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बलिया में आकाशीय बिजली का कहर, बारिश से बचने पेड़ के नीचे खड़े थे चार युवक, वज्रपात से दो की मौत और दो झुलसे

बलिया में आकाशीय बिजली गिरने से मातम पसर गया है. बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े चार युवकों पर वज्रपात हुआ, जिसमें दो की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं दो अन्य गंभीर रूप से झुलस गए.

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बाढ़ से जूझते नेपाल को भारत का बड़ा सहारा, संकट के बीच 18 घंटे बिजली देने का हुआ बड़ा फैसला

नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने वहां के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. इस कुदरती तबाही का सबसे बड़ा असर नेपाल के बिजली उत्पादन तंत्र पर पड़ा है. देश के कई बड़े पनबिजली संयंत्र पानी और मलबे की चपेट में आकर बंद हो गए हैं, जिससे पूरे नेपाल में ऊर्जा का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इस मुश्किल घड़ी में पड़ोसी धर्म निभाते हुए भारत ने एक बार फिर नेपाल का हाथ मजबूती से थाम लिया है. भारत सरकार के केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण को रोजाना 18 घंटे बिजली निर्यात करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है. यह फैसला 13 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है और इस साल के अंत यानी 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा. भारत का यह कदम दिखाता है कि दोनों देशों के बीच सिर्फ कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं, बल्कि संकट के पलों में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की पुरानी परंपरा भी कायम है.

दो प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों से पहुंचेगी बिजली

नेपाल को बिजली पहुंचाने के लिए दोनों देशों के बीच मौजूद आधुनिक ग्रिड प्रणाली का पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है. मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक बिजली की यह आपूर्ति दो अलग-अलग मुख्य रास्तों से की जाएगी. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी मुजफ्फरपुर-ढल्केबर 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन की होगी. इस लाइन के जरिए नेपाल को अधिकतम 600 मेगावाट बिजली भेजी जाएगी. इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए तनकपुर-महेन्द्रनगर 132 केवी सिंगल सर्किट लाइन का भी उपयोग किया जाएगा. इस मार्ग से अधिकतम 54 मेगावाट बिजली दी जा सकेगी. दोनों लाइनों को मिलाकर नेपाल को प्रतिदिन जरूरत के समय एक बड़ी ऊर्जा शक्ति मिलेगी, जिससे वहां के अस्पतालों, उद्योगों और आम घरों में बिजली की कमी नहीं होगी.

दिसंबर में होगी आगे की समीक्षा

बिजली मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि यह व्यवस्था मौजूदा आपात स्थिति को ध्यान में रखकर तुरंत राहत देने के लिए की गई है. दिसंबर 2026 के महीने में दोनों देशों के तकनीकी अधिकारी और ऊर्जा विशेषज्ञ बैठकर हालात की समीक्षा करेंगे. उस समय इस बात का जायजा लिया जाएगा कि नेपाल के क्षतिग्रस्त बिजली घरों की मरम्मत का काम कितना पूरा हुआ है और देश को जनवरी 2027 से कितनी बाहरी बिजली की दरकार होगी. उसी समीक्षा बैठक के आधार पर आगे के बिजली निर्यात की मात्रा और समय सीमा तय की जाएगी. भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने और दोनों देशों के साझा विकास को गति देने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है.

बाढ़ के कारण पनबिजली घरों को भारी झटका

नेपाल अपनी बिजली की अधिकांश जरूरतों के लिए नदियों पर बने पनबिजली संयंत्रों पर निर्भर रहता है. हाल के हफ्तों में हुई भारी बारिश और पहाड़ों से उतरे मलबे ने इन परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है. टरबाइनों में गाद भरने, दीवारों के टूटने और जलभराव के चलते बड़े प्रोजेक्ट बंद पड़े हैं. इससे नेपाल का अपना बिजली उत्पादन एकदम निचले स्तर पर आ गया है. घरों में ब्लैकआउट की नौबत आ गई थी और फैक्ट्रियों का पहिया थमने लगा था. अतिरिक्त बिजली की कोई स्थानीय व्यवस्था न होने के चलते नेपाल सरकार ने भारत से गुहार लगाई थी. भारत ने बिना देर किए इस मांग को स्वीकार करते हुए बिजली के पहिए को घुमा दिया.

राहत और बचाव के लिए पहले से डटे हैं भारतीय जवान

बिजली देने का यह फैसला उस व्यापक मानवीय सहायता का अगला चरण है जो भारत बाढ़ के पहले दिन से नेपाल को दे रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा के तुरंत बाद नेपाल के प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बात की थी और भरोसा दिया था कि भारत हर मोर्चे पर सहायता करेगा. इसके बाद 26 अगस्त 2026 से राहत का एक बड़ा सिलसिला शुरू हुआ. भारतीय वायुसेना के आठ विशेष मालवाहक विमानों ने नेपाल में 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री पहुंचाई. इस सामग्री में बेघर हुए लोगों के लिए टेंट, ओढ़ने के कंबल, जरूरी स्वच्छता किट, अंधेरे से निपटने के लिए सोलर लैंप, जीवनरक्षक दवाएं, बिजली के बड़े जनरेटर, बस्तियों से पानी निकालने वाले शक्तिशाली पंप और हाईमास्ट रोशनी के टावर शामिल थे.

