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Rajasthan Municipal Election Result: 4179 वार्ड जीतकर BJP आगे, 4 नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत

राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कांग्रेस पर बढ़त बनाते हुए 4,179 वार्ड में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते। भाजपा ने राज्य के 10 नगर निगमों में से चार में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

कांग्रेस ने बीकानेर नगर निगम में बहुमत हासिल किया और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ नगर परिषद में भी उसने उल्लेखनीय जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए राज्य में 2,273 वार्ड जीते। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में निर्दलीयों ने 65 में से 36 वार्ड जीतकर चुनाव परिणाम में बड़ी भूमिका निभाई।

भाजपा 20 और कांग्रेस सात वार्ड पर विजयी रहे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने एक-एक वार्ड में जीत दर्ज की। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मतगणना वाले 10,244 वार्ड में से रात साढ़े आठ बजे तक 10,235 के परिणाम घोषित किए जा चुके थे।

भाजपा के 4,179 और कांग्रेस के 3,613 वार्ड के अलावा आरएलपी ने 63, आम आदमी पार्टी (आप) ने 42, माकपा ने 38, बसपा ने 19 और भारत आदिवासी पार्टी ने आठ वार्ड जीते। भाजपा ने जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा नगर निगमों में बहुमत का आंकड़ा पार किया, जबकि कांग्रेस ने बीकानेर में बहुमत हासिल किया। जयपुर नगर निगम के 150 वार्ड में भाजपा ने 78, कांग्रेस ने 53 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते।

चार वार्ड के परिणाम अभी घोषित नहीं हुए थे। उदयपुर के 80 वार्ड में भाजपा ने 53 और कांग्रेस ने 23 वार्ड जीते। तीन वार्ड निर्दलीयों और एक वार्ड माकपा के खाते में गया।

भीलवाड़ा के 70 वार्ड में भाजपा ने 45, कांग्रेस ने 10 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते। कोटा नगर निगम के 100 वार्ड में भाजपा ने 55 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया। बीकानेर के 80 वार्ड में कांग्रेस ने 42, भाजपा ने 27 और निर्दलीयों ने 10 वार्ड जीते, जबकि एक वार्ड आरएलपी के खाते में गया।

जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा। 100 सदस्यीय नगर निगम में दोनों दलों ने 44-44 वार्ड जीते। निर्दलीयों ने 10 और आरएलपी ने एक वार्ड जीता, जबकि एक वार्ड का परिणाम बाकी था।

अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। भाजपा ने 32 और निर्दलीयों ने 11 वार्ड जीते। यहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह शहर पाली के 65 वार्ड में कांग्रेस ने 29, भाजपा ने 21 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते। अलवर में भाजपा 28 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी रही। कांग्रेस ने 23, निर्दलीयों ने 13 और बसपा ने एक वार्ड जीता।

झालावाड़ नगर परिषद के 45 वार्ड में कांग्रेस ने 29, भाजपा ने 13, निर्दलीयों ने दो और आम आदमी पार्टी ने एक वार्ड जीता। हालांकि, झालरापाटन नगरपालिका में भाजपा का दबदबा बरकरार रहा। भाजपा ने 35 में से 22 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस ने आठ और आम आदमी पार्टी ने पांच वार्ड जीते।

वसुंधरा राजे झालरापाटन से भाजपा विधायक हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भाजपा के प्रदर्शन को ‘‘ऐतिहासिक जीत’’ बताते हुए कहा कि यह जनता के पार्टी और उसके विकास मॉडल में विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर भरोसा जताया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए परिणामों को पार्टी की ऐतिहासिक जीत बताया। वहीं, राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि चुनाव परिणामों ने भाजपा सरकार के ‘‘खराब प्रदर्शन’’ को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की कांग्रेस पर मत प्रतिशत की बढ़त एक प्रतिशत से भी कम है।

डोटासरा ने आरोप लगाया कि वार्ड के परिसीमन में अनियमितताओं से भाजपा को लाभ मिला और चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशियों के आगे होने के बावजूद परिणाम घोषित करने में जानबूझकर देरी की गई। उन्होंने बीकानेर, अजमेर और पाली में कांग्रेस के प्रदर्शन के साथ ही भरतपुर तथा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से जुड़े क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति का उल्लेख किया।

