Climate Change Threat To Himalayas: जलवायु परिवर्तन से तेजी से पिघल रहे हिमालयी ग्लेशियर; भारत की 20% जीडीपी पर मंडराया संकट
जलवायु परिवर्तन का सबसे खतरनाक असर 'दुनिया के तीसरे ध्रुव' कहे जाने वाले हिमालयी क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है। पर्यावरणविदों और आर्थिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, हिमालय के ग्लेशियरों के तेजी से घटने से भारत को भारी आर्थिक और पारिस्थितिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
अनुमान के मुताबिक, इस संकट के कारण देश की कुल जीडीपी का लगभग 20 फीसदी हिस्सा सीधे तौर पर जोखिम में आ गया है, जिससे भारत के आर्थिक विकास की गति को गंभीर झटका लग सकता है।
कृषि और खाद्य सुरक्षा पर सीधा प्रहार
हिमालयी ग्लेशियरों से निकलने वाली प्रमुख नदियां- गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र- उत्तर भारत के विशाल मैदानी इलाकों में पानी का मुख्य स्रोत हैं। इन नदियों के बेसिन में देश की कृषि और खाद्य उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा निर्भर करता है।
ग्लेशियरों के खत्म होने से नदियों का प्रवाह अनिश्चित हो जाएगा। शुरुआती दौर में भीषण बाढ़ और बाद में लंबे समय तक सूखा पड़ने से देश का कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।
जलविद्युत, उद्योग और बुनियादी ढांचे को नुकसान
ग्लेशियर पिघलने के कारण ग्लेशियल लेक बर्स्ट फ्लड, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे पहाड़ी और मैदानी इलाकों में स्थित जलविद्युत परियोजनाएं, सड़कें, पुल और औद्योगिक इकाइयां नष्ट हो रही हैं।
बिजली उत्पादन ठप होने और बुनियादी ढांचे के विनाश से औद्योगिक क्षेत्र को अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो सीधे जीडीपी में गिरावट का कारण बन रहा है।
करोड़ों लोगों का विस्थापन और आजीविका का संकट
हिमालयी नदी तंत्र पर भारत की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपनी पीने के पानी, सिंचाई और दैनिक आजीविका के लिए निर्भर है। जल संकट और प्राकृतिक आपदाओं के कारण तटीय और मैदानी इलाकों में बड़े पैमाने पर मानवीय विस्थापन का खतरा पैदा हो रहा है।
इसके पुनर्वास, स्वास्थ्य और राहत कार्यों पर केंद्र व राज्य सरकारों को भारी बजट खर्च करना पड़ेगा, जिससे विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राजस्व में भारी कमी आएगी।
वैज्ञानिकों और वैश्विक रिपोर्टों की चेतावनी
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित नहीं किया गया, तो इस सदी के अंत तक हिमालय के दो-तिहाई ग्लेशियर समाप्त हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस संभावित आर्थिक आपदा से बचने के लिए तुरंत हरित ऊर्जा, आपदा प्रबंधन के आधुनिक बुनियादी ढांचे और कड़े पर्यावरण संरक्षण कानूनों को प्राथमिकता देनी होगी।
Mangal Gochar 2026 18 September 2026: तीन दिन बाद मंगल बदलेंगे अपनी चाल, इन लोगों की बढ़ सकती है परेशानियां, रहना होगा बेहद सावधान
Mangal Gochar 2026 18 September 2026: तीन दिन बाद मंगल बदलेंगे अपनी चाल, इन लोगों की बढ़ सकती है परेशानियां, रहना होगा बेहद सावधान
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi
IBC24