जमीन पर काम कर रहे हैं भारतीय विशेषज्ञ

राहत सामग्री भेजने के साथ ही भारत ने जमीन पर राहत कार्यों को रफ्तार देने के लिए 54 उच्चस्तरीय विशेषज्ञों की टीमें नेपाल भेजी हैं. चिलिमे और लंगतांग जैसे बेहद कठिन और पहाड़ी इलाकों में जहां सुरंगे मलबे से पट गई थीं, वहां भारतीय टनल और कीचड़ बचाव दल नेपाली सेना के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राहत कार्य चला रहे हैं. मलबे में दबे लोगों की तलाश और शवों की पहचान के लिए भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, जो अपने साथ आधुनिक डीएनए किट और तकनीकी उपकरण लेकर गए हैं. इसके अलावा भारतीय डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के दल अस्थायी शिविर लगाकर घायलों और बीमारों का दिन-रात इलाज कर रहे हैं. बाढ़ में टूटी सड़कों और पुलों के कारण कटे संपर्क को फिर से जोड़ने के लिए भारत ने बेली ब्रिज के ढांचे और कुशल इंजीनियरों की टुकड़ियां भी भेजी हैं, ताकि दुर्गम इलाकों तक गाड़ियां और मदद आसानी से पहुंच सके. बिजली की नई खेप से नेपाल के इन सभी पुनर्निर्माण कार्यों को नई ताकत मिलेगी.

यह भी पढ़ें: नेपाल बाढ़ का दर्द अमेरिका तक पहुंचा, लापता अपनों की तलाश में परिवारों ने जताई एकजुटता

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  Sports

Women's T20 Asia Cup: भारतीय गेंदबाज Kranti Gaur पर 10 प्रतिशत जुर्माना, Pakistan पर भी एक्शन

दुबई में महिला टी20 एशिया कप के फाइनल के बाद भारतीय टीम की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ को मैदान पर किए गए इशारे के कारण जुर्माना भरना पड़ा है। आईसीसी ने श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मुकाबले के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के लिए गौड़ की मैच फीस का 10 प्रतिशत काटने का फैसला किया है। इस मामले में उन्हें एक डिमेरिट अंक भी दिया गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, क्रांति गौड़ ने अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में बल्लेबाज के आउट होने के बाद ऐसा इशारा किया, जिसे बल्लेबाज को अपमानित करने वाला या उसके खिलाफ आक्रामक प्रतिक्रिया भड़काने वाला माना गया। इसी आधार पर उन पर आईसीसी की आचार संहिता की धारा 2.5 के तहत प्रथम स्तर का उल्लंघन पाया गया।

यह घटना श्रीलंका की पारी के पहले ही ओवर में हुई। इमेशा दुलानी ने क्रांति गौड़ की पहली गेंद पर लैप शॉट खेलकर चौका हासिल किया। दुलानी ने इसके बाद उसी तरह का शॉट दोबारा खेलने की कोशिश की, लेकिन तीन गेंद बाद वह आउट हो गईं। विकेट मिलने के बाद क्रांति गौड़ काफी उत्साहित नजर आईं और उन्होंने दुलानी को पवेलियन की ओर जाने का इशारा करते हुए विदाई दी।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में विकेट मिलने के बाद खिलाड़ियों का उत्साह दिखाना सामान्य बात है, लेकिन नियमों के तहत विरोधी बल्लेबाज के प्रति अपमानजनक भाषा, इशारे या व्यवहार पर कार्रवाई की जा सकती है। इसी वजह से क्रांति गौड़ का इशारा आचार संहिता के दायरे में आ गया। मैच रेफरी सुप्रिया रानी दास ने कार्रवाई का प्रस्ताव रखा, जिसे भारतीय गेंदबाज ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने आरोप मान लिए, इसलिए मामले की औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी।

गौरतलब है कि क्रांति गौड़ को पिछले 24 महीनों में पहली बार इस तरह के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। इसलिए उनके खाते में सिर्फ एक डिमेरिट अंक जोड़ा गया है। फिलहाल यह एक अंक उनके लिए बड़ी सजा नहीं है, लेकिन भविष्य में इसी तरह के उल्लंघन दोहराने पर कार्रवाई कड़ी हो सकती है। आईसीसी खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाती रही है।

इसी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल मुकाबले में पाकिस्तान की टीम पर भी धीमी ओवर गति के कारण जुर्माना लगाया गया। श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 131 रन का लक्ष्य दिया था। श्रीलंका ने यह लक्ष्य 18.4 ओवर में हासिल कर लिया।

समय में मिली छूट को ध्यान में रखने के बाद पाकिस्तान की टीम निर्धारित ओवर गति से एक ओवर पीछे पाई गई। इसके चलते पाकिस्तान के खिलाड़ियों की मैच फीस का पांच प्रतिशत जुर्माना किया गया। टीम की कप्तान फातिमा सना ने इस कार्रवाई को स्वीकार कर लिया। यह आरोप चौथे अंपायर रबाब अहसन ने लगाया था।

बता दें कि धीमी ओवर गति के मामलों में आईसीसी खिलाड़ियों पर प्रत्येक कम ओवर के लिए उनकी मैच फीस का निर्धारित हिस्सा जुर्माने के रूप में लगाती है। वहीं, लगातार नियम तोड़ने पर टीमों और खिलाड़ियों को अंक कटौती जैसी अतिरिक्त सजा का भी सामना करना पड़ सकता है। महिला एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में ऐसे नियमों का पालन टीमों के लिए खास महत्व रखता है।

एक तरफ भारतीय टीम की खिलाड़ी को मैदान पर किए गए इशारे के लिए आर्थिक दंड मिला है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान को समय पर ओवर पूरे नहीं करने की कीमत चुकानी पड़ी है। दोनों मामलों से साफ है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रदर्शन के साथ खिलाड़ियों का व्यवहार और खेल की तय गति बनाए रखना भी उतना ही अहम है। ये नियम खेल में अनुशासन और खिलाड़ियों के बीच सम्मान बनाए रखने के लिए जरूरी है।

Mon, 14 Sep 2026 21:11:00 +0530

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