमंत्री अमित शाह ने 6 राज्यों के CM के साथ की बैठक
What is Kishau Multipurpose Dam Project: दिल्ली में मंगलवार को देशभर के 6 मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई. गृहमंत्री अमित शाह के बुलावे पर गृह मंत्रालय में बैठक हुई. कुछ मुख्यमंत्री मंत्रालय पहुंचे तो कुछ ने ऑनलानइ बैठक ज्वाइन की. बैठक का मुद्दा किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट रहा. बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्री शामिल रहे. आइए विस्तार से समझते हैं कि किशाऊ डैम प्रोजेक्ट क्या है और राज्यों में इसको लेकर क्या विवाद है.
#WATCH | Delhi: Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath and Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami arrive for a meeting chaired by Union Home Minister Amit Shah on the Kishau Multipurpose Dam Project issue. https://t.co/2yUBLVxSsA pic.twitter.com/2YC5oWZz6K
— ANI (@ANI) September 15, 2026
क्या है किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट?
किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर बनाई जा रही एक बड़ी जल परियोजना है. टोंस नदी, यमुना की प्रमुख सहायक नदी है. इस परियोजना के तहत करीब 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध बनाया जाएगा. यहां से 660 मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना है. परियोजना में करीब 1,324 मिलियन घन मीटर पानी जमा किया जा सकेगा. इस पानी का इस्तेमाल दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पेयजल और सिंचाई के लिए किया जाएगा. परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है.
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शामिल राज्य और समझौता
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच सहमति बनी है. यह परियोजना यमुना नदी के लिए भी काफी अहम मानी जा रही है. खासकर गर्मियों और सूखे के समय बांध से यमुना में पानी का प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी. इससे नदी में पानी की उपलब्धता और स्वच्छ प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.
मुख्य विशेषताएं और क्षमता
किशाऊ परियोजना के तहत टोंस नदी पर 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध बनाया जाएगा. इसके बनने के बाद यह देश के सबसे ऊंचे बांधों में शामिल हो सकता है. इस बांध से 660 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी. इसके लिए 165 मेगावाट की चार टर्बाइन लगाई जाएंगी. बांध में करीब 1,324 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा करने की क्षमता होगी. इससे बिजली उत्पादन के साथ-साथ पानी की जरूरत को पूरा करने में भी मदद मिलेगी.
क्या है बजट और फंडिंग पैटर्न?
किशाऊ परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये है. इसके जल से जुड़े काम में 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि बाकी 10 फीसदी खर्च छह लाभार्थी राज्य मिलकर उठाएंगे. राज्यों के बीच हुए समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश के हिस्से का कुछ पानी दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा. इसके बदले दिल्ली और राजस्थान, बिजली उत्पादन से जुड़े हिस्से में हिमाचल प्रदेश के खर्च में योगदान देंगे. परियोजना के निर्माण और देखरेख के लिए हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड ने मिलकर किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड (KCL) नाम की संयुक्त कंपनी बनाई है.
प्रोजेक्ट को लेकर क्या है पूरा विवाद?
किशाऊ डैम प्रोजेक्ट को लेकर सबसे बड़ा विवाद लागत और बिजली उत्पादन का खर्च राज्यों के बीच बांटने को लेकर था. हिमाचल प्रदेश का कहना था कि राज्य अपनी जमीन और पानी दे रहा है, तो उसे बिजली उत्पादन और परियोजना के निर्माण का बड़ा आर्थिक बोझ क्यों उठाना चाहिए. पुराने समझौते में हिमाचल के हिस्से में ज्यादा खर्च आने की बात थी, जिसका राज्य सरकार ने विरोध किया.
हिमाचल ने यह भी कहा था कि पड़ोसी राज्यों और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) पर जो पुराना पैसा बकाया है, उसका भुगतान होने के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाए. इसके अलावा, बांध बनने से बड़े इलाके में जमीन डूबने, लोगों के विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरण को नुकसान की चिंता भी जताई गई थी. परियोजना से जुड़े इलाकों में निर्माण से पहले जमीन की कथित अवैध खरीद-फरोख्त के मामले भी सामने आए थे.
मुख्यमंत्रियों के अलावा अन्य मंत्री और सचिव हुए शामिल
गृहमंत्री की बैठक में 6 राज्यों के ज्यादातर मुख्यमंत्रियों के अलावा राज्यों के मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे. बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए. इनमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन भी रहे. केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल, जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, जल संसाधन सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय और जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे.
