Ayodhya में Nripendra Mishra ने Ram Mandir निर्माण कार्यों का लिया जायजा
श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोमवार को अपने तीन दिवसीय अयोध्या दौरे के दूसरे दिन राम मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया। सर्किट हाउस में ठहरे मिश्र आज सुबह मंदिर परिसर के लिए रवाना हुए। उन्होंने मीडिया से बात करने से परहेज किया और केवल इतना बताया कि उनकी पीठ में दर्द है और वह थोड़ा अस्वस्थ हैं।
उन्होंने कहा कि वह मंगलवार को मीडिया से बातचीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, मिश्र ने मंदिर परिसर के अंदर निर्धारित निर्माण कार्यों पर समीक्षा बैठकें कीं और शेष कार्यों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए अधिकारियों, निर्माण ठेकेदारों और मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। दौरे के पहले दिन रविवार को मिश्र ने निर्माणाधीन स्मृति स्तंभ का निरीक्षण किया था, जो लगभग पूरा होने वाला है और पुराने अस्थायी मंदिर में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य की समीक्षा की।
बाद में उन्होंने श्रद्धालु सुविधा केंद्र (पीएफसी) के सभागार में निर्माण और संबंधित परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों व प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। सूत्रों ने बताया कि मंदिर परिसर के चारों ओर करीब चार किलोमीटर लंबी बाहरी सुरक्षा दीवार के निर्माण पर भी समिति की बैठक में चर्चा होने की उम्मीद है। मंगलवार को दौरे के अंतिम दिन समिति की बैठक राम कथा संग्रहालय में होनी है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के भी मंगलवार को मिश्र से मिलने की संभावना है। यह अयोध्या में उनकी पहली औपचारिक बैठक होगी। जितेंद्र मिश्रा (62) को ट्रस्ट के कामकाज को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है।
वह मंगलवार को नयी दिल्ली से अयोध्या लौटेंगे और उन्हें मंदिर प्रशासन, निर्माण, संबंधित परियोजनाओं और आगामी कार्यों के बारे में जानकारी दिए जाने की उम्मीद है। सीईओ के आवास की व्यवस्था भी लगभग पूरी हो गई है। जगद्गुरु शंकराचार्य द्वार के दक्षिण में रामपथ के पास स्थित ओम भवन को उनके आवास के रूप में तैयार किया जा रहा है।
इस बीच, अयोध्या के वार्षिक दीपोत्सव से पहले ‘दशरथ पथ’ पर भी काम चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि 15 किलोमीटर से अधिक लंबी चार लेन वाली यह सड़क करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है और इसमें आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, चौड़े फुटपाथ और ‘डिवाइडर’ होंगे। अयोध्या के महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने बताया कि यह सड़क दशरथ समाधि स्थल, जहां परंपरागत रूप से राजा दशरथ का अंतिम संस्कार माना जाता है, को सीधे अयोध्या शहर से जोड़ेगी और इसे सरयू के किनारे विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आगंतुकों के लिए धार्मिक वातावरण बनाने के लिए सड़क के डिजाइन में धार्मिक रूपांकनों और प्रतिकृतियों को शामिल किया जा रहा है। अयोध्या में दीपोत्सव का 10वां संस्करण छह से आठ नवंबर तक आयोजित होना है, जिसमें मुख्य दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम सात नवंबर को प्रस्तावित है। वहीं, पूजा और मंदिर से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी कुछ बदलाव किए गए हैं।
जन्माष्टमी से आरती की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है, जबकि धार्मिक समिति ने पुजारियों के लिए वेशभूषा निर्धारित की है। मंदिर ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, गर्भगृह में मोबाइल फोन और बाहर से कोई सामग्री ले जाने पर भी रोक लगा दी गई है।
Ganesh Chaturthi: दक्षिण भारत में 69 फुट तक की मूर्तियों संग उत्सव, मंदिरों में विशेष पूजा
दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों में सोमवार को गणेश चतुर्थी का पर्व धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। ‘‘विघ्नहर्ता’’ भगवान गणेश की विभिन्न आकार और रंगों की प्रतिमाओं की पूजा की गई। घरों में पूजा के लिए रखी गई साधारण मिट्टी की प्रतिमाओं से लेकर सार्वजनिक पंडालों में 60 से 70 फुट ऊंची विशाल प्रतिमाओं तक, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने पूरे उत्साह के साथ गणेश चतुर्थी मनाई।
दक्षिणी राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और प्रमुख राजनीतिक नेताओं ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और सभी के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। तमिलनाडु में घरों में होने वाली पूजा से लेकर भव्य मंदिर अनुष्ठानों और विशाल सार्वजनिक पंडालों तक, राज्य में ‘‘पिल्लैयार’’ के जयकारे और भक्ति संगीत गूंजते रहे। तमिलनाडु में भगवान गणेश के लिए ‘‘पिल्लैयार’’ नाम का आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
श्रद्धालु विशेष महा अभिषेकम और फूलों से सजावट (अलंकारम) देखने के लिए सुबह से ही राज्य के प्रमुख मंदिरों के बाहर कतारों में खड़े रहे। मदुरै में प्रसिद्ध श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर के अंदर सात फुट ऊंची विशाल एकाश्म मुक्कुरुणि विनायकर प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रही। सदियों पुरानी परंपरा के तहत मंदिर के पुजारियों ने इस अवसर पर भगवान को एक विशाल ‘मुक्कुरुणि कोझुकट्टई’ यानी चावल के आटे से बने पुआ का भोग लगाया।
तिरुचिरापल्ली में 273 फुट ऊंची रॉकफोर्ट पहाड़ी पर स्थित सातवीं शताब्दी के उची पिल्लैयार मंदिर में दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु 417 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचे। मंदिर में 14 दिवसीय पेरुविझा उत्सव की शुरुआत हुई और भगवान को 25 किलोग्राम की विशाल कोझुकट्टई का भोग लगाया गया। कोयंबटूर के पुलियाकुलम स्थित श्री अरुलमिगु मुंधी विनायगर मंदिर में चतुर्थी के अवसर पर विशेष पूजा हुई।
यहां भगवान गणेश की प्रतिमा 19 फुट 10 इंच ऊंची, 11 फुट 10 इंच चौड़ी और 190 टन वजनी है। ग्रेनाइट से बनी इस प्रतिमा को अवसर पर 50 किलोग्राम चंदन के लेप से सजाया गया। सार्वजनिक आयोजनों के तहत हिंदू मुन्नानी ने सुबह स्थापना अनुष्ठानों के बाद पूरे राज्य में करीब 1.5 लाख गणेश प्रतिमाएं स्थापित करने का काम शुरू किया।
अकेले चेन्नई में वल्लुवर कोट्टम, त्रिप्लिकेन, उत्तर चेन्नई और कोट्टिवाक्कम इलाकों में 5,501 सार्वजनिक प्रतिमाएं स्थापित की गईं। कर्नाटक के बेंगलुरु में ऐतिहासिक बसवनगुड़ी स्थित डोड्डा गणपति मंदिर में श्रद्धालु सुबह जल्दी ही भगवान गणेश के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचने लगे। मंदिर में विशेष पूजा, अभिषेक, पुष्प सज्जा और अन्य अनुष्ठान किए गए तथा श्रद्धालु दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे।
मंदिर अधिकारियों ने बताया कि विशेष अनुष्ठान देर रात करीब दो बजे शुरू हुए और सुबह छह बजे से मध्यरात्रि तक प्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। तेलंगाना में नौ दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव की शुरुआत धार्मिक उत्साह और उल्लास के साथ हुई।
राज्य में गणेश चतुर्थी का प्रमुख आकर्षण हैदराबाद के खैरताबाद में पंडाल में स्थापित विशाल गणेश प्रतिमा रही। इस वर्ष खैरताबाद पंडाल में 69 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इसका नाम ‘पंचमुख संकट हारा महागणपति’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के संकटों को दूर करने की कामना को दर्शाता है।
केरल में भी राज्यभर के गणेश मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु राजधानी तिरुवनंतपुरम के प्रसिद्ध पझावंगडी गणपति मंदिर समेत प्रमुख मंदिरों में पहुंचे और विशेष अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। संबंधित राज्यों के अधिकारियों ने बताया कि बाद में गणेश प्रतिमाओं का निर्धारित जलाशयों में विसर्जन किया जाएगा।
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