आज भारत में पहली बार CMF Buds Neo ट्रू वायरलेस स्टीरियो ईयरबड्स सेल के लिए उपलब्ध हो चुके हैं। दरअसल, इन ईयरबड्स को 20 अगस्त को भारत में पेश किया गया था, जो कि एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन (ANC), स्पेशियल साउंड और कई स्मार्ट फीचर्स ऑफर करते हैं। इनको आप ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart और ब्रांड के दूसरे रिटेल स्टोर्स के खरीद सकते हैं। असल में ये ईयरबड्स अकेले 11 घंटे तक औऱ केस के साथ कुल 52 घंटे तक प्लेबैक टाइम देगा ।
CMF Buds Neo: भारत में कीमत और सेल ऑफर्स
भारत में इस ईयरबड्स की कीमत ₹1,999 है। आज से आप CMF Buds Neo को ऑनलाइन Flipkart पर और ऑफलाइन रिटेल आउटलेट्स जैसे Croma, Reliance Digital और Vijay Sales पर बिकने के लिए तैयार है। बता दें कि, ये ईयरबड्स तीन कलर के साथ आता है, आपको Dark Blue, Black और White फिनिश में मिले जाएंगे।
CMF Buds Neo के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स
CMF Buds Neo TWS ईयरबड्स में एक सर्कुलर डायल और इन-बिल्ट लैनयार्ड होल के साथ स्क्वायर-शेप्ड चार्जिंग केस मिलता है। यह डस्ट और वाटर रेजिस्टेंस के लिए ईयरबड्स को IP54 रेटिंगी दी गई है, बल्कि केस सिर्फ पानी से बचान के लिए IPX2- रेटेड है। इतना ही नहीं, इस ईयरबड्स में टच कंट्रोल्स मिलते हैं, जिन्हें Nothing X एप के जरिए कस्टमाइज भी किया जा सकता है। साउंड क्वालिटी के लिए इसमें टाइटेनियम-कोटेड PET डोम और PEEK+PU साउंज वाले 12.4mm डायनेमिक ड्राइवर्स दिए गए हैं, वहीं एकजस्टेबल ANC सिस्टम के लिए कुल 4 माइक्रोफोन्स का यूज किया गया है।
बैटरी बैकअप की बात करें ,तो ANC बंद रहने पर यह कुल 52 घंटे तक प्लेबैक टाइम देता है, जबकि ANC होने पर ये 30 घंटे तक चलता है।
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डिजिटल इंडिया के दौर में ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ई-चालान व्यवस्था काफी प्रभावी साबित हुई है। लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आजकल हजारों वाहन चालकों के मोबाइल पर फर्जी ई-चालान के संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें जुर्माना भरने का दबाव बनाकर लोगों को नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है। ऐसे में बिना जांच-पड़ताल किए किसी भी लिंक पर क्लिक करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
कैसे काम करता है यह नया साइबर फ्रॉड?
साइबर ठग सबसे पहले वाहन मालिकों को ट्रैफिक चालान का एसएमएस भेजते हैं। संदेश में लिखा होता है कि आपके वाहन पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का जुर्माना लगाया गया है और निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी। मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही व्यक्ति एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जो देखने में सरकारी पोर्टल जैसी लगती है।
इसके बाद वहां बैंक अकाउंट, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, यूपीआई और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जाती है। कई मामलों में लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में हानिकारक सॉफ्टवेयर डाउनलोड हो जाता है, जिससे साइबर अपराधियों को फोन और बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच मिल सकती है।
असली और नकली ई-चालान मैसेज की पहचान कैसे करें?
फर्जी संदेशों से बचने का सबसे आसान तरीका वेबसाइट के लिंक की जांच करना है। सरकारी ई-चालान से जुड़े सभी आधिकारिक लिंक .gov.in डोमेन पर होते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि लिंक echallan.parivahan.gov.in जैसे सरकारी डोमेन का है, तो उसकी विश्वसनीयता अधिक होती है।
वहीं यदि एसएमएस में .com, .net, .xyz, .apk, bit.ly या किसी अन्य शॉर्ट लिंक का उपयोग किया गया है, तो सतर्क हो जाएं। ऐसे लिंक साइबर ठगी का हिस्सा हो सकते हैं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच अवश्य करें।
गलती से लिंक खुल जाए तो तुरंत उठाएं ये कदम
यदि आपने अनजाने में फर्जी लिंक खोल दिया है या बैंकिंग से जुड़ी कोई जानकारी साझा कर दी है, तो समय गंवाए बिना अपने बैंक की हेल्पलाइन पर संपर्क कर कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराएं। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें और ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर भी पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, धन वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
ई-चालान चेक करने का सही तरीका
यदि आपको अपने वाहन के चालान की जानकारी चाहिए, तो हमेशा केवल आधिकारिक परिवहन विभाग के ई-चालान पोर्टल पर जाकर ही स्टेटस जांचें। किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सऐप मैसेज या अनजान एसएमएस में दिए गए लिंक के जरिए भुगतान करने से बचें। सरकारी पोर्टल पर वाहन नंबर या चालान नंबर डालकर पूरी जानकारी सुरक्षित तरीके से प्राप्त की जा सकती है।
इन आसान सावधानियों से रहें सुरक्षित
साइबर अपराधियों से बचाव के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बेहद कारगर साबित होती हैं। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अपने मोबाइल में नियमित रूप से सिक्योरिटी अपडेट और एंटीवायरस सक्रिय रखें। यदि कोई संदिग्ध संदेश मिले, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करें। जागरूकता ही साइबर ठगी से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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