राज्य में 309 शहरी निकायों - 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाओं के लिए चुनाव हुए। नौ और 11 सितंबर को दो चरणों में हुए मतदान में 1.44 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान के पात्र थे। इससे पहले 2019-21 के निकाय चुनावों में राज्य में 196 शहरी निकाय और 7,500 वार्ड थे।

महापौर और सभापति के चुनाव के बाद कांग्रेस ने 123 निकायों, भाजपा ने 64 और निर्दलीय एवं अन्य दलों ने नौ निकायों पर नियंत्रण हासिल किया था। नवनिर्वाचित नगर निकायों के महापौर और सभापति का चुनाव 21 सितंबर को होगा, जबकि उप महापौर, उप सभापति और नगरपालिका उपाध्यक्षों का चुनाव 22 सितंबर को होगा।

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घर का दही बाजार जैसा गाढ़ा क्यों नहीं जमता? जानिए असली वजह

खाने के साथ अगर दही मिल जाए तो शरीर को अंदर से ठंडक का अहसास होता है। अमूमन यह देखने में आता है कि लोग बाजार से दही लाकर खाते हैं, क्योंकि घर का दही उतना गाढ़ा नहीं जमता। ऐसे में उसे खाने का मन ही नहीं करता। वहीं, बाजार की दही एकदम गाढ़ी और चिकनी होती है। ऐसे में अक्सर मन में यह सवाल आता है कि घर में दही इस तरह से क्यों नहीं जमती। 

असल में गाढ़ा दही जमने का राज सिर्फ जामन डालने में नहीं है। दूध का प्रकार, उसे कितना गर्म किया गया, जामन कब डाला गया, तापमान कैसा रहा और दही को जमने के दौरान छेड़ा गया या नहीं, इन छोटी-छोटी बातों का असर उसकी बनावट पर पड़ता है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में-  

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दूध को बस उबालकर तुरंत जामन डाल देना

बहुत से घरों में दूध उबला, थोड़ा ठंडा हुआ और सीधे जामन डाल दिया गया। जबकि यह गलती ना करें। कोशिश करें कि दूध को अच्छी तरह गर्म करने के बाद कुछ देर धीमी आंच पर पकने दें। इससे दूध के प्रोटीन में ऐसे बदलाव होते हैं जो बाद में दही को गाढ़ी बनाने में मदद करते हैं।  

गलत समय पर जामन डालना 

आप दूध में जामन कब डालती हैं, यह बहुत ही अहम् है। अगर दूध बहुत गर्म है तो जामन में मौजूद उपयोगी जीवाणु प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर दूध बहुत ठंडा हो गया तो दही जमने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। दूध को जामन मिलाने से पहले लगभग 44-46 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है। अगर थर्मामीटर नहीं है, तो दूध इतना गर्म होना चाहिए कि उंगली डालने पर गर्माहट महसूस हो लेकिन जलन न हो।

जामन भी तो अच्छा होना चाहिए

कई बार हम दूध और तापमान पर पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन जामन पर नहीं। अगर इस्तेमाल किया गया जामन बहुत पुराना है, बहुत ज्यादा खट्टा है या उसमें सक्रिय जीवाणु पर्याप्त नहीं हैं, तो दही ठीक से जमने में परेशानी हो सकती है। इसलिए, हमेशा पिछली बार के ताजे व सामान्य स्वाद वाले दही को जामन के रूप में इस्तेमाल करें।     

दूध पाउडर का करें इस्तेमाल

अगर आपको खासतौर पर बहुत गाढ़ा दही पसंद है, तो दूध में थोड़ी मात्रा में बिना मीठा किया हुआ सूखा दूध पाउडर मिलाना एक विकल्प हो सकता है। इससे दूध में ठोस पदार्थ बढ़ते हैं और दही की बनावट ज्यादा मजबूत हो सकती है। लेकिन अगर आपका दही सामान्य रूप से ठीक जम रहा है, तो इसकी जरूरत नहीं है।

- मिताली जैन

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