BRICS में मेहमानों को गिफ्ट में गुडी बैग दिया:इसमें बिहार का सत्तू, ओडिशा की कॉफी और गुजराती दुपट्टा; मकसद भारतीय संस्कृति से परिचय कराना
BRICS समिट में आए प्रतिनिधियों और मेहमानों को खास गुडी बैग गिफ्ट किया जा रहा है। इसमें बिहार का सत्तू और मखाना, केले के चिप्स, ओडिशा की कॉफी और गुजराती दुपट्टा है। इसका मकसद मेहमानों को भारतीय संस्कृति से परिचय कराना है। दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स समिट 12 और 13 सितंबर को होगी। इससे पहले शुक्रवार को पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने बिजनेस फोरम में स्पीच भी दी। देखिए गिफ्ट में दिए गए भारतीय प्रोडक्ट्स भारत मंडपम में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के स्टॉल ब्रिक्स सम्मेलन में 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें देश भर के 70 अनोखे कला और हथकरघा उत्पाद दिखाए गए हैं। यह प्रदर्शनी 770 जिलों के 1,200 से अधिक अनोखे उत्पादों को दुनिया के सामने लाने की मुहिम का हिस्सा है। पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल किताब गिफ्ट की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल के प्रसिद्ध ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी भाषा में अनुवाद भेंट किया। तिरुक्कुरल तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की रचना है। इसमें कुल 1,330 दोहे हैं, जिनमें नैतिक जीवन, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जुड़े विचार दिए गए हैं। तिरुक्कुरल को तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में माना जाता है। इसका कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। 2026 में इसका रूसी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ है। पुरी में रेत से बनाई ब्रिक्स नेताओं की तस्वीर ओडिशा के पुरी में सैंड आर्टिस्ट मानस कुमार साहू ने शुक्रवार को रेत से एक खास कला बनाई। यह भारत आ रहे BRICS नेताओं के स्वागत के लिए तैयार की गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के चित्र हैं। समिट पर मिसाइलों-फाइटर जेट से पहरा ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी पुतिन से गले मिले, भारत-मंडपम में मीटिंग जारी:भारत खरीद सकता है रडार की पकड़ में न आने वाला विमान, एयरस्ट्राइक में गेमचेंजिंग होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत मंडपम पहुंच चुके हैं। दोनों की मीटिंग शुरू हो गई है। बैठक में रक्षा सहयोग पर चर्चा अहम रहने की उम्मीद है। पूरी खबर पढ़ें…
आज का एक्सप्लेनर:क्या ट्रम्प को नाराज करके रूसी सुखोई-57 जेट खरीदेगा भारत; पुतिन इतना जोर क्यों लगा रहे, भारत ने पहले मना क्यों किया
जुलाई 2026, भारत के रक्षा सचिव ने साफ कहा था कि सुखोई-57 खरीदने की कोई योजना नहीं है। बमुश्किल दो महीने बाद, रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे पर सुखोई-57 पर डील की चर्चा जोरों पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को दिसंबर 2026 तक पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट मिल सकता है। भारत के पास फिलहाल सबसे एडवांस जेट 4.5 पीढ़ी का राफेल है। भारत घूम-फिरकर पांचवीं पीढ़ी के इसी Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने पर वापस क्यों आ गया, पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कभी हां-कभी न… सुखोई-57 को लेकर भारत का रुख कैसे बदलता रहा है? जवाबः भारत ने 1990 के दशक से रूस के करीब 400 सुखोई-30 और सुखोई-30MKI विमान खरीदे हैं। इनमें से करीब आधे विमान रूस के साथ मिलकर भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, HAL के प्लांट में बने हैं… अब दोबारा पुतिन की यात्रा के दौरान चर्चा है कि भारत 75 सुखोई-57E जेट्स खरीद सकता है। सवाल-2: भारत की तलाश वापस सुखोई-57 पर क्यों टिक गई है? जवाबः 4 वजहों से भारत को सुखोई-57E जैसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है… 1. फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत के मुकाबले आधे रह गए 2. पाकिस्तान-चीन के पास 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट 3. भारत का स्वदेशी 5th जनरेशन प्रोग्राम AMCA लेट-लतीफ 4. भारत के पास दूसरा बेहतर ऑप्शन नहीं सवाल-3: इस डील से रूस को क्या फायदा होगा? जवाबः अगर भारत रूस से सुखोई-57 खरीदता है, तो रूस को कई फायदे हैं... सवाल-4: क्या इस डील से ट्रम्प नाराज हो सकते हैं, कैसे निपटेगा भारत? जवाबः अगस्त 2025 में ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया था। इसमें 25% टैरिफ के पीछे वजह थी- भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद। अमेरिका ये भी चाहता है कि भारत रूस के बजाय उससे तेल और हथियार खरीदे। फरवरी 2025 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रम्प ने भारत को ‘F-35 लाइटनिंग-II’ फाइटर जेट बेचने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि भारत ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। अमेरिका अपने CAATSA नाम के कानून के तहत रूस से हथियार खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाता है। अब अगर रूस से सुखोई-57 की डील हुई, तो अमेरिका बैन लगाने की धमकी दे सकता है। भारत और अमेरिका के बीच MQ-9B ड्रोन और अपाचे हेलिकॉप्टर की डील और भारत के तेजस फाइटर जेट के लिए जनरल मोटर्स के इंजन की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। अमेरिकी संसद में रूस से हथियार लेने वाले देशों पर टैरिफ लगाने का कानून भी पारित हुआ है। भारत पर फिलहाल 18% टैरिफ लागू है और दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी है। इस पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि जब भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा, तो अमेरिका ने भारत पर सख्त बैन लगाने की धमकी दी थी, भारत ने इसके बावजूद ये सिस्टम खरीदा। 1990 के दशक में न्यूक्लियर टेस्ट के बाद भी अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया। तब भी भारत ने रूस से हथियारों की खरीद जारी रखी थी। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में ट्रेड रिलेशंस के एक्सपर्ट कैसर शमीम कहते हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के मामले में किसी दूसरे देश पर निर्भर होकर फैसले नहीं लेता। भारत हमेशा से अपनी 'सामरिक स्वायत्तता', यानी स्ट्रैटेजिक ऑटोनोमी को अपनी विदेश नीति की सेंट्रल पॉलिसी मानता है। सवाल-5: जंग में घिरा रूस क्या समय पर सुखोई-57 की डिलीवरी कर पाएगा? जवाबः सुखोई-57 डिफेंस सिक्योरिटी एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, रूस भारत को 36 से 60 पूरी तरह तैयार सुखोई-57 जेट की तत्काल डिलीवरी करने को तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत भी शुरुआत में कुछ ‘रेडी-टू-फ्लाई’ विमान लेना चाहता है। हालांकि रूस ये कर पाएगा, ये कहना थोड़ा मुश्किल है… ------------------ ये खबर भी पढ़िए… CIA डायरेक्टर से लेकर ट्रम्प के दामाद तक, मॉस्को क्यों जा रहे; क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है 25 अगस्त को अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुखिया जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को की सीक्रेट विजिट की। 10 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत- जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी मॉस्को पहुंचे और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले। पूरी खबर पढ़िए…
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