कम खाने पर भी बढ़ रहा है वजन? जानिए थायरॉइड बिगड़ने पर शरीर में क्या-क्या लक्षण दिखते हैं
Weight Gain: क्या आप भी कम खाते हैं और फिजिकली एक्टिव रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है? आइए जानते हैं थायरॉइड बिगड़ने पर शरीर पर क्या असर पड़ सकता है.
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झारखंड के जैविक उत्पादों को मिलेगा ग्लोबल बाजार, किसानों की बढ़ेगी कमाई
Jharkhand Organic Products: झारखंड के किसानों के लिए अच्छी खबर है. राज्य के जैविक और प्राकृतिक उत्पाद अब देश के साथ-साथ विदेशों में भी पहुंच सकते हैं. केंद्र सरकार ने इसके लिए नई योजना तैयार की है. इसके तहत जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़े क्लस्टरों को मजबूत किया जाएगा.
केंद्र ने नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP जारी की है. इसकी जानकारी झारखंड समेत सभी राज्यों को दी गई है. नई व्यवस्था का फोकस किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर है. इससे झारखंड के पारंपरिक और प्राकृतिक उत्पादों को नई पहचान मिल सकती है. नई व्यवस्था में पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी. झारखंड के कई इलाके इस श्रेणी में आते हैं. यहां बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं.
कई इलाकों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल भी कम होता है. ऐसे क्षेत्रों में जैविक और प्राकृतिक खेती की अच्छी संभावनाएं हैं. सरकार अब ऐसे किसान समूहों की पहचान करेगी. बेहतर काम करने वाले क्लस्टर चुने जाएंगे. किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO को भी मजबूत किया जाएगा. स्वयं सहायता समूहों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा.
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विदेश भेजने के लिए आसान होगी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया
विदेशों में जैविक उत्पाद बेचने के लिए प्रमाणन जरूरी है. इसी वजह से सरकार ने NPOP सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने की पहल की है. यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट के बाजारों में जैविक उत्पादों के लिए थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन जरूरी होता है. सरकार किसानों और उत्पादक समूहों को वित्तीय मदद देने की योजना बना रही है. इससे उन किसानों को भी फायदा हो सकता है, जिनके पास अभी केवल PGS प्रमाणन है. वे आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए जरूरी प्रमाणन हासिल कर सकेंगे.
कोल्ड स्टोरेज से पैकेजिंग तक मिलेगी सुविधा
सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है. उत्पादों को सुरक्षित रखना और सही तरीके से बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए क्लस्टरों में कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इनमें कोल्ड स्टोरेज शामिल है. प्रोसेसिंग यूनिट भी बनाई जा सकती हैं. ग्रेडिंग और पैकेजिंग की सुविधा मिलेगी. उत्पादों को सुखाने के लिए भी व्यवस्था की जाएगी. झारखंड में टमाटर, मटर, दूसरी सब्जियों और मिलेट्स का अच्छा उत्पादन होता है. लेकिन कई जगह भंडारण की पर्याप्त सुविधा नहीं है. इससे किसानों की उपज खराब हो जाती है. नई व्यवस्था से इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है. PKVY और RKVY जैसी योजनाओं के तहत चुने गए क्लस्टरों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकती हैं.
महुआ और चिरौंजी जैसे उत्पादों को भी मिलेगा फायदा
झारखंड के जंगलों में कई ऐसे उत्पाद मिलते हैं, जिनकी देश-विदेश में मांग है. इनमें महुआ, चिरौंजी और करंज जैसे उत्पाद शामिल हैं. इन उत्पादों को भी बेहतर बाजार देने की तैयारी है. सरकार ऐसे प्राकृतिक उत्पादों की पहचान कर सकती है. उनकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जाएगा. राज्य के खास और GI टैग वाले उत्पादों को भी वैश्विक बाजार में प्रमोट किया जा सकता है. इससे जंगलों पर निर्भर स्थानीय संग्राहकों को फायदा मिल सकता है.
नेशनल ब्रांड से जुड़ेंगे झारखंड के उत्पाद
झारखंड के जैविक उत्पादों को नेशनल को-ऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड यानी NCOL के 'नेशनल ब्रांड' से जोड़ने की योजना है. इससे किसानों के उत्पाद बड़े बाजार तक पहुंच सकते हैं. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. बड़े रिटेल स्टोर तक उत्पाद पहुंचाने की कोशिश होगी. बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग से उत्पादों की पहचान बढ़ेगी. किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है.
किसानों के साथ संग्राहकों को भी फायदा
सिधकोफेड के सचिव राकेश कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड में जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों से कई प्राकृतिक उत्पाद मिलते हैं. इन उत्पादों को बेहतर बाजार की जरूरत है. नई नीति से ऐसे उत्पादों को बढ़ावा मिल सकता है. इसका फायदा किसानों के साथ जंगलों से उत्पाद जुटाने वाले स्थानीय संग्राहकों को भी मिल सकता है.
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