हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। प्रदोष व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ इस व्रत को रखता है, उसे सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। आइए आपको बताते हैं सितंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत कब है।
प्रदोष व्रत कब है 2026 ?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, द्वादशी तिथि का आरंभ 8 तारीख को दोपहर में 2 बजकर में 44 मिनट से होगा और 9 तारीख को 12 बजकर 31 मिनट तक द्वादशी तिथि रहेगी। जिसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। वहीं, प्रदोष काल से पहले ही त्रयोदशी तिथि समाप्त हो जाएगी। 8 तारीख को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
वैसे इस दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग भी है। इसलिए इस बार 8 सितंबर मंगलवार के दिन ही रखा जाएगा। इसको भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
वहीं, भौम प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त 8 सितंबर को शुभ चौघडिया दोपहर में 3 बजकर 27 मिनट से 5 बजकर 1 मिनट पर। फिर रात में लाभ चौघडिया रात में 8 बजकर 1 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट पर है।
जाने प्रदोष व्रत का महत्व
माना जाता है कि भौम प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही जमीन से जुड़े विवाद भी दूर होते हैं। यदि किसी व्यक्ति पर काफी ज्यादा कर्ज है, तो उन्हें यह व्रत जरुर रखना चाहिए।
वहीं, जमीन जायदाद से संबंधित मामलों को सुलझाने के लिए यह व्रत उत्तम माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव की कृपा के साथ-साथ व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति को मजबूत करता है।
भौम प्रदोष वाले दिन भगवान शिव की पूजा के साथ ही हनुमान जी की पूजा करें। ऐसा करने से साधक के जीवन में सफलता के योग बनते हैं। इस दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी चोला चढ़ाने से चोला चढ़ाने से नकारात्मकता दूर होती है। इसके साथ ही, शनि की दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या दूर होती है।
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आज यानी 7 सितंबर 2026, सोमवार को अजा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से श्रीहरि का ध्यान करने से इंसान के सारे पाप कट जाते हैं और घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम 7.29 बजे से शुरु होकर 7 सितंबर की शाम 5.03 बजे तक रहेगी। व्रत खोलने (पारण) का सही समय 8 सितंबर की सुबह 6.02 बजे से 8.33 बजे के बीच होगा।
ऐसे में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आप तुलसी से जुड़े इन नियमों का पालन जरुर करें।
गंगा जल अर्पित करना
एकादशी के दिन स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें और तुलसी के पौधे में थोड़ा-सा गंगाजल अर्पित करें। इससे परिवार में हमेशा सद्भाव और सुख-शांति बनी रहती है।
भोग में डालें तुलसी
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी माना जाती है। इसलिए श्रीहरि को जो भी भोग अर्पित करें, उसमें तुलसी का पत्ता जरुर शामिल करनें। इससे वे अति प्रसन्न होंगे।
पवित्र मंत्रों का जप
पूजा के समय तुलसी के पास बैठकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का जप करना अति फलदायक होता है। इन मंत्रों के जप से घर में बरकत और पॉजिटिव एनर्जी आती है।
तुलसी की माला धारण करें
यदि संभव हो तो पूजा करके समय गले में तुलसी की माला जरुर पहनें। माना जाता है कि तुलसी की माला पहनकर विष्णु जी की आराधना करने से कई गुना अधिक पुण्य मिलेगा।
शाम को घी का दीपक जलाएं
जब शाम हो जाए तो तुलसी के पौधे के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में भी शुभता बनीं रहती है।
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