चारधाम यात्रा ने रचा नया इतिहास: 147 दिनों में अब तक 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
Char Dham Yatra: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. बेहतर व्यवस्थाओं, कुशल प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए गए इंतजामों का असर यात्रा में साफ दिखाई दे रहा है. गंगोत्री धाम में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या ने अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है. वहीं, यमुनोत्री धाम में भी दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सात लाख के पार पहुंच गई है. चारधाम यात्रा के 147 दिनों में अब तक 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष अब तक 50,28,497 श्रद्धालु बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में दर्शन कर चुके हैं. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 45,09,324 थी. यानी इस बार पिछले साल के मुकाबले श्रद्धालुओं की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. खास बात यह है कि यात्रा के लिए अभी करीब दो महीने का समय बाकी है. ऐसे में आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है.
गंगोत्री धाम में टूटा पुराना रिकॉर्ड
गंगोत्री धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया इतिहास बनाया है. अब तक 7,84,321 श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन के लिए गंगोत्री पहुंच चुके हैं. इससे पहले गंगोत्री में सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का रिकॉर्ड वर्ष 2022 में बना था. उस साल 7,81,961 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे. इसके बाद वर्ष 2023 में 7,12,749 और वर्ष 2025 में 7,58,249 श्रद्धालु गंगोत्री धाम पहुंचे थे. इस वर्ष अब तक 7.84 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने के साथ ही पुराने सभी रिकॉर्ड पीछे छूट गए हैं. यह आंकड़ा उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के बढ़ते आकर्षण को भी दिखाता है.
यमुनोत्री में भी सात लाख से ज्यादा श्रद्धालु
गंगोत्री की तरह यमुनोत्री धाम में भी इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है. अब तक 7,03,302 श्रद्धालु यमुनोत्री धाम में दर्शन कर चुके हैं. पिछले वर्ष पूरे यात्रा सीजन में यहां 6,44,637 श्रद्धालु पहुंचे थे. इस तरह इस बार यात्रा अभी जारी रहने के दौरान ही पिछले साल का आंकड़ा पीछे छूट गया है.
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बद्रीनाथ धाम में भी बढ़ा उत्साह
चारधाम यात्रा के प्रमुख धामों में शामिल बद्रीनाथ में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. अब तक 17,28,578 श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर चुके हैं. पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां 13,82,845 श्रद्धालु पहुंचे थे. इस तरह बद्रीनाथ धाम में भी इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. वहीं, सिखों के प्रमुख तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिल रहा है. यहां अब तक 3,19,135 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं. यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी उत्साहजनक है.
सुरक्षित और सुगम यात्रा पर सरकार का जोर
उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने पर लगातार जोर दे रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा का पहला चरण बेहद सफल रहा है और दूसरे चरण में भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के पहुंचने की उम्मीद है. मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यात्रा मार्गों और धामों में जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं. साथ ही, यात्रा से जुड़े सभी जिलों में आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके.
धार्मिक पर्यटन के लिए भी सकारात्मक संकेत
चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के लिए भी सकारात्मक संकेत है. गंगोत्री और यमुनोत्री में टूटे रिकॉर्ड, बद्रीनाथ में बढ़ती संख्या और हेमकुंड साहिब में श्रद्धालुओं का उत्साह यह बताता है कि इस वर्ष उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या नया मुकाम हासिल कर सकती है. बेहतर व्यवस्थाओं और सुरक्षित यात्रा के प्रयासों के साथ चारधाम यात्रा अब एक और बड़े रिकॉर्ड की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है.
