पिता के देहांत के बाद उठाई फैमिली की जिम्मेदारी, 11 की उम्र में शुरू की एक्टिंग, मनोज कुमार संग दी आखिरी हिट
राजेश खन्ना,शशि कपूर समेत कई बड़े कलाकारों संग काम करने वाली इस टॉप एक्ट्रेस ने 11 की उम्र में इंडस्ट्री में कदम रख लिया था. जब एक्ट्रेस 7 साल की थी तब उनके पिता का निधन हो गया था. पिता के देहांत के बाद एक्ट्रेस पर फैमिली की जिम्मेदारी आ गई थी. भारत की आजादी के एक साल बाद यानी 1948 में एक्ट्रेस फिल्म मंदिर से डेब्यू किया.
JNU में मोदी-शाह के खिलाफ नारा, FIR दर्ज:JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा छात्रों की पहचान की, कहा- 30 से 35 स्टूडेंट मौजूद थे
दिल्ली पुलिस ने बुधवार रात दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में साबरमती हॉस्टल के बाहर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगे विवादित नारे के मामले में एफआईआर दर्ज की। शिकायत JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (CSO) ने दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौके पर 30-35 छात्र मौजूद थे। शुरुआत में कार्यक्रम शांतिपूर्ण था, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिलने पर भड़काऊ नारे लगाए गए। दो 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी हैं। CSO ने कुछ छात्रों की पहचान भी की है। दरअसल, 6 जनवरी को 35 सेकेंड का वीडियो वायरल हुआ। दावा किया गया कि JNU के छात्रों ने 5 जनवरी की रात 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' के नारे लगाए थे। JNU प्रबंधन ने भी मामले में FIR की मांग की थी। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया था कि JNU में यह प्रदर्शन उमर खालिद-शरजील के समर्थन में हुआ। यह विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्रविरोधी विचारधारा का प्रसार है। वहीं कांग्रेस ने इसे गुस्सा जाहिर करने का तरीका बताया था। दिल्ली दंगे मामला: सुप्रीम कोर्ट से जमानत के बाद चार आरोपी जेल से रिहा 2020 दिल्ली दंगों साजिश मामले में 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद चार आरोपी गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान बुधवार रात दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा हुए। वहीं, मोहम्मद सलीम खान मंडोली जेल से रिहा हुआ। पांचवे आरोपी शादाब अहमद को भी सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मिली है, लेकिन उसका जमानती बॉन्ड दाखिल करने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ। वहीं, कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत से इनकार किया था। एक और आरोपी सलीम मलिक उर्फ मुन्ना ने समान आरोपों का हवाला देते हुए नई जमानत याचिका दायर की है। मोहम्मद सलीम खान के समान आधार पर राहत मांगी है। JNU प्रबंधन ने कहा- यूनिवर्सिटी को नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे मामले पर JNU प्रबंधन ने कहा है कि हम इस मामले पर सख्त कार्रवाई करेंगे। यूनिवर्सिटी को नफरत फैलाने वाली प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे। यूनिवर्सिटी ने कहा कि मामले में पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है। हिंसा, गैर-कानूनी आचरण या राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपी छात्र सस्पेंड होंगे। JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा है कि हर साल छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं। विरोध प्रदर्शन में लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे और किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं करते थे। वे किसी के लिए निर्देशित नहीं थे। JNU प्रशासन बोला- यह कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन ऐसे नारे लोकतांत्रिक विरोध के खिलाफ है, JNU के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करते हैं। इससे सार्वजनिक व्यवस्था, कैंपस की शांति व सुरक्षा माहौल को नुकसान पहुंच सकता है। नारे स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे, जानबूझकर लगाए गए और बार-बार दोहराए गए, जिससे यह साफ होता है कि यह सोच-समझकर किया गया गलत काम था। यह अनुशासन, नियमों और यूनिवर्सिटी कैंपस के शांतिपूर्ण माहौल की जानबूझकर की गई अवहेलना है। कांग्रेस बोली- ये गुस्सा जाहिर करने का तरीका, BJP ने कहा- सपोले बिलबिला रहे 5 जनवरी 2020 को क्या हुआ था... JNU कैंपस में 5 जनवरी 2020 को हिंसा भड़क गई थी। कुछ नकाबपोश लोगों ने कैंपस में घुसकर तीन हॉस्टलों में छात्रों को निशाना बनाया। उन पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से हमला किया। निवासियों को मारा और खिड़कियां, फर्नीचर और निजी सामान तोड़ दिए। लगभग दो घंटे तक कैंपस में अराजकता फैली रही, जिसमें JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष आइशी घोष सहित कम से कम 28 लोग घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस पर भी कैंपस में हिंसा करने वालों पर कार्रवाई न करने और FIR में घोष सहित छात्र संघ नेताओं का नाम होने पर पक्षपात का आरोप लगा था। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर-शरजील को जमानत नहीं दी दरअसल, 2020 में हुए दिल्ली दंगों के केस में शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से और उमर 13 सितंबर 2020 से हिरासत में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2025 को उमर और शरजील की जमानत याचिका खारिज कर दी। एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं। इन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था। उमर जमानत के लिए निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक 6 बार याचिका लगा चुका है। दिल्ली में फरवरी, 2020 में हिंसा भड़की थी। इसमें 53 लोगों की मौत हुई थी। 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 750 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं। पढ़ें पूरी खबर…
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