3 महीने बाद हुई बैठक
यह बैठक 16 जून को केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई पिछली बैठक के करीब तीन महीने बाद हुई है. उस बैठक में लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच सहमति बनी थी. केंद्रीय गृह मंत्री की पहल के बाद हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी. इसके लिए सभी राज्यों ने किशाऊ परियोजना को लागू करने से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की बात भी मानी थी. इस परियोजना का एक अहम उद्देश्य यमुना नदी के पुनरुद्धार और उसमें पानी का प्रवाह बनाए रखना है.
मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रीमंडल के सामने रखा जाएगा
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जा सकता है. बैठक में तय हुआ कि परियोजना के जल से जुड़े काम की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार उठाएगी. बाकी 10 फीसदी खर्च छहों भागीदार राज्य मिलकर उठाएंगे. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी है. इसके बदले दिल्ली और राजस्थान, बिजली उत्पादन से जुड़े हिस्से में हिमाचल प्रदेश की लागत में योगदान देंगे.
सरकार का मानना है कि यह फैसला यमुना नदी में पानी का प्रवाह बढ़ाने और नदी के पुनरुद्धार की दिशा में अहम कदम होगा. किशाऊ बांध टोंस नदी पर बनाया जा रहा है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है. बांध में जमा पानी का इस्तेमाल सिंचाई, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाएगा.
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मेघालय के मुख्यमंत्री ने तीन मोबाइल चिकित्सा इकाइयों का किया शुभारंभ, राज्य में अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने का लक्ष्य
शिलांग, 15 सितंबर (आईएएनएस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने मंगलवार को शिलांग में तीन मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) का उद्घाटन किया, जिनका उद्देश्य राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों तक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और निवारक सेवाएं पहुंचाना है।
ये तीनों एमएमयू मावपात, पिनुरसला और बाघमारा के समुदायों की सेवा करेंगे, जिनमें अनुमानित 93 गांव और दो लाख से अधिक लोगों की संयुक्त आबादी शामिल होगी।
इन सामुदायिक एवं ग्रामीण विकास परियोजनाओं (एमएमयू) के अंतर्गत मावपात के लगभग 45 गांव, पिनुरसला के 26 और बाघमारा के 22 गांव शामिल होंगे। मावपात और पिनुरसला पूर्वी खासी हिल्स जिले के सामुदायिक एवं ग्रामीण विकास ब्लॉक हैं, जबकि बाघमारा दक्षिण गारो हिल्स जिले में स्थित है।
प्रत्येक मोबाइल यूनिट में डॉक्टर और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी तैनात होंगे और यह आवश्यक चिकित्सा उपकरण, दवाइयां और तकनीक-आधारित इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड सेवाओं से सुसज्जित होगी। ये टीमें स्थानीय समुदायों में परामर्श, बुनियादी निदान, उपचार और अनुवर्ती देखभाल (इलाज के बाद मरीज की सेहत पर नजर रखना) प्रदान करेंगी, साथ ही आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं में रेफरल की सुविधा भी प्रदान करेंगी।
इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) की रोकथाम, जांच और प्रबंधन होगा। यह कार्यक्रम नियमित जांच, शीघ्र निदान और दीर्घकालिक बीमारियों के निरंतर प्रबंधन को बढ़ावा देगा।
एमएमयू स्थानीय स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं के आधार पर लक्षित हस्तक्षेपों का भी समर्थन करेंगे, जिनमें कैंसर की जांच और आंखों की स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि उनकी सरकार ने 2018 से स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता दी है, और इस बात पर जोर दिया कि यदि विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक नहीं पहुंचता है तो विकास का कोई खास अर्थ नहीं रह जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, एम्बुलेंस का शुभारंभ करना सबसे आसान काम है। असली खुशी तब मिलेगी जब हम लोगों की जान बचा पाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस पहल का मूल्यांकन इसके शुभारंभ के बजाय मरीजों पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर मोबाइल यूनिटों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए तो वे मेघालय में अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
मुख्यमंत्री संगमा ने प्रौद्योगिकी-आधारित स्वास्थ्य देखभाल संबंधी हस्तक्षेपों को समर्थन देने के लिए मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी की आवश्यकता के बारे में विस्तार से बताया।
--आईएएनएस
एसएके/एएस
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