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भूटान, नेपाल और बांग्लादेश तक पहुंचेगी भारतीय रेल, पूर्वोत्तर बनेगा अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी का नया गलियारा
गुवाहाटी, 15 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्वोत्तर अब सिर्फ देश के दूरस्थ हिस्सों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की कवायद तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय रेल इस क्षेत्र को पड़ोसी देशों के साथ व्यापार, पर्यटन और रणनीतिक संपर्क के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ रेल संपर्क मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
इससे आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत अंतर्राष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है। एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), लखनऊ की ओर से पूर्वोत्तर के भ्रमण पर आए उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के दल ने सोमवार को मालीगांव स्थित पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान रेलवे अधिकारियों ने पूर्वोत्तर में चल रही रेल परियोजनाओं, अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी, यात्री सुविधाओं, सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी केके शर्मा ने बताया कि भारत की अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए पड़ोसी देशों के साथ रेल संपर्क बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भूटान के साथ बनारहाट-सामत्से और कोकराझार-गेलेफू रेल परियोजनाओं को हाल ही में मंजूरी मिली है और इनके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। दोनों परियोजनाओं को 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इनके पूरा होने के बाद भारत और भूटान के बीच व्यापार तथा पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
नेपाल के साथ भी रेल संपर्क को विस्तार दिया जा रहा है। जोगबनी से विराटनगर के लिए कंटेनर ट्रेन चलाई जा चुकी है और इस संपर्क को आगे विस्तारित करने की दिशा में काम जारी है। वहीं, बांग्लादेश के साथ अगरतला-अखौरा रेल परियोजना का भौतिक निर्माण पूरा हो चुका है। महिषासन जीरो प्वाइंट पर भी काम अंतिम चरण में है और करीब 170 मीटर का काम शेष बताया गया है। इन परियोजनाओं से पूर्वोत्तर के लिए पड़ोसी देशों तक माल और यात्रियों की आवाजाही के नए रास्ते खुलने की संभावना है।
पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क विस्तार को अगले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। रेलवे ने 2029 तक सभी पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने और पड़ोसी देशों के साथ कनेक्टिविटी को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। रेलवे के अनुसार, पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में करीब दो हजार किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गई हैं। वर्ष 2014 से पहले इस क्षेत्र में रेल विद्युतीकरण की स्थिति बेहद सीमित थी, जबकि अब पूरा नेटवर्क शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य के करीब पहुंच चुका है।
मिजोरम की राजधानी आइजोल तक पहली बार ट्रेन पहुंचना इस बदलाव की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। बैराबी-सैरांग परियोजना के जरिए पिछले वर्ष 13 सितंबर को आइजोल को रेल संपर्क मिला। इसके बाद सिक्किम, मणिपुर और नागालैंड को रेल नेटवर्क से जोड़ने की परियोजनाओं पर भी तेजी से काम हो रहा है। रेलवे की योजना सेवोक-रंगपो परियोजना के जरिए 2027 तक सिक्किम को रेल नेटवर्क से जोड़ने की है। वहीं, 2028 तक मणिपुर की राजधानी इंफाल और 2029 तक नागालैंड को रेल नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। नागालैंड के मामले में यह बदलाव खास महत्व रखता है।
दीमापुर में 1903 में पहला स्टेशन बनने के करीब एक सदी बाद वर्ष 2022 में राज्य को शोखुवी के रूप में दूसरा रेलवे स्टेशन मिला। पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को भी परियोजनाओं का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। रेलवे ने हाथियों और अन्य वन्यजीवों को रेल हादसों से बचाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। एनएफआर के अनुसार, करीब 226 किलोमीटर लंबे एलीफेंट कॉरिडोर में एआई आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (आईडीएस) लगाया जा रहा है। यह प्रणाली रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर समय रहते चेतावनी देने में मदद करती है, जिससे ट्रेन और वन्यजीवों के बीच टक्कर की घटनाओं को रोकने में सहायता मिलती है।
असम के हूलोंगापार वन्यजीव अभयारण्य में गिबन के संरक्षण के लिए रेलवे ट्रैक के ऊपर विशेष कैनोपी ब्रिज बनाए गए हैं। इन ब्रिज के जरिए गिबन सुरक्षित रूप से एक तरफ से दूसरी तरफ जा सकते हैं और उन्हें रेल लाइन पार करने के लिए जमीन पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती। एनएफआर के मुताबिक, वर्तमान में करीब 73 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली लगभग 20 बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। चालू वित्त वर्ष में रेलवे को 11,488 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पूर्वोत्तर में कई परियोजनाओं को 2007 से 2010 के बीच मंजूरी मिली थी, लेकिन पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी रफ्तार धीमी रही।
वर्ष 2015-16 के बाद इन पुरानी स्वीकृत परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर बजट मिलने लगा, जिसके बाद इनके निर्माण कार्य में तेजी आई। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए अलुआबाड़ी से न्यू जलपाईगुड़ी तक तीसरी और चौथी रेल लाइन तथा दोहरीकरण से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के बालुरघाट-हिली रेल प्रोजेक्ट पर भी काम जारी है। पूर्वोत्तर में रेल विस्तार का असर केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रहने वाला है। पड़ोसी देशों के साथ रेल संपर्क बढ़ने से माल ढुलाई, व्यापार और पर्यटन को नए रास्ते मिल सकते हैं।
इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। रेलवे की मौजूदा परियोजनाओं और 2029 तक निर्धारित लक्ष्यों को देखते हुए आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर के रेल नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। एक ओर जहां क्षेत्र की राजधानियां मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ेंगी, वहीं दूसरी ओर भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ बढ़ता रेल संपर्क पूर्वोत्तर को भारत की अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी के एक महत्वपूर्ण गलियारे में बदल सकता है।
--आईएएनएस
विकेटी/पीएम
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